झारखंड में स्वास्थ्य देखभाल सहयोगी के रूप में महत्वपूर्ण है सहियाओं की भूमिका

कोरोना वायरस एक ऐसे प्रकोप के रूप में लोगों की जिन्दगी में आया है, जिसकी चर्चा घर बाहर दो-तीन पीढ़ियों मे शायद ही कभी किसी ने की हो। एक अनजान बीमारी जिसका अब तक कोई ईलाज नहीं निकल सका है, मगर इससे बचाव जरूर किया जा सकता है। बड़ी संख्या में प्रभावित हो रहे लोगों को बचाने के लिये जागरूकता एक महत्वपूर्ण उपाय साबित हुआ है। समाज में रह रहे एक-एक तक पहुंच बनाने एवं उसे जागरूक करने में ऐसे कई कर्मी जुटे हैं, जिनके बारे में जानना भी जरूरी है। इन्हीं में से एक नाम सहिया यानि आशा कार्यकर्ताओं का भी है।     झारखंड में “सहिया” के नाम से जानी जाने वाली आशाकर्मी खासकर आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में सहयोग करती हैं। राज्य में लगभग 42,000 सहिया हैं, जिन्हें 2260 सहिया साथियों (आशाकर्मियों), 582 ब्लॉक प्रशिक्षकों, 24 जिला सामुदायिक मोबलाइज़र और एक राज्य स्तरीय सामुदायिक प्रक्रिया संसाधन केंद्र की ओर से मदद मिलती है। शुरुआत से ही जनजातीय और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं पहुंचाने में सहियाओं की प्रतिबद्धता को देखा गया है। इसी तरह यह सहियाएं मार्च 2020 से ही कोविड-19 से संबंधित विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं।  इनमें कोविड​​-19 के निवारक उपायों के बारे में जागरूकता पैदा करना, जैसे साबुन और पानी से लगातार हाथ धोना, सार्वजनिक स्थानों पर बाहर निकलते समय मास्क/फेस कवर का उपयोग करना। खांसी और छींकने आदि के दौरान उचित शिष्टाचार का पालन करना,  जैसे नियमों का पालन करना आदि शामिल है।


कोविड 19 को लेकर झारखंड ने 18 से 25 जून के बीच जन स्वास्थ्य सर्वेक्षण  कराया गया, जिसमें तीन दिनों तक घर-घर सर्वे किया गया। इस सर्वेक्षण में लगभग 42,000 सहियाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने स्थानीय उच्च जोखिम वाले लोगों की पहचान करने के लिए हजारों घरों का सर्वेक्षण किया। इस दौरान लोगों में इन्फ्लुएंजा जैसे संक्रमण, (आईएलआई) गंभीर श्वसन बीमारी (एसएआरआई) के लक्षण, 40 वर्ष से अधिक की उम्र वालों में बीमार जैसी स्थितियों, नियमित टीकाकरण से चूक गए पांच वर्ष से कम उम्र वाले बच्चों की आबादी एवं प्रसव पूर्व जांच से चूक गई गर्भवती महिलाओं का पता लगाया गया।  जिसके बाद उनके लिये स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई गई।  


सर्वेक्षण के दौरान सहियाओं ने काउंसलिंग के साथ नए जन्मे बच्चे व छोटे बच्चों की घर पर देखभाल एवं पुरानी बीमारियों के इलाज पर लगातार निगरानी रखने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य किये। इस तरह झारखंड की सहिया जो आशा भी हैं, मातृ, नवजात शिशु और बाल स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में सक्रिय सहयोग के साथ कोविड 19 से जुड़े कार्यों में भी अहम भूमिका निभाई है।


     


 


 


 


 


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