बिहार चुनाव में मिथिला के लोग तय करेंगे दिशा : पाठक

समाजसेवी एवं कई राष्ट्रीय जनांदोलनों के अगुवा रहे अरविन्द पाठक ने कहा कि मिथिलावादी पार्टियां इस बार बिहार में सत्ता तय करेगी।  पाठक ने यह बात एक इंटरव्यू में कही। उन्होंने कहा कि बाबू जानकी नंदन सिंह के बाद पहली बार मिथिला वादी पार्टियां एक जुट होकर इस बार विधान सभा चुनाव में उतरने जा रही है और मिथिला की सभी 108 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है, यह बहुत बड़ी बात है।


मैथिली भाषा को संवैधानिक दर्जा दिलाने से लेकर पृथक मिथिला राज्य की मांग को लेकर चल रहे आंदोलनों में अग्रणी भूमिका अदा करने वाले पाठक ने कहा कि मिथिला वादियों के चुनावी जंग में कूदने से मिथिला को वोट बैंक समझने वाले सियासी दलों का समीकरण बिगड़ गया है।


वर्षो तक ऑल इंडिया यूथ आर्गेनाइजेशन के बैनर तले युवाओं को सत्ता में पर्याप्त भागीदारी देने की मांग को लेकर आंदोलन चलाने वाले पाठक ने कहा कि मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार मिथिला वादी दलों ने 50 से अधिक सीटों पर प्रत्याशियों के नाम भी तय कर लिये है और उन्हें कई क्षेत्रीय दलों का समर्थन भी मिल रहा है।


दिल्ली विधान सभा चुनाव के दौरान पूर्वांचल के वोट को एकजूट करने में अहम् भूमिका अदा करने वाले  पाठक ने कहा कि यह बात सही है कि मिथिला वादी पार्टियां उतनी मजबूत नहीं है,जो अधिक से अधिक सीटें जीत पाएं,लेकिन बिहार के सियासी दलों के बीच सत्ता के खेल को बिगाड़ने में पूरी तरह सक्षम है,क्योंकि उन्हें मिथिला से बड़ी संख्या में सीटें मिलती रही है।


 


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