शौचालय जो तैयार होने से पहले ही टूटकर बिखरने लगा है

विकास के पथ पर अगर चलना है, तो सबसे पहले गांव को सशक्त बनाना होगा। इसी सोच के साथ पिछले 6 वर्षों में केन्द्र से विभिन्न योजनाएं गांव के विकास के लिये शुरू की गई। खुले में शौच मुक्त करने के लिये शौचालय निर्माण करना मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से प्रमुख है। ऐसा नहीं है कि इस पर काम नहीं हो रहा है। बड़ी संख्या में लोगों के घरों के साथ शौचालय बन रहे हैं, मगर कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं, जहां लोगों की आंखे नये शौचालय को देखने के लिये पथरा रही है, और शौचालय है कि बनते बनते नये से पुराने का रूप ले रहा है।


एक ओर जहां झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम के पदमपुर पंचायत के पोटवां गांव में एक साल पहले बनना शुरू हुआ शौचालय तैयार होने से पहले ही टूटकर बिखर रहा है तो वहीं सिलपोड़ी पंचायत के जिनाबेड़ा गांव में शौचालय निर्माण में खराब मैटेरियल की बात कहकर फिर से बनाए जाने की बात की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार यहां और भी कई मूलभूत समस्याएं हैं, जिनके जल्द दूर करने की मांग वे कर रहे हैं।



सूखे तालाब, टूटी सड़कें और बिजली की कमी एवं जलमीनार तक पानी का नहीं पहुंचने  जैसे कई अधूरे काम हैं, जिनका पूरा नहीं होना इन्हें विकास की धारा से अलग करने का काम करते हैं। क्षेत्र में  इन असुविधाओं के लिये मुखिया लॉकडाउन की मजबूरी गिना रहे तो वहीं ग्रामीण मनरेगा के तहत इन कार्यों को पूरा कराये जाने की मांग कर रहे हैं।


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