उपराष्ट्रपति ने मीडिया जगत से आग्रह किया कि वह अपने दर्शकों में विस्तार करे और राजस्व के नए मॉडल खोजे।

 


भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने  16 नवम्बर  को राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित, कोविड महामारी के दौरान मीडिया की भूमिका तथा मीडिया पर महामारी के असर, विषय पर उन्होंने कहा कि आज़ाद और निर्भीक प्रेस के बिना लोकतंत्र की कल्पना नहीं की जा सकती।


उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने में देश की प्रेस की अग्रणी भूमिका रही है। लोकतंत्र को मजबूत करने तथा संवैधानिक के अनुसार कानून का राज सुनिश्चित करने में एक मुखर, आज़ाद और जागरूक मीडिया उतना ही जरूरी है जितना की स्वतंत्र न्यायपालिका।


पत्रकारिता को एक पवित्र मिशन बताते हुए, उपराष्ट्रपति  ने राष्ट्रहित के संवर्धन और जनता के अधिकारों के संरक्षण में प्रेस की उल्लेखनीय भूमिका की सराहना की।


उन्होंने  मीडिया से आग्रह किया कि अपनी रिपोर्ट में वस्तुनिष्ठ, तथ्यात्मक, और निष्पक्ष रहे। उन्होंने सनसनी फैलाने और खबरों में पूर्वाग्रह मिलाने की प्रवृत्ति से बचने की भी सलाह दी। 


महामारी के दौरान प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडियाकर्मियों की अग्रणी भूमिका की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि महामारी के खतरों के बावजूद उन्होंने लगातार सूचना उपलब्ध कराई है। 


उपराष्ट्रपति ने कहा कि जब अप्रामाणिक अफवाहों का बाजार गर्म हो, ऐसे में महामारी के दौरान सही समय पर प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराया जाना नितान्त आवश्यक है ।


अप्रामाणिक अफवाहों से बचाने के लिए जन जागृति और शिक्षण का प्रसार करने में मीडिया की महती भूमिका है।


इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने उन पत्रकारों के परिजनों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त की जिनकी इस महामारी के दौरान, इस संक्रमण के कारण मृत्यु हुई।


मीडिया पर महामारी के प्रभाव का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कई समाचार पत्रों ने अपने संस्करणों में कटौती की है और डिजिटल संस्करण निकालने लगे हैं। इस संदर्भ में उन्होंने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में हो रही पत्रकारों की छंटनी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।


इन विषम परिस्थितियों में पत्रकारों को अकेला नहीं छोड़ा जा सकता। उपराष्ट्रपति ने सभी हितधारकों से साथ मिल कर इस विषम परिस्थिति से निपटने के कारगर और सार्थक उपाय ढूंढने का आग्रह किया।


उन्होंने कहा कि महामारी ने मीडिया संस्थानों को अधिक लचीला, स्थाई और स्वीकार्य राजस्व मॉडल अपनाने का अवसर दिया है। सामाजिक मिलजोल के बिना, इस अवधि में अधिक से अधिक लोग घर पर ही रह कर ताज़ा खबरों और मनोरंजन के लिए मीडिया पर ही निर्भर रहे।


इस संदर्भ में रामायण और महाभारत की लोकप्रियता की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने मीडिया जगत से आग्रह किया कि वह अपने दर्शकों में विस्तार करे और राजस्व के नए मॉडल खोजे।     


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