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Showing posts from August, 2020

उठ बेटी सुबह हो गयी

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सूरज की किरणे       चमकने लगे,       चिड़िया बाहर चहकने लगे       सब यही कहने लगे,      उठ बेटी सुबह हो गयी।                  तूने जो छोडे थे,                   केक बिस्किट टॉफी         देख तेरे भाई अब                   उसे खाने लगे                   सब यही कहने लगे                   उठ बेटी सुबह हो गयी।     तूने थपकियां देकर जिन      गुड्डो गुड़ियों को सुलाया था,      सब आंखें मलते हुए बैठे हैं,।         देख तेरी चुनर उड़ जा रहे       सब यही कह रहे      उठ बेटी सुबह हो गयी।                   उठ देखकर ओह सब ,                  यह एक सपना था।                  केक, गुड़िया ,चुनर                   जो अपना था।                  छत नीचे बैठ सोची                  यह सब बेगाने थे। अब कोई नही  जो कहने लगे कि, उठ बेटी सुबह हो गयी।

मिथिलांचल में मैथिली भाषा  में पठन-पाठन सुनिश्चित करने की मांग

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मिथिला लोकतांत्रिक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज झा ने मिथिलांचल में मातृभाषा मैथिली में पठन-पाठन सुनिश्चित करने की मांग की है।   मनोज झा ने शिक्षा नीति 2020 के तहत केन्द्र सरकार द्वारा देशभर में प्राथमिक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा में कराने की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा है, कि इस घोषणा से जहां मातृभाषा को सम्मान मिला है,वहीं इसके माध्यम से प्राथमिक विद्यालयों में पढाई प्रारंभ किये जाने का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है। इस मांग को लेकर पटना में दस दिनों तक अनशनरत रहे झा ने कहा कि उस समय सरकार ने हमारी मांग को मान लिया था,लेकिन बाद में इससे पलट गयी। उन्होंने मिथिला क्षेत्र में संचालित केन्द्रीय विद्यालय,नवोदय विद्यालय और केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से सम्बद्ध सभी विद्यालयों में मैथिली की पढ़ाई शीघ्र चालू करने की मांग की है।

जो घर आंगन शादी के बाद पराया लगने लगे उस पर क्या बेटी अपना अधिकार जताना चाहेगी ?

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इन दिनों सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने जैसे भारतीय परिवारों में हलचल पैदा कर दी है। पैतृक संपत्ति में बेटी को भी बराबर अधिकार मिलने की घोषणा के बाद इस पर बहस होने लगी है कि अधिकार केवल संपत्ति पर ही नहीं बल्कि बेटी व दामाद का कर्तव्य माता-पिता को देखने एवं कर्ज उतारने का भी होना चाहिये। बिल्कुल सही बात है, अधिकार के साथ कर्तव्य भी जुड़ा होता है। कुछ अपवादों को छोड़ दें तो यह बात सच है कि बेटियों का जुड़ाव माता-पिता के साथ दिल से होता है, और वह किसी भी सूरत में उन्हें तकलीफ से बचाना चाहती हैं। लेकिन संपत्ति में हिस्सा मिले तब ही वह मां-बाप को देखेगी, यह तो व्यापारिक बातें हैं। यह और बात है कि जो घर आंगन बेटी को शादी के बाद पराया लगने लगे उस पर कौन सी बेटी अपना अधिकार जताना चाहेगी। फिर भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक मामले में जरूर स्वागत योग्य है कि इस कानून के बनने से विशेष परिस्थिति में जब कोई बेटी अपनी मिट्टी की ओर रूख करेगी तो उसे सम्मान पूर्वक जीने का अधिकार मिलेगा। मगर इस फैसले से परिवार में नई संरचना और परिभाषा जरूर बनती दिखेगी। शायद दावा करती बहनों से भाईयों के रिश्तों में खटास भी

बिहार में दल बदलने वालों पर है जनता की पैनी नजर

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बिहार में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बड़े पैमाने पर नेताओं के दल बदल के संकेत मिल रहे हैं। यह सिलसिला शुरू भी हो चुका है, लेकिन इस बार इनकी खैर नहीं है। जनता मन बना चुकी है। राजनीतिक पंडितों के अनुसार अगले महीने के प्रथम पखवाड़े तक 30 से 40 विधायक इधर से उधर होंगे। कई पूर्व सांसद भी पाला बदलने के मूड में हैं,ताकि वे कम से कम विधानसभा पहुंच सकें। हालांकि दल बदलने वाले नेताओं के प्रति जनता का रुख सख्त है। ऐसे नेता टिकट हासिल करने में कामयाब हो भी जायेंगे तो इनमें से कुछ ही चुनाव जीत पाएंगे। डेढ़ महीने के बिहार भ्रमण के क्रम में नेताओं एवं राजनीति के जानकारों से हुई बातचीत में यह संकेत उभरकर सामने आया है। विधायकों के इस दल बदल से सबसे अधिक प्रभावित राजद होने वाला है। दूसरे स्थान पर कांग्रेस एवं लोजपा होगी। तीसरे पर जदयू और चौथे स्थान पर भाजपा रहेगी। इस दल बदल के खेल में सबसे बड़ा फायदा जदयू को होगा। बिहार के तीन दशक के राजनीतिक घटनाक्रमों पर नजर डालें तो यह साफ दिखता है, कि राज्य में 15 वर्षों से सत्तासीन नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले दल का उदय ही राजद के गर्भ से हुआ है और उनकी पार्टी जदयू क

मिथिला के नाम मखाना की जीआई टैगिंग को लेकर आंदोलन की तैयारी

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 सांस्कृतिक एवं पारम्परिक पहचान की रक्षा के लिए संघर्षरत विद्यापति सेवा संस्थान ने मखाना की जीआई टैगिंग बिहार मखाना के नाम से कराये जाने की नीतीश सरकार की कोशिशों पर ऐतराज जताते हुए इसे शीघ्र मिथिला मखाना के नाम किये जाने की मांग की है। यह मामला पत्र के जरिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संज्ञान में भी लाया गया है। संस्थान ने यह भी कहा है,कि अगर दो अक्टूबर तक ऐसा नहीं किया गया तो इसके लिए आंदोलन शुरू किया जाएगा। यह निर्णय संस्थान की आम सभा की बैठक में लिया गया है। इस बारे में अर्थशास्त्री एवं एमएलएसएम कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ.अनिल कुमार झा ने  इसकी जानकारी देते हुए बताया कि संस्थान के महासचिव डॉ.बैद्यनाथ चौधरी ने इस संबंध में मिथिला की भौगोलिक एवं सांस्कृतिक महत्व का हवाला देते हुए बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कृषि संकाय के अध्यक्ष को पत्र लिखा है। उन्होंने बताया कि भौगोलिक एवं सांस्कृतिक पहचान के मानक के हिसाब से मिथिला के 20 जिलों में मखाना की हो रही खेती के मद्देनजर मखाना की जीआई टैगिंग बिहार मखाना की बजाय मिथिला मखाना या फिर मिथिलांचल मखान

डेम डूब क्षेत्र की घोषणा के बाद सरकारी सुविधा से दूर हैं, झारखंड में हेरमा गांव के लोग

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डेम डूब क्षेत्र घोषित होने के बाद सरायकेला खरसावां के राजनगर प्रखंड के हेरमा गांव में ग्रामीण हर उस सरकारी सुविधा से दूर हैं, जिन्हें सरकार अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना चाहती है। यहां रहने वाले लोगों की हालत इतनी दयनीय है कि वे खुद को जिंदा लाश की तरह देखते हैं। यहां के युवा अपना व अपने परिवार का पेट भरने के लिये दूसरे राज्यों में कमाई करने जाते हैं, लेकिन कोरोना काल में घर लौटने के बाद बिल्कुल बेरोजगार बैठे हैं। सरकार ने भले ही घर लौटे युवकों के लिये मनरेगा में काम देने की बात कही मगर हेरमा में इन सरकारी सुविधाओं का कोई मतलब नहीं। ग्राम प्रधान ने कई बार इस क्षेत्र में सरकारी सुविधाओं की मांग के लिये ब्लॉक स्तर पर चक्कर लगाये मगर उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। प्रधान के अनुसार क्षेत्र के विधायक वोट लेने वक्त कई आश्वासन देकर चले जाते हैं, मगर बाद में सुध नहीं लेते। शहर से बहुत अंदर बसे इस गांव की ओर जाने वाली सड़कें भी टूटी फूटी हैं। एक तो गरीबी की मार और ऊपर से राहत देती किसी भी सरकारी सुविधा का न होना इन्हें और भी लाचार बना रही है। वाकई विकास के इस दौर में इन ग्रामीणों की लाचारी दूर करन

कटरा- दिल्ली एक्सप्रेस सड़क कॉरिडोर बनने से केवल साढ़े 6 घंटे में पहुंच सकेंगे कटरा से दिल्ली

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आने वाले दो वर्षों में कटरा से दिल्ली का सड़क मार्ग छोटा होने वाला है।  दरअसल, कटरा-दिल्ली एक्सप्रेस सड़क कॉरिडोर का काम शुरू हो गया है, जो अपनी तरह का एक विशेष सड़क कॉरिडोर होगा।  यह सड़क वर्ष 2023 तक तैयार हो जाएगा। इस मार्ग के बन जाने के बाद कटरा से दिल्ली की यात्रा का समय घटकर लगभग साढ़े छह घंटे का और जम्मू से दिल्ली का लगभग छह घंटे हो जाएगा।  इस बारे में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यहां बताया कि इस एक्सप्रेस सड़क कॉरिडोर (गलियारा) के तैयार होने के बाद, लोग रेल या हवाई मार्ग से यात्रा करने के बजाय सड़क मार्ग से दिल्ली-जम्मू-कटरा आना-जाना पसंद करेंगे। उन्होंने कहा कि इस सड़क गलियारे की पहचान यह है कि यह कटरा और अमृतसर के पवित्र शहरों को भी जोड़ेगा, और साथ ही इन दोनों गंतव्यों के बीच कुछ अन्य प्रमुख महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को भी जोड़ने का काम करेगा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने आगे बताया कि मैसर्स फीडबैक कंसल्टेंट्स लिमिटेड द्वारा सर्वेक्षण पूरा होने के बाद, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है और जमीनी स्तर पर काम भी शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना पर लगभग

कृषि की नई तकनीक अपनाकर प्रफुल्य महतो बन रहे हैं, अन्य किसानों के लिये प्रेरणा

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झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के गांव लावजोड़ा के किसान प्रफुल्य महतो सब्जी एवं मत्स्य पालक कृषक के रूप में अपने क्षेत्र में जाने जाते हैं। कुछ वर्ष पूर्व 2010-11 में प्रफुल्य महतो साधारण किसान की तरह ही परम्परागत खेती किया करते थे। लेकिन आत्मा कृषि विभाग के द्वारा अपने गाँव से कृषक मित्र के रूप में चयनित होने के पश्चात कृषक मित्र के रूप में कार्य कर प्रफुल्य महतो कृषि की नवीनतम तकनीक की जानकारी से अवगत हुए। जिसके बाद अपने खेतों में सब्जी एवं धान की खेती उन्नत तकनीक से करने लगे। प्रफुल्य महतो बताते हैं कि आत्मा के द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र में आयोजित होने वाले प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए प्रखण्ड तकनीकी प्रबंधक एवं सहायक तकनीकी प्रबंधक ने प्रेरित किया। प्रशिक्षण में भाग लेने के बाद ये लगातार पंक्तिबद्ध बोआई तकनीक से धान की खेती कर रहें हैं और इससे इनको धान की परम्परागत तरीके की तुलना में दोगुना उपज प्राप्त हो रहा है।   प्रफुल्य रबी मौसम में टमाटर की अधिक मात्रा में खेती करने के साथ ही साथ अन्य सब्जी जैसे फुलगोभी, करेला, बैंगन की खेती भी करते आ रहे हैं। मिश्रित खेती करने से प्रफुल्य महत

बीजेपी नेता विजय भारद्वाज की सुशांत केस पर सीबीआइ जाँच की माँग हुई स्वीकार

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बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के आत्महत्या मामले की जांच प्रक्रिया में नए पहलू सामने आ रहे हैं। दरअसल, मुंबई और बिहार पुलिस से यह केस ले कर ईडी और सीबी आइ को सौंप दिया गया है। ईडी और सीबीआइ ने फिर से रिया चक्रवर्ती समेत पाँच और लोगों पर एफ आई आर दर्ज कर ली है। इससे पूर्व मामले को भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संयोजक (स्वच्छ भारत अभियान) विजय भारद्वाज ने सवाल उठाते हुए यह कहा था कि महाराष्ट्र की सरकार बिहार पुलिस की जांच  में रुकावट पैदा कर रही है और सबूत को मिटाना चाहती है, ऐसे में यह केस सीबीआइ को सौंपी जाए। इस बारे में विजय भारद्वाज कहते हैं कि देश भर के करोड़ों की आवाज को भारत सरकार ने माना सीबीआई को सौंप दिया गया! इसके लिये गृह मंत्री जी को धन्यवाद करते हैं। विजय भारद्वाज मूल रूप से बिहार के पटना के निवासी है, जिनका कर्म क्षेत्र उत्तर प्रदेश का गाजिया बाद शहर है। सुशांत सिंह मामले में उन्होंने अमित शाह को पत्र लिख कर और ट्वीट कर ग्रह मंत्रालय तक यह बात पहुँचाई और राज्य सरकार से अनुरोध कर अपने #justiceforSSR अभियान को सफल बनाया। अब उन्होंने राज्

वनवास के दिनों में छत्तीसगढ़ से गुजरे भगवान राम के मार्ग पर बनेगी वाटिका

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5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की आधारशिला रखे जाने को लेकर पूरे देश में हर्ष का माहौल है। ऐसे में छ्त्तीसगढ़ में विकसित किये जा रहे राम वन गमन पथ को जीवंत करने के लिए खाका तैयार किया गया है। प्रदेश सरकार, पौराणिक उल्लेखों के अनुसार भगवान राम के द्वारा उपचार में लाये जाने वाले औषधि और उनके प्रिय कंदमूल और मीठे फलों के पौधों का रोपण राम मार्ग पर करेगी। जिसकी शुरुआत अगस्त माह से ही किया जाएगा। प्रदेश सरकार ने भगवान राम से जुड़ी स्मृतियों को सहेजने और पुनर्स्थापित करने का काम शुरू किया है। इसी परिप्रेक्ष्य में राम वन गमन पथ पर पर्यटन-तीर्थ सर्किट विकसित किया जा रहा है, जिसे पौराणिक उल्लेखों के अनुसार जीवंत बनाने के लिए डेढ़ लाख से अधिक औषधीय पौधों, कंदमूल और मीठे फलों का रोपण किया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर इसी महीने काम शुरू हो जाएगा। राम के वनवास काल से संबंधित 75 स्थानों को चिन्हित कर उन्हें नये पर्यटन सर्किट के रुप में आपस में जोडा़ जा रहा है। पहले चरण में उत्तर छत्तीसगढ़ में स्थित कोरिया जिले से लेकर दक्षिण के सुकमा जिले तक 9 स्थानों का स

आजादी के बाद राम जन्म भूमि पहुँचने वाले मोदी बने देश के पहले प्रधानमंत्री

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ऐतिहासिक नगरी अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के आज भूमि पूजन के साथ ही मंदिर निर्माण शुरू हो गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल,मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ,राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपालदास सहित 175 आमंत्रित विशिष्ट व्यक्ति मौजूद रहे। इस कार्यक्रम को लेकर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गयी। राम की इस नगरी को भव्य रूप से सजाया-संवारा गया, सैकड़ों त्वरण द्वार बनाये गए। सरयु नदी के तटों को खास तौर से सजाया गया। इसके साथ ही मंदिर निर्माण की आधाशिला को लेकर देशवासियों की प्रतीक्षा आज पूरी हो गयी। ये  आधार शिलाएं नौ प्रस्तर खंडों में है। इनमें नंदा, भद्रा, जया, रिक्ता, पूर्णा, अजिता, अपराजिता, शुक्ला एवं सौभाग्यनी शामिल हैं। पूजन के बाद इन शिलाओं को सुरक्षित रखा गया। नींव के लिए गर्भगृह की गहराई में उत्खनन होने पर रामलला के सिंहासन के ठीक नीचे इन्हें रखवाया जाएगा। गौरतलब है कि आजादी के बाद राम जन्म भूमि पहुँचाने वाले श्री मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं।  

दिवंगत सागु समाड जी की याद में हुआ मूर्ती का अनावरण

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आदिवासी हो समाज महासभा पश्चिमी सिंहभूम के संथापक सदस्य, संरक्षक एवं पूर्व अध्यक्ष दिवंगत सागु समाड जी की स्म़ति में मूर्ती का अनावरण समारोह का आयोजन किया गया। 3 अगस्त को हुए इस अनावरण के मौके पर मानकी मुंडा संघ कोल्हान पाड़ाहाट केन्द्रीय समिति पश्चिमी सिंहभूम झारखंड के महासचिव चंदन होनहागा ने बताया कि दिवंगत सागु समाड जी मूल रूप से चक्रधरपुर प्रखंड के टोकलो थाना क्षेत्र में सथित (मौजा केनके) निवासी थे। वे असुरा हाईस्कूल के विद्वान हेडमास्टर रहे हैं। उन्होंने सेवानिवृत होने के बावजूद अंतिम समय तक काम किया। समाज में उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने की जरूरत है।