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Showing posts from July, 2019

सांसद प्रवेश साहिब सिंह ने दिल्ली में NRC लागू करने की उठायी मांग

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दिल्ली से बीजेपी सांसद  प्रवेश साहिब सिंह ने 30 जुलाई 2019 को संसद में दिल्ली में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के कार्यान्वयन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जघन्य अपराधों में तेजी देखी जा रही है, जिसमें शामिल अपराधी अक्सर बांग्लादेशी अप्रवासी और रोहिंग्या जैसे अवैध घुसपैठिये  पाए जा रहे हैं। । दिल्ली पुलिस ने दिल्ली से अब तक लगभग 16,785 अवैध घुसपैठियों को दिल्ली से रवाना किया है। ये अवैध घुसपैठिये शहर के अंदर इतनी गहराई से घुस गए हैं कि वे अवैध तरीकों से राशन कार्ड करने में कामयाब हो गए हैं, जिससे उनकी पहचान करना पुलिस के लिए मुश्किल हो जाता है। प्रवेश साहिब सिंह ने बसाइदरपुर में हुई ध्रुव त्यागी की हाल की हत्या के मामले का भी उल्लेख किया कहा कि अपराध में शामिल हत्यारे अवैध घुसपैठिये पाए गए थे। NRC का कार्यान्वयन दिल्ली के लिए गंभीर मुद्दा है जो केवल राज्य सरकारों के सहयोग से ही हो सकता है। इसलिए, उन्होंने केंद्र सरकार अनुरोध किया कि दिल्ली में एनआरसी को लागू करे ताकि अवैध घुसपैठियों की पहचान की जा सके आगे की कारवाही की जा सके इससे पहले, प्रवेश साहिब सिंह ने 16 जुलाई

मध्‍य प्रदेश में बाघों की संख्‍या सबसे अधिक

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अंतर्राष्‍ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने नई दिल्‍ली में बाघों के अखिल भारतीय अनुमान-2018 के चौथे चक्र के परिणाम जारी किए। सर्वेक्षण के अनुसार 2018 में भारत में बाघों की संख्‍या बढ़कर 2,967 हो गई है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने इसे भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और बाघों के संरक्षण की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। प्रधानमंत्री ने कहा कि करीब 3,000 बाघों के साथ, भारत आज सबसे बड़ा और सुरक्षित प्राकृतिक वास हो गया है।     प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में, अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे के लिए कार्य की गति तेज हुई है, देश में वन क्षेत्र भी बढ़ा है। 'संरक्षित क्षेत्रों' में भी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2014 में 692 संरक्षित क्षेत्र थे, जिनकी संख्‍या 2019 में बढ़कर 860 से अधिक हो गई है। 'सामुदायिक शरणस्‍थलों' की संख्‍या भी बढ़कर 100 हो गई है, जो 2014 में केवल 43 थी।    इस अवसर पर केन्‍द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु संरक्षण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, केन्‍द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु संरक्षण राज्‍य मंत्री बाबूल सुप्रियो; और मंत्राल

आम जनता के लिए रात 9 बजे तक खुले रहेंगे देशभर के 10 ऐतिहासिक स्थल

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संस्कृति मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रहलाद सिंह पटेल ने घोषणा की है कि देशभर के 10 ऐतिहासिक स्थलों को देखने का समय बढ़ा दिया गया है और यह स्थल प्रातः काल से रात 9 बजे तक आम जनता के लिए खुले रहेंगे। संस्कृति मंत्री ने नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए इस फैसले की जानकारी दी। इसके पहले ये दर्शनी स्थल आम जनता के लिए सुबह 9 बजे से शाम साढ़े 5 बजे तक खुले रहते थे। पटेल ने कहा कि यह निर्णय आम जनता और पर्यटकों के लाभ के लिए लिया गया है जो इन ऐतिहासिक स्थलों की सुंदरता देखने के लिए यहाँ आते हैं। पर्यटन मंत्री ने यह भी बताया कि इन 10 ऐतिहासिक स्थलों के अलावा अन्य ऐतिहासिक स्थलों का भी समय बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। प्रथम चरण में जिन 10 ऐतिहासिक स्थलों को चुना गया है, उनकी सूची इस प्रकार है – क्र. सं. स्मारकों का नाम जिला राज्य 1 राजरानी मंदिर परिसर भुवनेश्वर ओडिशा 2 दूल्हादेव मंदिर, खजुराहो छतरपुर मध्य प्रदेश 3 शेख चिल्ली मकबरा, थानेसर कुरुक्षेत्र हरियाणा 4 सफदरजंग मकबरा दिल्ली

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने की महिलाओं को 4 प्रतिशत रजिस्ट्री शुल्क माफ करने की मांग

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दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर महिलाओं को 4 प्रतिशत रजिस्ट्री शुल्क माफ करने की मांग करते हुये कहा कि इससे महिला सशक्तिकरण बढ़ेगा और महिलाओं के नाम संपत्ति होने से उनकी समाजिक सुरक्षा भी बढ़ेगी।  तिवारी ने अपने पत्र में कहा कि झारखंड सरकार जून, 2017 से महिलाओं को 1 रू. शुल्क में रजिस्ट्री कर रही है। अभी तक सवा लाख महिलाओं के नाम रजिस्ट्री हो चुकी है। अनधिकृत कालोनियों के नियमितिकरण की प्रक्रिया को तेज करने की मांग करने के लिये मनोज तिवारी ने कहा- इन कालोनियों को नियमित करने में नौकरशाहों द्वारा उत्पन्न बाधाओं को दूर किया जाये और एमसीडी को धन मुहैया किया जाये जिससे वह अनधिकृत कालोनियों का नक्शा बना सकें। अनधिकृत कालोनियों में बाउंड्री डिमार्केशन का काम जल्दी करने की मांग करते हुये  तिवारी ने कहा कि बिना डिमार्केशन के कालोनियों के नियमितिकरण की प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकती है इसलिये उसे शीघ्र किया जाये।      दिल्ली सरकार पर अनधिकृत कालोनियों के नियमितिकरण पर रोढ़ा अटकाने का अरोप लगाते मनोज तिवारी ने लिखा कि 2014 में मोदी सरकार बनने के ब

29 जुलाई 1891 को विद्यासागर ने ली अंतिम सांस

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ईश्वर चंद्र बंधोपाध्याय का जन्म 26 सितंबर 1820 को बंगाल के मेदिनीपुर जिले के वीरसिंह गांव में एक अति निर्धन परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम ठाकुर दास बंधोपाध्याय था। इन्होंने प्रायः प्रत्येक परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया। विद्यार्थी जीवन में इन्होंने अनेक विद्यार्थियों की सहायता की। 1841 में इन्हें सर्वप्रथम फोर्ट विलियम कॉलेज में मुख्य पंडित पद पर नियुक्ति मिली। यहीं ये विद्यासागर उपाधि से विभूषित हुए। उच्चतम सम्मान पाकर भी इन्हें वास्तविक सुख निर्धन सेवा में ही मिला।  ये स्त्री शिक्षा के प्रबल समर्थक थे। इन्होंने सैकड़ों विद्यालय स्थापित किए। इनके जीवन साथी का नाम दिनामणि देवी था। इन्होंने अपने इकलौते पुत्र नारायण चंद्र बंधोपाध्याय का विवाह विधवा से किया। ईश्वर चंद्र अपना जीवन साधारण व्यक्ति के रूप में जीते थे लेकिन दान पुण्य राजा की तरह करते थे। इन्होंने 52 पुस्तकों की रचना की, जिनमें 17 संस्कृत में, 5 अंग्रेजी में और शेष बांग्ला में है। जिन पुस्तकों से इन्होंने विशेष साहित्यकीर्ति अर्जित की वे वैतालपंचविंशाति, शकुंतला और सीता वनवास है।      बिहार का जामताड़ा जिला अब

प्रकृति संरक्षण से जुड़ा है मानव अस्तित्व

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प्रत्येक वर्ष 28 जुलाई को विश्व प्रकृति दिवस मनाया जाता है। इस दिन दुनियां के देश प्रकृति संरक्षण के लिये किये जा रहे प्रयासों पर चिंतन करते हैं। विश्व प्रकृति दिवस मनाने का उद्येश्य विलुप्त होते जीव जंतु और वनस्पति की रक्षा का संकल्प लेना है। प्रकृति संरक्षण का समस्त प्राणियों के जीवन तथा इस धरती के समस्त प्राकृतिक परिवेश से घनिष्ठ संबंध है, मगर प्रदूषण के कारण सारी पृथ्वी दूषित हो रही है, जो बड़े खतरे का संकेत दे रहा है। इसी स्थिति को ध्यान में रखकर 1992 में ब्राजील में पृथ्वी सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें विश्व के 174 देशों ने भाग लिया। । इसके पश्चात 2002 में जोहान्सबर्ग में भी पृथ्वी सम्मेलन आयोजित कर विश्व के सभी देशों को पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देने के लिए अनेक उपाय सुझाए गए। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कई प्रजाति के जीव जंतु एवं वनस्पति विलुप्त हो रहे हैं।  ध्यान देने वाली बात है कि जल, जंगल और जमीन, इन तीन तत्वों के बिना प्रकृति अधूरी है, और प्रकृति के बिना मनुष्य जीवन संभव नहीं है। विश्व में सबसे समृद्ध देश वही हुए हैं, जहां यह तीनों तत्व प्रचुर मात्रा में हो। संपूर्ण विश्

आदिवासियों के करमा त्योहार को राष्ट्रीय त्योहारों की सूची में शामिल करने की मांग

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झारखंड के चतरा सांसद सुनील कुमार सिंह ने  संसद में आदिवासियों के करमा त्योहार को राष्ट्रीय त्योहारों की सूची में शामिल कर इस अवसर पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की मांग रखी। सांसद  सिंह ने लोक सभा में  कहा कि करमा प्रकृति पूजक आदिवासियों का सबसे बडा त्योहार है। इसे झारखंड के अलावा मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, असम, पश्चिम बंगला व पूर्वोत्तर के सभी राज्यों सहित देश के तमाम आदिवासी बहुल इलाकेां में धूमधाम से मनाया जाता है।   इस मौके पर पवित्र करम पेड की डाली को काटकर पूजन स्थल पर स्थापित किया जाता है और उसकी विधिवत पूजा - अर्चना की जाती है। वृक्षों के संरक्षण के प्रति इनका समर्पण बेमिसाल है। प्राकृतिक को बरकरार रखने के प्रति इनकी निष्ठा भी अदभुत है। आदिवासी भारत के एकमात्र समुदाय है, जो प्रकृति की गोद में रहते है और उसकी पूजा करते है। वर्तमान में उनकी सांस्कृतिक विरासत उपेक्षित है और उनकी पहचान व अस्तित्व पर भी संकट मंडरा रहा है। पर्यावरण पर मंडराते वैश्विक संकट के मद्देनजर इस समुदाय के रीति - रिवाजों और पर्व - त्योहारों के संरक्षण और संवर्द्धन की जरूरत है। 

देश के 103 कॉलोनियों में सफाई और हरियाली अभियान

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घरों से निकले कचरे को स्रोत से अलग करने, स्वच्छता और हरियाली तथा वर्षा के पानी का संचयन करने के लिए 103 सरकारी कॉलोनियों में 100 दिन का अभियान शुरू किया जा रहा है। आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के जुलाई, 2019 से अक्टूबर, 2019 तक चलने वाले अभियान के लिए दिल्ली की 74 कॉलोनियों और देश के विभिन्न भागों की 29 कॉलोनियों को चुना गया है। 100 दिन की योजना के तहत निम्नलिखित कार्यों को अमल में लाया जाएगा। घरों से निकलने वाले कचरे को स्रोत से अलग करने और घरेलू खाद बनाने के बारे में लोगों को जागरूक करनाः   यह कार्य शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) और कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की मदद से किया जाएगा और लोगों को घरों से निकलने वाले कचरे को अलग-अलग करने तथा जैविक कचरे की खाद बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। शहरी स्थानीय निकाय कॉलोनियों से कचरे के ढ़ेर को अलग करने, उसे ले जाने और उसका निपटारा सुनिश्चित करेंगे। छत पर वर्षा के पानी के संचय के लिए संरचना का निर्माणः  इस कार्य को कुछ चुनी हुई कॉलोनी की इमारतों में केन्द्रीय सार्वजनिक कार्य विभाग द्वारा किया जाएगा, ताकि पानी का संरक्षण और उसका उचित इस्तेमा

पेट्रोलियम उत्पादों को GST के तहत लाया जाए- एसोचैम

एक शीर्ष उद्योग निकाय के रूप में, एसोचैम  ने पेट्रोलियम उत्पादों को शामिल करने और कई स्थानीय और राज्य करों जैसे स्टांप ड्यूटी आदि को जीएसटी के तहत शामिल करने की मांग की है।  “जीएसटी परिषद को एक ज्ञापन में एसोचैम ने कहा है कि  '' पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी से बाहर रखने की दो साल की अवधि लगभग खत्म हो गई है। साथ ही, जीएसटी के बाहर होने वाले इन उत्पादों से व्यवसायों की लागत में वृद्धि होती है। इसलिए, इन उत्पादों को जीएसटी के तहत लाया जाना चाहिए। जीएसटी के तहत शेष स्थानीय और राज्य करों को कम करने की आवश्यकता को देखते हुए ज्ञापन में कहा गया है, "मंडी टैक्स, स्टांप ड्यूटी, रोड टैक्स और वाहन कर की सदस्यता से व्यवसायों को सुव्यवस्थित करने और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के निर्बाध ऋण में मदद मिलेगी। करों का व्यापक प्रभाव कम हो जाएगा। । निर्यातकों को मदद देने के लिए, एसोचैम ने जीएसटी परिषद को सुझाव दिया है कि विभिन्न शुल्क कमियों और बाजार संवर्धन के लिए जारी किए गए स्क्रैप की बिक्री को जीएसटी के अधीन नहीं किया जाना चाहिए। '' सामान्य सेवाओं पर ITC में उलटफेर से निर्यातको

सब श्रद्धालु एक स्वर में बोले, दिल्ली का श्रवण कुमार केजरीवाल

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मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत वैष्णो देवी की चार दिवसीय यात्रा पूरी करके श्रद्धालु बुधवार सुबह दिल्ली पहुंचे। सफदरजंग रेलवे स्टेशन पर राजस्व मंत्री कैलाश गहलोत ने श्रद्धालुओं का  स्वागत किया। अपनी इस तीर्थ यात्रा से बेहद खुश बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने एक स्वर में कहा, दिल्ली का श्रवण कुमार केजरीवाल।     तीर्थ यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का दिल से धन्यवाद प्रकट किया। यात्रियों ने बताया कि यात्रा के दौरान केजरीवाल सरकार ने हर तरह से सभी श्रद्धालुओं का ध्यान रखा। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को सभी प्रकार की सुविधाएं जैसे, एसी ट्रेन, अच्छा खाना, रहने की बेहतरीन सुविधा, बस और अन्य सुविधाएं मुहैया कराई गईं।   यात्रा पर गए श्रद्धालुओं में से एक बुजुर्ग  राधेश्याम ने बताया  कि 20 जुलाई की शाम को दिल्ली से रवाना हुई श्रद्धालुओं की ट्रेन अगले दिन सुबह कटरा रेलवे स्टेशन पहुंची। रेलवे स्टेशन से लेकर होटल तक सरकार द्वारा बेहतरीन बस सुविधा की व्यवस्था की गई थी। शानदार होटल में श्रद्धालुओं के रहने और खाने का इंतजाम किया गया। अगले दिन सभी यात्री माता वैष्णो

चौथे स्तंभ से ईमानदारी और निष्पक्षता का प्रकाशदीप बनने का अनुरोध

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उपराष्‍ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने मीडिया को नैतिक और स्वतंत्र पत्रकारिता के मानकों के उल्‍लंघन के खिलाफ आगाह किया है और चौथे स्तम्भ से ईमानदारी और निष्पक्षता का प्रकाशदीप बनने का अनुरोध का आग्रह किया है। उपराष्‍ट्रपति ने पत्रकारिता सहित विभिन्‍न क्षेत्रों में मूल्‍यों के विकृत हो जाने पर चिंता प्रकट की और इस बात पर जोर दिया कि समाचारों को विचारों के साथ मिलाया नहीं जाना चाहिए। उन्‍होंने पत्रकारों को सलाह दी कि वे अंतिम निर्णय पाठकों पर छोड़ दें और खुद कोई निर्णय नहीं सुनाएं। उपराष्ट्रपति ने यह बात हैदराबाद में वरिष्‍ठ संपादक और लेखक  दिवंगत गोरा शास्त्री के शताब्दी समारोह के अवसर पर उन्‍हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कही।  उन्होंने कहा कि समाचारों और विचारों के अंतर को हमेशा संतुलित रखना चाहिए और संयमशीलता के माध्यम से अभिव्यक्ति करनी चाहिए। गोरा शास्‍त्री द्वारा की गई स्‍वतंत्र पत्र‍कारिता और उनके द्वारा लिखे गये लेखों को याद करते हुए उपराष्‍ट्रपति ने कहा, 'स्‍वतंत्र एवं निर्भीक पत्रकारिता के महत्‍व पर बल देने के लिए वे उन घटनाओं की याद कर रहे हैं, जो वर्तमान में नदारद है। मौज

गांवों में स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं में सुधार लाने में मदद करें भारतीय समुदाय के चिकित्सक

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उपराष्‍ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने भारतीय समुदाय के चिकित्‍सकों से मांग करते हुए कहा कि वे अपने पुश्‍तैनी गांवों को गोद लेकर और प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों को सशक्‍त बनाकर समाज का ऋण चुकायें। भारतीय मूल के चिकित्‍सकों के अमरीकी संघ (एएपीआई) और भारतीय मूल के चिकित्‍सकों के वैश्विक संघ (जीएपीआईओ) द्वारा हैदराबाद में आयोजित 13वें वैश्विक स्‍वास्‍थ्‍य सेवा शिखर सम्‍मेलन का उद्घाटन करते हुए वेंकैया नायडू ने चिकित्‍सकों को सलाह दी कि वे अपने गांव के प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों के क्रियाकलाप में रूचि लें और उनमें सुधार लाने में मददगार बनें। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि अपने देश में ग्रामीण क्षेत्रों से लगभग 86 प्रतिशत लोग लंबी दूरी तय कर ईलाज के लिए जाते हैं। इसलिए प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों की ओर अधिक ध्‍यान दें, क्‍योंकि ये केन्‍द्र कम खर्च पर बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सेवा प्रदान करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। असंक्रामक रोगों के बढ़ते मामले पर चिंता व्‍यक्‍त करते हुए, उन्होंने चिकित्‍सकों से कहा कि वे कंपनी की सामाजिक उत्‍तरदायित्‍व (सीएसआर) की तर्ज पर 'चिकित्‍सा सामा

मधुर भंडारकर की फिल्‍म ‘इंदु सरकार’ बनी नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया का हिस्‍सा 

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मधुर भंडारकर की राजनैतिक थ्रिलर फिल्‍म इंदु सरकार अब नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया (एनएफएआई) का हिस्‍सा बन गई है।  जाने माने फिल्‍म निर्माता भंडारकर ने स्‍वयं इस फिल्‍म की एक डिजिटल कॉपी एनएफएआई के निर्देशक प्रकाश मग्‍दुम को पुरालेखण के लिए सौंपी है। सच्‍ची घटनाओं पर आधारित और कीर्ति कुल्‍हारी, तोता रॉय चौधरी, नील नितिन मुकेश, सुप्रिया विनोद, रश्मि झा और अनुपम खेर की मुख्‍य भूमिकाओं से सजी इस राजनीतिक थ्रिलर में 1975 से 1977 तक की आपातकालीन अवधि का चि‍त्रण किया गया है। इस फिल्‍म के निर्देशक मधुर भंडारकर ने त्रिशक्ति से पहला फिल्‍म निर्देशन किया था उसके बाद उन्‍होंने कई गंभीर और व्‍यावसायिक रूप से सफल फिल्‍मों का निर्देशन किया। उनकी फिल्‍में ग्‍लैमर की दुनिया की हकीकत की प्रस्‍तुति करने के लिए जानी जाती हैं। सामाजिक मुद्दों पर उन्‍हें चांदनी बार (2001) के लिए सर्वश्रेष्‍ठ फिल्‍म का राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कार दिया गया था। भंडारकर को क्रमश: सर्वश्रे‍ष्‍ठ फीचर फिल्‍म पेज 3 (2005) और ट्रैफिक सिग्‍नल (2007) के लिए राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कारों से नवाजा जा चुका है।

21 जुलाई 1920 को श्री मां सारदा ने ली अंतिम सांस

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सारदामणि मुखोपाध्याय भारत के सुप्रसिद्ध संत स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस की आध्यात्मिक सहधर्मिणी थी। ये श्री मां के नाम से परिचित हैं। इनका जन्म 22 दिसंबर 1853 को बंगाल स्थित जयरामबाटी  गांव में एक गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ। इनके पिता रामचंद्र मुखोपाध्याय और माता श्याम सुंदरी देवी कठोर परिश्रमी, सत्यनिष्ठ एवं भगवद् परायण थे।      5 वर्ष की उम्र में इनका विवाह रामकृष्ण देव से हुआ। जब रामकृष्ण के साथ विवाह हेतु कोई योग्य कन्या नहीं मिल रही थी तब रामकृष्ण ने जयरामबाटी में पता लगाने के लिए कहा था। रामकृष्ण ने सारदा को देखकर कहा था कि इस कन्या का जन्म मेरे लिए ही हुआ है। इनके भक्तों का मानना है कि मां सारदा और रामकृष्ण देव कई जन्मों से एक दूसरे के सहचारी थे।      रामकृष्ण देव सारदा को जगत्माता के रूप में देखते थे। 1872 को काली पूजा की रात रामकृष्ण ने जगत्माता के रूप में सारदा की पूजा की। सारदा रामकृष्ण की प्रथम शिष्य थी।  रामकृष्ण ने इन्हें दिव्य मंत्र सिखाए थे। 1886 में रामकृष्ण के प्राणांत के बाद सारदा तीर्थ दर्शन करने चली गई।  वहां से लौटने के बाद ये कामारपुकुर में रहने

सावधान..मानसून में ये खाना आपको कर सकता है बीमार

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अधिकतर लोग बरसात के मौसम में संक्रमण एवं रोगाणुओं से दूषित खाद्य पदार्थ को खाने से बीमार हो जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि इन दिनों अपने स्वास्थ्य एवं खान-पान का खास ख्याल रखा जाए। इसके लिये बारिश में खासकर इन पांच तरह के खाद्य पदार्थों से दूर रहें- मानसून में पत्तीदार सब्जियों से करें परहेज मानसून में, पालक, फूलगोभी और गोभी जैसे पत्तेदार सब्जियों से बचें, क्योंकि बारिश के दौरान इनमें धूल मिट्टी रहती हैं, और जो अच्छी तरह नहीं साफ होने से बैक्टीरिया पैदा करते हैं, जिनसे  संक्रमण होने की संभावना होती है, साथ ही पेट से संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। हालांकि बारिश के दिनों के अलावा हरी पत्तेदार सब्जियों के सेवन के कई सारे फायदे भी हैं। सड़क किनारे बिकने वाले कटे फल एवं जूस का सेवन करने से बचें- बरसात के मौसम की नम हवा में लंबे समय तक आने वाली किसी भी खाद्य पदार्थ को लेने से बचना चाहिए। सड़क किनारे फल बेचने वाले जब फलों को काटकर बेचते हैं, तब प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से यह फल या जूस दूषित हो सकते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिये हानिकारक हैं। इसलिए, हमेशा घर पर ताजे फल का

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से एनडीआरएफ ने 11 हजार से अधिक लोगों को निकाला सुरक्षित

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मूसलाधार वर्षा के कारण देश के कई हिस्‍सों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं जिससे आम जन जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राष्‍ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) .असम और बिहार के बाढग्रस्‍त क्षेत्रों में लगातार बचाव अभियान चला रहा है। बचावकर्मी रबर की नौकाओं के जरिए बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्‍थानों पर पहुंचा रहे हैं और प्रभावित क्षेत्रों में खाने के पैकेटों और पीने के पानी जैसी आवश्‍यक सामग्रियों की आपूर्ति भी कर रहे हैं। असम मानसून के मद्देनजर असम में एनडीआरएफ की 18 टीमें तैनात की गई हैं। राज्‍य के मोरीगांव जिले में तैनात एनडीआरएफ की टीम ने आज राहत और बचाव अभियान चलाते हुए बाढ़ में फंसे 500 गांववासियों को सुरक्षित स्‍थानों पर पहुंचाया। इसके अतिरिक्‍त   एनडीआरएफ के डॉक्‍टरों तथा अर्द्धचिकित्‍सकों की टीम ने गोलाघाट जिले में चिकित्‍सा शिविर भी लगाया और करीब 116 जरूरतमंद लोगों को चिकित्‍सा सुविधाएं उपलब्‍ध कराईं।  बिहार  एनडीआरएफ के कई दल बिहार के अररिया, दरभंगा, कटिहार, मधुबनी, मोतीहारी, सीतामढ़ी और सुपौल जिलों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं तथा बाढ

उत्तर भारतीय आम के निर्यात को बढावा देने समुद्री मार्ग द्वारा लखनऊ से इटली भेजी गई पहली खेप

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उत्तर भारत से आम के निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए 10 टन आम(चौसा) की पहली खेप समुद्री मार्ग से 15 जुलाई,2019 को उत्तरप्रदेश मंडी परिषद पैक हाउस मलिहाबाद,लखनऊ से इटली भेजी गई। इस नौवहन को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण(एपीडा) द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की गई।  आम की इस खेप को रीफर कंटेनर द्वारा गुजरात के पीपावाव बंदरगाह भेजा जाएगा, जहां से यह स्पेन के रास्ते इटली पहुंचेगा। आम की इस खेप के लगभग 20 से 22 दिन में लखनऊ से इटली पहुंचने की संभावना है। सामान्य रूप से उत्तरप्रदेश से आमो का निर्यात हवाई सेवा द्वारा किया जाता रहा है,लेकिन लखनऊ से यूरोप तक सामान भेजने की लागत बेहद अधिक है। उत्तरप्रदेश में अच्छी श्रेणी के आम होने के बाद भी लखनऊ से सीमित संख्या में हवाई सेवा होने तथा हवाई माल भाडे की दर अधिक होने के चलते आम का निर्यात आसान नहीं था। वायु सेवा के द्वारा प्रति किलोग्राम आम निर्यात करने की दर जहां 120 रूपए प्रति किलो थी, वहीं समुद्र मार्ग से इसे यूरोप भेजने में सिर्फ 28 रूपए प्रति किलो की लागत आएगी। भारत से कृषि

भारतीय रेलवे का पैरा मेडिकल स्‍टाफ के लिए सबसे बड़ा भर्ती अभियान

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भारतीय रेलवे द्वारा पैरा मेडिकल स्टाफ के लिए सबसे बड़ा भर्ती अभियान चलाया जाएगा। पैरा मेडिकल स्‍टाफ की विभिन्‍न श्रेणियों के 1923 पदों के लिए 19 जुलाई, 2019 से कंप्‍यूटर आधारित परीक्षा आयोजित की जाएगी। ये परीक्षा 19 से 21 जुलाई तक प्रत्‍येक दिन तीन शिफ्ट में होगी जिसमें 4.39 लाख से ज्‍यादा उम्‍मीदवार शामिल होंगे। परीक्षा के लिए देश के 107 छोटे बड़े शहरों में 345 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।        यह पहली बार है जब रेलवे द्वारा आयोजित किसी भर्ती परीक्षा में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्‍ल्‍यूएस) के उम्‍मीदवारों के लिए आरक्षण की व्‍यवस्‍था की गई है। प्रतिवर्ष कुल रिक्त पदों में से 10 प्रतिशत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्‍ल्‍यूएस) के लिए आरक्षित करने की नई व्‍यवस्‍था के तहत इस परीक्षा में 4654 ईडब्‍ल्‍यूएस उम्‍मीदवार हिस्‍सा लेंगे।        कंप्‍यूटर आधारित यह परीक्षा 90 मिनट की अवधि की होगी जिसमें निशक्‍तजनों को 30 मिनट का अतिरिक्‍त समय दिया जाएगा। परीक्षा में पेशे से जुड़े विषयों , सामान्य ज्ञान , अंकगणित, सामान्य विज्ञान तथा तार्किक और बौद्धिक क्षमता आंकने से संबधित  बहुविकल्पीयवस

छत्तीसगढ़ की माटी का लगान ‘‘भुवन‘‘ ने अपनी नायाब बुनकरी से उतारा

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बड़े पर्दे पर भारत की सबसे मशहूर फिल्म लगान की कहानी छत्तीसगढ़ के ''भुवन'' के संघर्ष और सफलता के इर्द-गिर्द घूमती है। छत्तीसगढ़ के भुवन का लगान, ब्रिटिश हुकूमत के । यह लगान परम्परागत बुनकरों के लिये मल्टीनेशनल कम्पनियों द्वारा लाई गई चुनौतियों, गांव वालों के संघर्षो तथा परिवार के अरमानों व इच्छाओं को पूरा करने की दिशा में किये गये प्रयासों का था।           यह कहानी छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले के ग्राम बिलाईगढ़ के युवा 'भुवन' के होसलों की है। जिसने छोटी सी उम्र में अपने पिता के बुनकरी के कौशल को सहेजने का कार्य करते हुए प्रशिक्षण द्वारा अपने हुनर को और अधिक तराशा। आज इस भुवन के बनाये परिधान व साड़ियां दिल्ली में प्रदर्शनी के लिये लग रही है, जहां पेज-3 के लोगों द्वारा उसके बनाये कपड़े हाथों-हाथ लिये जा रहे है।           'भुवन' के कौशल में और अधिक निखार लाने में सबसे अहम योगदान छत्तीसगढ़ के ग्रामोद्योग विभाग का था। विभाग के अधिकारियों से भुवन को मध्यप्रदेश के महेश्वर में बुनकरी की एक संस्था द्वारा, जो नई तकनीकों, डिजाईन आदि में निःशुल्क प्रशिक्षण देती है, उसकी

बेमिसाल पत्रकारिता का हिस्सा रहे प्रभाष जोशी

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प्रभाष जोशी हिन्दी पत्रकारिता के बहुचर्चित आधार स्तंभों में एक थे। इनका जन्म 15 जुलाई 1936 को मध्य प्रदेश के इंदौर के निकट बड़वाहा में हुआ। सामाजिक विषमताओं का अध्ययन कर ना केवल समाज को खबर देते थे अपितु उसे दूर करने का हर संभव प्रयास इनकी बेमिसाल पत्रकारिता का हिस्सा रहा है।      इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत इंदौर से प्रकाशित होने वाली हिन्दी दैनिक नई दुनिया से की। 1974 से 1975 तक एक्सप्रेस समूह के हिन्दी साप्ताहिक प्रज्ञा नीति का संपादन किया। इनकी लेखन में विविधता और भाषा में लालित्य का अद्भुत समागम रहा। देशज संस्कारों और सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पित प्रभाष जोशी सर्वोदय और गांधीवादी विचारधारा में रचे बसे थे। इन्होंने जनसत्ता को आम आदमी का अखबार बनाया। इनकी प्रमुख पुस्तकें राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुई है। हिन्दी भाषा और साहित्य के योगदान के लिए इन्हें शलाका सम्मान प्रदान किया गया।      अपनी धारदार लेखनी और बेबाक टिप्पणियों के लिए मशहूर प्रभाष जोशी क्रिकेट प्रेम लिए भी चर्चित थे। इसी की बानगी रही कि गाजियाबाद के वसुंधरा कॉलोनी स्थित अपने निवास में 5 नवंबर 2009 की मध्यरात्रि म

प्रकृति के वरदान से भरी जादुई जगह है सिक्किम

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  सिक्किम को भारत के सुन्दर शहरों में से एक माना जाता है और प्रकृति के वरदान से भरी यह जादुई जगह हिमालय पर्वत क्षेत्र में स्थित है। हमारे देश भारत के ऐसी कई जगहों में यह जगह भी कई महत्वपूर्ण स्थानों के लिए मशहूर है। सिक्किम के बारे में यह कहा जाता है कि अपने जीवनकाल में आप यहाँ नहीं गए तो आपने कुछ खोया है। दरअसल, सिक्किम एक पहाड़ी इलाका है जो हिमालय पर्वत इलाके में बसा है। सिक्किम राज्य में कई पहाड़ी जगह हैं जिनकी उंचाई 280 मीटर से 8,585 मीटर तक है। राज्य का सबसे ऊंचा बिंदु माउंट कंचनजंगा है, जिसे पृथ्वी की तीसरी सबसे ऊँची चोटी के रूप में भी जाना जाता है। सिक्किम की सीमा के पूर्व में भूटान, पश्चिम में नेपाल और उत्तर में तिब्बत की ऊँची चौरस भूमि पड़ती है। इस राज्य में करीबन 28 पहाड़ की चोटियाँ , 227 अत्यधिक उंचाई वाले तालाब और 80 हिम नदियां हैं। एक ऐसी चीज जो यहाँ की भौगोलिक स्थिति को और अनोखा बनाती है वह है यहाँ मौजूद करीब 100 नदियाँ, धारा और कई प्रमुख गर्म सोता। सिक्किम का गर्म सोता जिसका स्वाभाविक औसतन तापमान 50 डिग्री सेल्सियस होता है, काफी खास है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इसमें

विलुप्त हो चुकी शान्तिरानी साड़ी पुर्नजीवन के बाद फिर से साड़ी प्रेमियों की पसंद बनी

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 देश और विदेश में छत्तीसगढ़ की समृद्ध कारीगरी का उदाहरण बनी शान्तिरानी साड़ी नई दिल्ली के साड़ी प्रेमियों के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। 1 से 10 जुलाई तक चलने वाली  नई दिल्ली के छत्तीसगढ़ भवन में 1 से 10 जुलाई तक चलने वाली हैंडलूम प्रदर्शनी में अब तक सैकड़ों  खरीददारों ने छत्तीसगढ़ी बुनकरों से उनके उत्पाद खरीदे हैं। हर उत्पाद बेहद खास हैं, जिनमें बुनकरों ने अपनी भरपूर कलाकारी जैसे पिरो दी है। उन्हीं में से एक शान्तिरानी नामक साड़ी है। इस बारे में कहा जा रहा है कि कोसा साड़ियों की कारीगरी के  लिए प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ के बुनकरों ने एक विलुप्त हो चुकी साड़ी को पुर्नजीवन प्रदान किया है । शान्तिरानी के नाम से प्रसिद्ध यह विशिष्ट कारीगरी वाली साड़ी 1980 के पूर्व काफी चलन में थी और छत्तीसगढ़ तथा बाहर के प्रदेशों के लोग भी इसे काफी पसंद करते थे । परन्तु अपनी दुरूह शैली और अत्यधिक परिश्रम के चलते इसे कारीगरों ने बनाना बंद कर दिया था । छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के बुनकरो ने पुराने संदर्भ को जुटा करे परिश्रम से इसे पुनः नया जीवन प्रदान कर दिया है । यह साड़ी अब पुनः देश और विदेश में छत्तीसगढ़ की समृद्ध कारीगरी को उद

मुखर से उम्मीदें

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अक्सर लोगों के मन में कई ऐसी बातें  होती हैं, जिन्हें जाहिर करने की कला उन्हें नहीं आती और मन की बात मन में ही रह जाती है, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी होते हैं, जो खुलकर अपनी बात लोगों के सामने रखते हैंऔर मुखर कहलाते हैं। कई सारी बातें दिल में रखने वाले शांत एवं गंभीर प्रवृति वाले होते हैं, जिन्हें समझने के लिये शायद इस बदलते वक्त में किसी के पास समय नहीं और प्रायः उनका मौन रहना चुभन पैदा करता है। वहीं दूसरी तरफ ऐसे व्यक्तित्व जो अपने दिल की सारी बात जाहिर कर देते हैं, उनकी अधिकतम बातें लोगों तक पहुँचती है और लोग उन्हें ज्यादा जानते और समझते हैं। ऐसे मुखर व्यक्ति उन तमाम लोगों की भी पसंद होते हैं, जो स्वयं करना तो बहुत कुछ चाहते हैं, मगर स्वभाववश कर नहीं पाते और ऐसे में उनकी बात रखने वाला कोई और मिल जाए तो फिर उस व्यक्ति की लोकप्रियता लाजिमी है। एक लोकप्रिय व्यक्तित्व हर दिल, हर समुदाय और वर्ग का चहेता होता है, चाहे वह कितने ही विरोध से घिरा हो। बाधाएँ उसकी लोकप्रियता को कम नहीं कर सकतीं और ये सारी बातें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर लागू होती हैं, जो अपने दूसरे कार्यकाल के लिये बड़े बहुमत क

पैरों से बनी पायल साड़ी छत्तीसगढ़ भवन में लगी प्रदर्शनी में बनी आकर्षण का केन्द्र

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नई दिल्ली के छत्तीसगढ़ भवन में लगी छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बुनकरों द्वारा निर्मित साड़ियों की प्रदर्शनी में पायल साड़ी प्रशंसको के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है । इस साड़ी की कारीगरी इतनी महीन हैं कि इसको बनाने में केवल पैरों का उपयोग किया जाता है और इसमें 20 से 22 दिन लगते हैं  । पायल साड़ी का नाम पायल आभुषण की डिजाईन पर रखा गया है जो महिलाएं पैरों में पहनती हैं । छत्तीसगढ़ भवन में एक जुलाई से लगी प्रदर्शनी में रायगढ़ और जांजगीर चांपा से आये बुनकरो के स्टाल पर यह साड़ी उपलब्ध है ।  छत्तीसगढ़ भवन में लगी इस प्रदर्शनी में बस्तर की खापा डिजाईन , ब्लाक प्रिंट और जाला फेरा साड़ी भी साड़ी प्रेमियों की पसंद बनी हुई है और बड़ी संख्या में इन डिजाईनों की बिक्री भी हुई है।  जांजगीर चांपा से आये बुनकर यशवंत ने बताया कि उनके जिले में ब्लाक प्रिंट का कार्य अधिक होता है । उन्होंने बताया कि साड़ी पर प्रिंटिग कार्य के बाद उसे धूप में सुखाया जाता है और उस समय ही उसके सही रंग का पता चलता है । उन्होंने कहा कि यह काफी विशेषज्ञता वाला कार्य है और लंबे समय के अनुभव के बाद इसमें सफलता मिलती है । यशवंत ने बताया कि बदलते दौर म

7 जुलाई 1896 को हुई भारत में सिनेमा की शुरुआत

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भारत में सिनेमा की शुरूआत का श्रेय लुमियर भाइयों को जाता है। दरअसल, फ्रांस की राजधानी पेरिस लुमियर भाइयों का जन्म एक फोटोग्राफर के यहां हुआ था। इन भाइयों ने 1894 में सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक एडिशन द्वारा आविष्कृत सिनेटोस्कोप देखा और 13 फरवरी 1895 को एक प्रोजेक्टर तैयार की। 22 मार्च 1895 को एक फिल्म तैयार कर सोसायटी फॉर इंकरेजमेंट ऑफ नेशनल इंडस्ट्री के सदस्यों के सम्मुख इसका प्रदर्शन किया। इन भाइयों ने इस कला को सिनेमैटोग्राफ का नाम दिया। ये कला इसी नाम से चल रही है।      20 फरवरी 1896 को इन भाइयों ने इस कला का प्रदर्शन लंदन में किया। भारत में 7 जुलाई 1896 को तत्कालीन ब्रिटिश गवर्नर ने सारी सामग्री मंगवा कर बंबई के वॉटसन होटल में अपने मित्रों को फिल्म दिखाई। टाइम्स ऑफ इंडिया इस घटना को सदी का चमत्कार कहा। भारत में फिल्म प्रदर्शन की शुरुआत यहीं से हुई। इसलिये भारत में सिनेमा स्थापना का श्रेय लुमियर भाइयों को जाता है।      1913 में दादा साहब फाल्के ने भारत की पहली सिनेमा राजा हरिश्चंद्र बनाई। अपनी इस योगदान के कारण दादा साहब फाल्के भारतीय सिनेमा के पितामह कहलाए। राजा हरिश्चंद्र का प्रदर्शन

खेल जगत से जुड़ी हस्तियाँ भी हुई छत्तीसगढ़ के हैंडलूम और कोसा की दीवानी

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नई दिल्ली 5 जुलाई 2019 – छत्तीसगढ़ भवन में लगी छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बुनकरों द्वारा निर्मित हैंडलूम और हस्तकला प्रदर्शनी  दिल्ली और उसके आसपास के हैंडलूम कला पारखियों के आकर्षण का केन्द्र बन गयी है । छत्तीसगढ़ भवन , 7 सरदार पटेल मार्ग पर लगी इस प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध रायगढ़ , चांपा और बिलासपुर के बुनकरों के विविष्ट उत्पादों को विक्रय के लिए प्रदर्शित किया गया हैं ।  सामान्यतः इस प्रकार की प्रदर्शनी और सेल त्यौहार के समय लगती है लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने पहल करके ऑफ सीजन में भी बुनकरों को अपने उत्पादों को विक्रय करने के लिए एक अवसर प्रदान किया है । बुनकरों ने इसके लिए राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया है ।  छत्तीसगढ़ के  बुनकरों  की कारीगरी और उनके द्वारा बनाए वस्त्रों की प्रसिद्धि दिल्ली में काफ़ी  तेजी से फ़ैल रही हे। अब तो खेल जगत से जुड़ी हस्तियाँ भी  नई दिल्ली के छत्तीसगढ़ भवन में लगी प्रदर्शनी में ख़रीदारी करने पहुँच रहे हे। आज रणजी क्रिकेट और हॉकी के प्रसिद्ध खिलाड़ियों ने नई दिल्ली के छत्तीसगढ़ भवन में दस्तक दी और यहाँ लगी छत्तीसगढ़ के बुनकरों की प्रदर्शनी में जमकर खरीददारी की ।

जनसंख्या वृद्धि दर में आने वाले दो दशकों में भारी गिरावट का अनुमान

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केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से संसद में पेश की गई 2018-19 की आर्थिक समीक्षा में भारत की जनसंख्या पर प्रकाश डालते हुए कहा गया है कि आने वाले दो दशकों में देश की जनसंख्या वृद्धि दर में काफी गिरावट देखी जाएगी। हालांकि बड़ी संख्या में युवा आबादी की वजह से देश को जनसांख्यिकीय लाभांश का फायदा मिलता रहेगा, लेकिन 2030 की शुरूआत से कुछ राज्यों में जनसंख्या स्वरूप में बदलाव से अधिक आयु वाले लोगों की तदाद बढ़ेगी। इन राज्यों की आबादी में बदलाव की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है। वर्ष 2041 के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर जनसंख्या अनुमान यह दर्शाता है कि भारत जनसंख्या स्वरूप में बदलाव के अगले चरण में पहुंच चुका है। आने वाले दो दशकों में जनसंख्या वृद्धि दर में भारी गिरावट, कुल गर्भधारण दर में हाल के वर्षों में आई कमी तथा 2021 तक इसका और कम हो जाना इसकी प्रमुख वजह होगी। ऐसे समय जबकि सभी प्रमुख राज्यों में जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट देखी जा रही है । बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में यह अभी भी काफी ऊंचे स्तर पर है। अगले दो दशकों में देश में जनसं

महाराजा इंद्रद्युम्न ने बनवाई थी  जगन्नाथपुरी की प्रतिमाएं

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     महाराजा इंद्रद्युम्न सपरिवार उड़ीसा स्थित नीलांचल सागर के पास रहते थे। एक बार जगन्नाथ कृष्ण की अनुकंपा से उनकी इच्छा हुई कि जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा की प्रतिमाएं निर्मित कराएं। वे सोचते रहे कि किस वस्तु से इन प्रतिमाओं का निर्माण हो। एक दिन उन्हें सागर के ऊपर एक विशाल काष्ठ खंड तैरता हुआ मिला। उन्होंने आंतरिक प्रेरणा से निश्चित किया, कि प्रतिमाएं इसी काष्ठ खंड से निर्मित होंगे।      लेकिन पुनः चिंतित हो उठे कि इसके लिए उपयुक्त शिल्पी कहां मिलेगा। तब देव योग से देव शिल्पी विश्वकर्मा ने वृद्ध शिल्पी के रूप में उनके पास आकर कहा- मैं 21 दिनों में इन प्रतिमाओं का निर्माण करा दूंगा, लेकिन कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। वो काष्ठ खंड के साथ कमरे में बंद हो गये।      राजा तो निश्चित प्रतिमाओं के निर्मित होने की प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन रानी गुंडिचा का नारी मन सहज ही द्रवित हो गया। 15 दिन बीतते पर  रानी ने सोचा, इतने दिनों में तो वह शिल्पी खान- पान के अभाव में मृत्यु को प्राप्त हो गया होगा। उन्होंने कमरा खुलवा दिया। अंदर अपूर्ण प्रतिमाएं पड़ी थे, पर शिल्पी नहीं था। उसी समय आकाशवाणी हुई। हम

क्या आप जानते हैं, क्रिकेट पुरूष विश्व कप से पहले महिला विश्व कप की हुई थी शुरूआत..?

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इन दिनों 12वां क्रिकेट विश्व कप का आयोजन चल रहा है, जिसे क्रिकेट प्रेमी बड़े जोश के साथ देख रहे हैं, और विजेता का भी आंकलन कर रहे हैं। लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि इस क्रिकेट विश्व कप का इतिहास क्या है, और सबसे पहले किस टीम से इसकी शुरूआत हुई ? तो आपको यह जानकर बहुत हैरानी होगी कि क्रिकेट के पुरुष विश्व कप से पहले महिला विश्व कप की शुरुआत हो चुकी थी। पुरूष विश्व कप 44 साल पुराना है तो महिला विश्व की शुरुआत 20 जून, 1973 को ही हो चुकी थी। तब सात टीमों ने महिला विश्व कप में हिस्सा लिया था। भले ही इंग्लैंड की पुरूष टीम कभी चैंपियन न बन पायी हो लेकिन तब मेजबान इंग्लैंड की महिला टीम ऑस्ट्रेलिया की महिला टीम को 92 रनों से हराकर चैंपियन बनी थी। खास बात ये भी है कि इंग्लैंड के एक कारोबारी जैक हेवर्ड ने इस आयोजन के लिए 40 हजार पाउंड डोनेशन के रूप में दिया था।   महिला विश्व कप के पहले आयोजन के करीब दो साल बाद जून, 1975 में क्रिकेट विश्वकप का आयोजन किया गया। पहली बार यह आयोजन इंग्लैंड में 60 ओवरों के विश्वकप के रूप में हुआ यानी प्रत्येक पारी 60-60 ओवरों की हुई। इस आयोजन के लिए बीमा कंपनी प्र

डॉक्टर्स डे पर क्यों जानना है जरूरी डॉ. बिधान चन्द्र राय के बारे में

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1 जुलाई यानि डॉक्टर्स डे। डॉक्टर को धरती पर दूसरा भगवान कहा जाता है, क्योंकि वह लोगों को विभिन्न रोगों से मुक्त करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जिन्हें जीवन रक्षक के रूप में जाना जाता है। हर साल 1 जुलाई को इन जीवन रक्षक के नाम  डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। दरअसल 1 जुलाई को डॉक्टर्स डे मनाने के पीछे की वजह डॉक्टर बिधान चन्द्र राय हैं, जिनके सम्मान में डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। 1 जुलाई पश्चिम बंगाल के द्वितीय मुख्यमंत्री बिधान चंद्र राय की जन्म और पुण्यतिथि है।  चिकित्सक तथा स्वतंत्रता सेनानी बिधान चंद्र राय का दुर्लभ संयोग है कि इनकी जन्मतिथि 1 जुलाई 1882 और पुण्यतिथि 1 जुलाई 1962 है।   बिधान चन्द्र राय कायस्थ महाराजा प्रतापदित्य के वंशज थे। इनके पूर्वज बंगाल के राजघराने से संबंधित थे। इनके पूर्वजों ने मुगलों से जमकर मुकबला किया। इनके दूरदर्शी नेतृत्व के लिए इन्हें राज्य का वास्तुकार कहा जाता रहा। ये देशबंधु चित्तरंजन दास के प्रमुख सहायक थे और अल्पावधि में ही इन्होंने बंगाल की राजनीति में प्रमुख स्थान बना लिया। बिधान चन्द्र राय, सुभाष चंद्र बोस राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में