कृषि की नई तकनीक अपनाकर ये किसान कर रहे कम लागत में अच्छा मुनाफा

 

किसानी करके अच्छा जीवनयापन नहीं हो सकता, ऐसा हमारे देश के अधिकतर लोग सोचते हैं। यही वजह है कि गांवों से अधिकांश युवा कृषि को अपना भविष्य नहीं बनाते हुए बेहतर जिन्दगी के लिये नौकरी की तलाश में शहरों का रूख करते हैं। मगर कृषि को तकनीक से जोड़ा जाए तो यह भी आपको अच्छा जीवन दे सकता है, यह बात आत्मा कृषि विभाग से जुड़े किसान समझने लगे हैं। 

मुसाबनी प्रखंड अंतर्गत पारूलिया पंचायत के रोहनीगोड़ा गांव के रहने वाले मंगल सोरेन प्रगतिशील किसान के रूप में जाने जाते  हैं । मंगल सोरेन बताते हैं कि उनके पास 10 एकड़ की जमीन हैं जिसमें वे पहले पारंपरिक खेती किया करते थे लेकिन आत्मा-कृषि विभाग से जुड़कर अब वे सब्जी व दलहन की खेती करने लगे हैं जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है।  सोरेन ने बताया कि प्रयोग के तौर पर पहले उन्होने 3 एकड़ खेत में मक्का, सरसों, चना, अरहर, टमाटर, फुलगोभी एवं बैगन की खेती किया जिससे उन्हें अच्छी आमदनी हुई जिसके बाद वे अपना पूरा ध्यान सब्जी व दलहन की खेती में देने लगे साथ ही कुछ एकड़ में पारंपरिक खेती के रूप में अपने घर के लिए धान व गेहूं भी उपजाते हैं ।  

मंगल सोरेन विगत 6 वर्षों से कृषि विभाग से जुड़े है । इसके पूर्व सिर्फ एक ही मौसम में परपंरागत विधि से धान की खेती करते थे जिससे लागत की तुलना में आमदनी कम होती थी। मंगल सोरेन मात्र 5वीं पास हैं परन्तु कृषि के नवीनतम तकनीक की जानकारी के प्रति जिज्ञासु होने के कारण आत्मा-कृषि विभाग से जुड़े एवं आत्मा द्वारा आयोजित किये जाने वाले प्रशिक्षण एवं परिभ्रमण कार्यक्रमों में लगातार शामिल होते रहे जिससे उन्हें तकनीकी जानकारी मिली, साथ ही प्रखण्ड स्तरीय प्रसार कर्मी से भी खेती को लेकर मार्गदशन मिलता रहा । 

परिणामस्वरूप अभी के समय में मंगल सोरेन धान सब्जी, दलहन की खेती कर सलाना लगभग 1.80 से 2.00 लाख तक की आमदनी कर रहे हैं जिससे इनके परिवार के जीवन-यापन एवं आर्थिक जरूरतों को पूर्ण करने में काफी सहूलियत हो रही है ।

 तकनीक आधारित कृषि को लेकर जिला कृषि पदाधिकारी श्री मिथलेश कुमार कालिंदी* कहते हैं कि जिले के किसानों के लिए कृषि विभाग द्वारा नियमित प्रशिक्षण एवं परिभ्रमण कार्यक्रम संचालित किया जाता है । वहीं पदाधिकारी भी नियमित क्षेत्र का भ्रमण कर किसानों से संवाद स्थापित करते हुए खेती-किसानी कार्य के लिए मार्गदर्शन देते रहते हैं । उन्होने बताया कि इच्छुक किसानों को आत्मा-कृषि विभाग से विभिन्न योजना के तहत सरसों, गेहूं, अरहर, चना का बीज समय-समय पर उपलब्ध कराया जाता है । 


अन्य किसानों को संदेश देते हुए मंगल सोरेन कहते हैं कि आय के लिए दूसरे व्यवसाय पर निर्भर नहीं रहने एवं पलायन करने से बेहतर है कि जिन किसान के पास खेत हो वे खेती-किसानी कार्य को विस्तार दें। इसके लिए आवश्यक है कि खुद जागरूक होते हुए प्रखंड या जिला कृषि कार्यालय से संपर्क कर विभिन्न लाभकारी योजनाओं को जानें साथ ही पदाधिकारी जब क्षेत्र भ्रमण पर आते हैं तो मार्गदर्शन लेकर कृषि की नई तकनीक से अवगत हों जिससे उन्हें कम लागत में अच्छा मुनाफा होगा । श्री सोरेन कहते हैं कि लॉकडाउन जैसे हालात में भी जब सभी लोग रोजगार छीन जाने एवं आय के स्रोत को लेकर परेशान थे तब उन्हें अपने कृषि कार्य के कारण ही आय को लेकर परेशान नहीं होना पड़ा एवं गृहस्थी की गाड़ी आसानी  से चलती रही ।

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