शीर्ष शिक्षाविदों की राष्ट्रीय समिति का हुआ गठन

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के द्वारा देश के शीर्ष शिक्षाविदों की एक राष्ट्रीय समिति का गठन किया गया है, जिसका उद्येश्य नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रभावी रूप से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना है। इस समिति का गठन देश के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. विजय भाटकर की अध्यक्षता में हुआ है । डॉ. भूषण पटवर्धन, समिति के सलाहकार की भूमिका में एवं न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी संरक्षक रहेंगे ।


वरिष्ठ शिक्षाविद् डॉ. पंकज मित्तल, शोध विशेषज्ञ प्रो. वी. के. मल्होत्रा, ऑनलाइन एवं दूरस्थ विशेषज्ञ प्रो. नागेश्वर राव, तकनीकी शिक्षा से डॉ. प्रमोद कुमार जैन, प्रबंधन शिक्षा हेतु प्रो. शैलेन्द्र राज मेहता, कृषि विशेषज्ञ के रूप में डॉ. आर. सी. अग्रवाल, समावेशी शिक्षा के विशेषज्ञ प्रो. टी. वी. कट्टीमनी, विख्यात संस्कृत विद्वान डॉ. चांद किरण सलूजा, चेन्नई से प्रो. एस. पी. त्यागराजन, कौशल शिक्षा विशेषज्ञ प्रो. राज नेहरू, मूल्य शिक्षा से प्रो. अजय कुमार सिंह एवं भाषा विद्वान प्रो. विजयकांत दास को समिति के सदस्य नियुक्त किये गये है । शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के कार्यकर्ता एडवर्ड मेंढ़े को समिति का समन्वयक बनाया गया है ।


समिति के गठन का आयोजन एक ऑनलाइन बैठक में किया गया । डॉ. पंकज मित्तल के अनुसार यह समिति नई शिक्षा नीति के समयबद्ध क्रियान्वयन हेतु कार्ययोजना तैयार कर नीति के क्रियान्वयन के लिये सरकार, शैक्षिक संस्थानों को सुझाव देगी और सहयोग भी करेगी । समिति द्वारा तैयार की गयी योजना में अन्य शिक्षाविदों के सुझावों का भी समावेश किया जाएगा ।


बैठक को संबोधित करते हुए शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सचिव अतुल कोठारी ने कहा कि शिक्षा नीति के क्रियान्वय हेतु केन्द्र, राज्य, विश्वविद्यालय व शैक्षणिक संस्थानों के स्तर पर समितियां बनाने तथा नीति में कोई महत्वपूर्ण बात छूटी है तो उसको क्रियान्वयन योजना में जोड़ने की आवश्यकता है । उन्होंने कहा कि विषयानुसार भी समितियां गठित की जा सकती है । साथ ही अतुल कोठारी ने आशा व्यक्त की कि इस पूरी प्रक्रिया से देश के शिक्षा जगत में चिंतन-मंथन के द्वारा एक सकारात्मक अकादमिक वातावरण का निर्माण हो सकेगा ।


आत्मनिर्भर भारत अभियान पर भी विचार मंथन


इसी के साथ-साथ शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान विषय पर विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, शिक्षाविदों तथा बुद्धिजीवियों के साथ ऑनलाइन विचार-मंथन किया गया । चर्चा की अध्यक्षता करते हुए छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने कहा कि “आत्मनिर्भर भारत अभियान” के तहत उनके विश्वविद्यालय द्वारा ‘आत्मनिर्भर कानपुर अभियान’ की शुरूआत की गयी है ।


विश्वविद्यालय और उद्यमियों के संयुक्त प्रयास से कानपुर को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ चले हैं । अभी तक विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर 2500 से अधिक युवाओं और छात्रों ने पंजीकरण कराया है । गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोयडा के कुलपति प्रो. भगवती प्रसाद शर्मा ने स्थानीय उद्योगों को विश्वविद्यालय से जोड़ने पर जोर दिया ।


गुजरात तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. नवीन सेठ ने बताया कि उनके संस्थान के छात्रों द्वारा अनेक स्टार्टअप शुरू किये गए है जिनके द्वारा बड़ी संख्या में पेटेंट भी पंजीकृत करवाए गए है । इसी प्रकार जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कपिल देव मिश्रा, सागर के स्वामी विवेकानन्द विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. अजय तिवारी एवं एनआईटी श्रीसिटी के निदेशक प्रो. गणेश कन्नीबरण, चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. के. मित्तल, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलपति के. बी. मिश्रा ने बताया कि किस प्रकार उनके संस्थान आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाने में अपनी भूमिका निभा रहे है ।


शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सचिव अतुल कोठारी “आत्मनिर्भर कानपुर अभियान” के साथ राष्ट्रीय सलाहकार के रूप में जुड़े हैं । अतुल कोठारी ने आशा व्यक्त की कि देश के अन्य विश्वविद्यालय भी अपने स्तर पर इसी प्रकार के अभियान प्रारंभ करें ।


 


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