कृषि की नई तकनीक अपनाकर प्रफुल्य महतो बन रहे हैं, अन्य किसानों के लिये प्रेरणा


झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के गांव लावजोड़ा के किसान प्रफुल्य महतो सब्जी एवं मत्स्य पालक कृषक के रूप में अपने क्षेत्र में जाने जाते हैं। कुछ वर्ष पूर्व 2010-11 में प्रफुल्य महतो साधारण किसान की तरह ही परम्परागत खेती किया करते थे। लेकिन आत्मा कृषि विभाग के द्वारा अपने गाँव से कृषक मित्र के रूप में चयनित होने के पश्चात कृषक मित्र के रूप में कार्य कर प्रफुल्य महतो कृषि की नवीनतम तकनीक की जानकारी से अवगत हुए। जिसके बाद अपने खेतों में सब्जी एवं धान की खेती उन्नत तकनीक से करने लगे। प्रफुल्य महतो बताते हैं कि आत्मा के द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र में आयोजित होने वाले प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए प्रखण्ड तकनीकी प्रबंधक एवं सहायक तकनीकी प्रबंधक ने प्रेरित किया। प्रशिक्षण में भाग लेने के बाद ये लगातार पंक्तिबद्ध बोआई तकनीक से धान की खेती कर रहें हैं और इससे इनको धान की परम्परागत तरीके की तुलना में दोगुना उपज प्राप्त हो रहा है। 


प्रफुल्य रबी मौसम में टमाटर की अधिक मात्रा में खेती करने के साथ ही साथ अन्य सब्जी जैसे फुलगोभी, करेला, बैंगन की खेती भी करते आ रहे हैं। मिश्रित खेती करने से प्रफुल्य महतो को सालों भर आमदनी हो रही है जिससे ये अपने घर-परिवार का भरण-पोषण कर रहें है। जहां अधिकांश लोगों में मान्यता है कि किसानी से अचछी जिन्दगी बिताना कठिन है, उनके लिये प्रफुल्य एक उदाहरण हैं। खेती के कार्यो से ही इन्होंने अपने भाईयों को पढ़ाया लिखाया जिसके कारण वे अच्छे संस्थान में आज नौकरी कर रहे हैं। इनके बच्चे भी अपने पैरों पर खड़े होकर स्वरोजगार कर रहें है। वैश्विक महामारी घोषित कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान इन्होंने जमशेदपुर शहर में काफी सब्जी राज्य स्तर से निबंधित संस्था ऑल सीजन फार्म फ्रेश के माध्यम से होम डिलीवरी किया।


 


वर्ष 2019-20 में मत्स्य पालन में इनकी रूचि को देखते हुए तकनीकी जानकारी के लिए पश्चिम बंगाल के रामसागर एवं मोइना आत्मा के द्वारा अन्तर्राजकीय परिभ्रमण में भेजा गया जहाँ इन्होंने तकनीकी जानकारी प्राप्त करने के बाद इस वर्ष खरीफ मौसम में अपने तालाब के अलावा लीज पर तालाब लेकर मछली के जीरा का उत्पादन करके लगभग 1,50,000 रूपये लाभ कमाया है।


 


 


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