प्रकृति के वरदान से भरी जादुई जगह है सिक्किम


 सिक्किम को भारत के सुन्दर शहरों में से एक माना जाता है और प्रकृति के वरदान से भरी यह जादुई जगह हिमालय पर्वत क्षेत्र में स्थित है। हमारे देश भारत के ऐसी कई जगहों में यह जगह भी कई महत्वपूर्ण स्थानों के लिए मशहूर है। सिक्किम के बारे में यह कहा जाता है कि अपने जीवनकाल में आप यहाँ नहीं गए तो आपने कुछ खोया है।


दरअसल, सिक्किम एक पहाड़ी इलाका है जो हिमालय पर्वत इलाके में बसा है। सिक्किम राज्य में कई पहाड़ी जगह हैं जिनकी उंचाई 280 मीटर से 8,585 मीटर तक है। राज्य का सबसे ऊंचा बिंदु माउंट कंचनजंगा है, जिसे पृथ्वी की तीसरी सबसे ऊँची चोटी के रूप में भी जाना जाता है। सिक्किम की सीमा के पूर्व में भूटान, पश्चिम में नेपाल और उत्तर में तिब्बत की ऊँची चौरस भूमि पड़ती है। इस राज्य में करीबन 28 पहाड़ की चोटियाँ , 227 अत्यधिक उंचाई वाले तालाब और 80 हिम नदियां हैं। एक ऐसी चीज जो यहाँ की भौगोलिक स्थिति को और अनोखा बनाती है वह है यहाँ मौजूद करीब 100 नदियाँ, धारा और कई प्रमुख गर्म सोता। सिक्किम का गर्म सोता जिसका स्वाभाविक औसतन तापमान 50 डिग्री सेल्सियस होता है, काफी खास है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इसमें कई रोगों को दूर करने की ताकत है। इस जगह की भौगोलिक स्थिति पर ध्यान देने से पता चलता है कि सिक्किम का करीब एक तिहाई भाग घने जंगलों और बर्फ से ढकी धाराओं की श्रृंखलाओं से घिरा है जो तीस्ता नदी से आकर जुड़ती है, और जिसे 'सिक्किम की जीवन रेखा भी कहते हैं।



सिक्किम राज्य के कई नाम हैं। लेप्चाओं के द्वारा इसे न्ये-माए-एल कहा जाता है जिसका मतलब है 'स्वर्ग, लिम्बू समुदाय के लोग इसे 'सू खिम' कहते हैं जिसका मतलब होता है 'नया घर । और भूटिया समुदाय के लोग इसे 'बेयमुल देमाजोंग' कहते हैं जिसका मतलब है 'चावल कीरहस्यमय घाटी'। यह राज्य पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण सिक्किम नाम के चार विभागों में बंटा है और  इनकी राजधानी है गंगटोक, गेजिंग, मंगन और नामची। सिक्किम की जनसंख्या 6 लाख से अधिक नहीं है, जिसमें 50 प्रतिशत पुरुष और 50 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। इस राज्य को भारत की सबसे कम आबादी वाले राज्य के साथ-साथ गोवा के बाद सबसे छोटा राज्य भी माना जाता है। वर्ष 1975 में सिक्किम भारत का हिस्सा बन गया और तब से, राज्य का राजनीतिक ढांचा देश के बाकी हिस्सों का पालन करता है।


      मौसम


 जितनी खूबसूरत जगह, उतना ही खूबसूरत मौसम होता है सिक्किम का। सिक्किम भारत के उन चुनिन्दा राज्यों में आता है जहाँ  सालों भर नियमित तौर पर बर्फबारी होती है। यहाँ के निवासी तथा आने वाले पर्यटक हमेशा सुहाने मौसम का लुत्फ उठाते हैं।  यहाँ का मौसम सुहाना इसलिए भी रहता है क्योंकि यहाँ का तापमान गर्मी में कभी 28 डिग्री सेल्सियस से ज्यादातर बढ़ता नहीं है और ठण्ड में शून्य डिग्री सेल्सियस पर जमता नहीं है। मानसून मौसम थोड़ा खतरनाक है क्योंकि इस दौरान यहाँ भारी बारिश होती है जिससे भूस्खलन होने का डर रहता है और पर्यटकों को यह सलाह दी जाती है कि वह इस समय यहाँ आने से बचें।



सिक्किम में क्या देखें 


सिक्किम जाने पर आपको यह सलाह दी जाती है कि कुछ प्रमुख जगहों को जरूर देखें और यहाँ की गतिविधियों में हिस्सा लें। यहाँ का प्रमुख स्थल है गंगटोक जहाँ पहुंचकर आप सोम्गो झील, डियर पार्क, नाथुला पास, रूमटेक मठ, इंची मठ, तशी दार्शनिक स्थल और लाल बाजार नाम का स्थानीय बाजार घूम सकते हैं और अपने खास लोगों के लिए उपहार खरीद कर ले जा सकते हैं। यहाँ के कुछ और मशहूर जगह हैं: सिक्किम के महान साधू गुरु पद्मसंभव की सबसे ऊँची मूर्ती जो नामची में मौजूद है। सुन्दर रोडोडेनड्रोन सैंक्चुअरी जिसमें राज्य के विभिन्न प्रजाति के फूल मौजूद हैं। कंचनजंगा पर्वत-दुनिया का तीसरा सबसे ऊँचा पर्वत तो है ही जिसका वर्णन हम उपर कर चुके हैं, कई पवित्र और चमकीले बौद्ध मठ, सुन्दर हरी घाटियाँ और नदियाँ, सिक्किम का मशहूर गर्म सोता, कुछ अनदेखे स्थल जो बस्ती और पारिस्थितिकी पर्यटन के लिए उपयुक्त है, घाटियों की श्रृंखला जो साहसी और जोखिम भरे खेल-कूद के लिए सही है।


खाना और उत्सव


 सिक्किम का खाना और संस्कृति दो चीजें हैं जिसने इस छोटे, सुन्दर जगह को एक महत्वपूर्ण जगह दी है। सिक्किम के लोग ज्यादातर चावल खाते हैं। सिक्किम के कुछ प्रमुख परंपरागत व्यंजन हैं जैसे - मोमो, चाऊमीन, वानटोन, फकथू, ग्या थुक या थुकपा - नूडल पर आधारित सूप, फग्शापा और चुप के साथ निंग्रो। मदिरा पर आधारित पेय पदार्थ भी सिक्किम के लोगों द्वारा लिए जाते हैं। यहाँ के स्थानीय बौद्ध सिक्किमी द्वारा मनाये जाने वाले कुछ परंपरागत त्यौहार हैं जैसे माघे संक्रांति, भीमसेन पूजा, द्रुपका तेशी, लोसर, बुम्बु, सगा दावा और लूसांग। सिक्किम में बसी नेपाली जनता सारे हिन्दू त्यौहार भी मनाती है। इतना सब कुछ होने पर यह ताज्जुब की बात नहीं है कि सिक्किम नाम का यह राज्य धीरे धीरे भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक बनता जा रहा है। आइये यह समृद्ध राज्य को घूमकर इसके बारे में और जानें, जहाँ पर छुट्टियाँ बिताना एक अद्भुत और रोमांचकारी अनुभव हो सकता है। 


कैसे पहुंचे सिक्किम 


सिक्किम, एक पहाड़ी इलाके होने के बावजूद, अच्छी तरह से देश के बाकी हिस्सों से जुड़ा हुआ है। निकटतम हवाई अड्डा बागडोगरा है, जो राजधानी गंगटोक से कुछ घंटों की दूरी पर है। बहुत सारी इंडियन एयरलाइंस जैसे डेक्कन एयरलाइंस, जेट एयरलाइंस आदि से सिक्किम जाया जा सकता है। कोलकाता, दिल्ली और गुवाहाटी से हवाई सेवायें ली जा सकती है। सिक्किम पर्यटन विभाग बागडोरा से गंगटोक तक पांच सीटों वाले हेलीकॉप्टर भी संचालित करता है, जिससे कि वहीं तेजी से पहुंचा जा सकेंदो रेलवे स्टेशन हैं जो राज्य को शेष देश से जोड़ते हैं, एक सिलीगुड़ी से 114 किमी दूर और दूसरा दूसरा न्यू जलपाईगुड़ी में, राजधानी से लगभग 125 किलोमीटर दूर है। सड़क मार्ग से भी गंगटोक पहुंचा जा सकता है।


अंत में यही कहना चाहूंगा कि हमारे देश में बहुत सी ऐसी जगह है जहां जाकर आप वहा के प्राकृतिक छटा का लुत्फ उठा सकते हैं, और सिक्किम भी उसमें एक है। 


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