चौथे स्तंभ से ईमानदारी और निष्पक्षता का प्रकाशदीप बनने का अनुरोध


उपराष्‍ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने मीडिया को नैतिक और स्वतंत्र पत्रकारिता के मानकों के उल्‍लंघन के खिलाफ आगाह किया है और चौथे स्तम्भ से ईमानदारी और निष्पक्षता का प्रकाशदीप बनने का अनुरोध का आग्रह किया है। उपराष्‍ट्रपति ने पत्रकारिता सहित विभिन्‍न क्षेत्रों में मूल्‍यों के विकृत हो जाने पर चिंता प्रकट की और इस बात पर जोर दिया कि समाचारों को विचारों के साथ मिलाया नहीं जाना चाहिए। उन्‍होंने पत्रकारों को सलाह दी कि वे अंतिम निर्णय पाठकों पर छोड़ दें और खुद कोई निर्णय नहीं सुनाएं। उपराष्ट्रपति ने यह बात हैदराबाद में वरिष्‍ठ संपादक और लेखक  दिवंगत गोरा शास्त्री के शताब्दी समारोह के अवसर पर उन्‍हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कही।


 उन्होंने कहा कि समाचारों और विचारों के अंतर को हमेशा संतुलित रखना चाहिए और संयमशीलता के माध्यम से अभिव्यक्ति करनी चाहिए। गोरा शास्‍त्री द्वारा की गई स्‍वतंत्र पत्र‍कारिता और उनके द्वारा लिखे गये लेखों को याद करते हुए उपराष्‍ट्रपति ने कहा, 'स्‍वतंत्र एवं निर्भीक पत्रकारिता के महत्‍व पर बल देने के लिए वे उन घटनाओं की याद कर रहे हैं, जो वर्तमान में नदारद है। मौजूदा परिदृश्‍य में हम तक पहुंचने वाले समाचारों में, विचार समाहित होते हैं। इस प्रकार विचारों से समाचार अलग कर पाना और किसी सोची-समझी राय अथवा निष्‍कर्ष तक पहुंच पाना हमारे लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। असली तस्‍वीर अर्ध-सत्‍य और अंधकार में घिरकर धुंधली हो जाती है।'  


नायडू ने कहा कि आज के दौर की मीडिया – चाहे वह इलेक्‍ट्रॉनिक हो, प्रिंट या डिजिटल हो – उसमें प्रतिबद्धता और स्‍पष्‍टवादिता, आधुनिकता एवं परम्‍परा के मिश्रण की आवश्यकता है। इसके लिये पत्रकारिता के पाठ्यक्रमों में महान पत्रकारों के जीवन के बारे में अध्‍याय शामिल किये जाएं। उपराष्‍ट्रपति ने गोरा शास्‍त्री के बारे में बात करते हुए कहा कि उनका विजन राष्‍ट्रवाद की भावना से गहन रूप से ओत-प्रोत था। उनका विवेक और हास्‍य, तेलुगु और अंग्रेजी साहित्‍य का ज्ञान तथा स्‍वतंत्र प‍त्रकारिता के मानकों के प्रति उनकी अचल निष्‍ठा उन्‍हें सामान्‍य पत्रकारिता से अलग करती है। आज मीडिया को इन्हीं मानकों पर काम करने की जरूरत है।


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