दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने की महिलाओं को 4 प्रतिशत रजिस्ट्री शुल्क माफ करने की मांग


दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर महिलाओं को 4 प्रतिशत रजिस्ट्री शुल्क माफ करने की मांग करते हुये कहा कि इससे महिला सशक्तिकरण बढ़ेगा और महिलाओं के नाम संपत्ति होने से उनकी समाजिक सुरक्षा भी बढ़ेगी।  तिवारी ने अपने पत्र में कहा कि झारखंड सरकार जून, 2017 से महिलाओं को 1 रू. शुल्क में रजिस्ट्री कर रही है। अभी तक सवा लाख महिलाओं के नाम रजिस्ट्री हो चुकी है। अनधिकृत कालोनियों के नियमितिकरण की प्रक्रिया को तेज करने की मांग करने के लिये मनोज तिवारी ने कहा- इन कालोनियों को नियमित करने में नौकरशाहों द्वारा उत्पन्न बाधाओं को दूर किया जाये और एमसीडी को धन मुहैया किया जाये जिससे वह अनधिकृत कालोनियों का नक्शा बना सकें। अनधिकृत कालोनियों में बाउंड्री डिमार्केशन का काम जल्दी करने की मांग करते हुये  तिवारी ने कहा कि बिना डिमार्केशन के कालोनियों के नियमितिकरण की प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकती है इसलिये उसे शीघ्र किया जाये। 

    दिल्ली सरकार पर अनधिकृत कालोनियों के नियमितिकरण पर रोढ़ा अटकाने का अरोप लगाते मनोज तिवारी ने लिखा कि 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद ही 1797 अनधिकृत कालोनियों के नियमितिकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी थी और शहरी विकास मंत्रालय इस संबंध में आपको पत्र लिखकर बार-बार अवगत कराता रहा है, लेकिन दिल्ली सरकार ने अपनी ओर से अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने में कोई रूचि नहीं दिखाई तो शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी ने उपराज्यपाल के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया जिसने तीन माह में कालोनियों के नियमितिकरण के पक्ष में अपनी रिपोर्ट दे दी जिसके कारण नियमितिकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई। दिल्ली सरकार ने अनधिकृत कालोनियों के नियमितिकरण में सहयोग करने के बजाय रोढ़ा अटकाती रही है लेकिन अब जब कालोनियां पास हो रही हैं तो उसका श्रेय लेने की कोशिश आपकी तरफ से की जा रही है जो पूरी तरह गलत है। 


गौरतलब है कि हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली वासियों को मीडिया के जरिये बताया था कि दिल्ली में जल्द ही अनाधिकृत कॉलोनियों को नियमित किये जाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इसके लिये केन्द्र सरकार की तरफ से सकारात्मक संकेत आने की भी बात मुख्यमंत्री ने की थी। अब जबकि दिल्ली में विधानसभा चुनाव के कुछ ही महीने बाकी हैं तो लंबे अरसे से लटके इस मुद्दे को सुलझाने का श्रेय एक तरफ मुख्यमंत्री केजरीवाल लेना चाहते हैं, तो वहीं दूसरी ओर बीजेपी अध्यक्ष अकेले मुख्यमंत्री को यह वाहवाही देने के लिये कतई तैयार नहीं दिख रहे, क्योंकि यह मामला केन्द्र की शहरी विकास मंत्रालय की सहमति के बिना सुलझाया जाना संभव नहीं था, और केन्द्र में बीजेपी की सरकार है। ऐसे में अनाधिकृत कॉलोनी अगर नियमित होती हैं तो श्रेय के लिये होड़ दोनों तरफ शुरू हो जाएगी। लेकिन फायदा वाकई उन दिल्ली वासियों का होगा जो वर्षों से इन अनियमित कॉलोनियों में रह रहे हैं। बिजली पानी बिल भर रहे हैं, मगर कई सारी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। जहाँ तक चुनाव का सवाल है तो इस बार वर्षों से दिल्ली में बने बड़े मुद्दे के सुलझने के मजबूत आसार हैं, और जनता को इसका बेसब्री से इंतजार है।


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