आदिवासियों के करमा त्योहार को राष्ट्रीय त्योहारों की सूची में शामिल करने की मांग



झारखंड के चतरा सांसद सुनील कुमार सिंह ने  संसद में आदिवासियों के करमा त्योहार को राष्ट्रीय त्योहारों की सूची में शामिल कर इस अवसर पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की मांग रखी। सांसद  सिंह ने लोक सभा में  कहा कि करमा प्रकृति पूजक आदिवासियों का सबसे बडा त्योहार है। इसे झारखंड के अलावा मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, असम, पश्चिम बंगला व पूर्वोत्तर के सभी राज्यों सहित देश के तमाम आदिवासी बहुल इलाकेां में धूमधाम से मनाया जाता है।

 

इस मौके पर पवित्र करम पेड की डाली को काटकर पूजन स्थल पर स्थापित किया जाता है और उसकी विधिवत पूजा - अर्चना की जाती है। वृक्षों के संरक्षण के प्रति इनका समर्पण बेमिसाल है। प्राकृतिक को बरकरार रखने के प्रति इनकी निष्ठा भी अदभुत है। आदिवासी भारत के एकमात्र समुदाय है, जो प्रकृति की गोद में रहते है और उसकी पूजा करते है। वर्तमान में उनकी सांस्कृतिक विरासत उपेक्षित है और उनकी पहचान व अस्तित्व पर भी संकट मंडरा रहा है। पर्यावरण पर मंडराते वैश्विक संकट के मद्देनजर इस समुदाय के रीति - रिवाजों और पर्व - त्योहारों के संरक्षण और संवर्द्धन की जरूरत है। 

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