देशभर में ‘आयुष - 64’ की उपलब्धता बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय ने उठाए कई कदम, हल्के से मध्यम स्तर के कोविड-19 संक्रमण के इलाज में उपयोगी।

 पिछले साल फरवरी मार्च में दुनियाभर में शुरू हुई कोविड 19 महामारी ने इस वर्ष अप्रैल के महीने में विशेषकर भारत में अत्यधिक भयावह रूप ले लिया, और बड़ी संख्या में अप्रत्याशित रूप से ऑक्सीजन की कमी के चलते कोरोना से पीड़ित जान गंवाने लगे। इसे देश के सामने सार्वजनिक स्वास्थ्य की सदी की सबसे बड़ी चुनौती के तौर पर देखा गया है। 

इस अवधि के दौरानशारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करने में स्वास्थ्य सेवा की आयुष प्रणालियों की क्षमता का उपयोग बड़े पैमाने पर व्यक्तियों और चिकित्सकों द्वारा समान रूप से किया गया है और इसके कई उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं।

कोविड -19 के उपचार के लिए आयुष- 64’, जो कि एक पॉलीहर्बल आयुर्वेदिक औषधि है, का उपयोग इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक रहा है। आयुष- 64’ को मूल रूप से मलेरिया के उपचार के लिए 1980 में विकसित किया गया था और यह सभी नियामक संबंधी जरूरतों और गुणवत्ता एवं फार्माकोपियोअल मानकों का अनुपालन करता है।

 हाल ही में सीसीआरएएस ने वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआरऔर देशभर के कई अन्य अनुसंधान संगठनों और मेडिकल कॉलेजों के सहयोग से बिना लक्षण वालेहल्के से लेकर मध्यम स्तर के कोविड -19 संक्रमण के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करते हुए इस औषधि के व्यापक सुदृढ़ नैदानिक ​​परीक्षणों को पूरा किया। 

देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों के नेतृत्व में किए गए इन परीक्षणों से पता चला कि आयुष - 64’ में एंटीवायरलइम्यून- मोडुलेटर और एंटीपायरेटिक गुण हैं। यह बिना लक्षण वालेहल्के और मध्यम स्तर के कोविड -19 संक्रमण के उपचार में उपयोगी पाया गया है।

 फलस्वरूप, इस औषधि को अब कोविड -19 के इलाज के लिए उपयोग में लाया गया है। आयुष मंत्रालय द्वारा इस आशय की घोषणा 29 अप्रैल, 2021 को एक संवाददाता सम्मेलन में की गई थी।

उसके बाद से आयुष मंत्रालय ने देशभर में आयुष - 64’ के वितरण को व्यवस्थित करने और इसके उत्पादन में तेजी लाने के लिए कई कदम उठाए हैं ताकि यह औषधि कम समय में बड़ी संख्या में लोगों को उपलब्ध हो सके।

देशभर में आयुष - 64’ की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर देते हुए, आयुष मंत्रालय ने अधिक से अधिक दवा कंपनियों को इस दवा के उत्पादन के लिए आगे आने और लाइसेंस प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया है।

 

Popular posts from this blog

पर्यावरण और स्वच्छता के लिहाज से ऐतिहासिक रहा आस्था का कुंभ 2019

मुखिया बनते ही आन्ति सामाड ने पंचायत में सरकारी योजनाओं के लिये लगाया शिविर

झारखंड हमेशा से वीरों और शहीदों की भूमि रही है- हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री झारखंड