कम से कम दो वर्षों तक महानगरों में आने की उन मजदूरों की संभावना नहीं जो लौटकर घर जा रहे-गोपाल झा

खाने के लिए घंटो लाइन में खड़े रहने के बावजूद राज्य सरकार पेट भर भोजन तक उपलब्ध नहीं करा पायी जिस कारण आज मजदुर बेबस होकर रिक्शा, ठेला साईकिल तिपहिया, ट्रक से और पैदल अपने घर लौटने को मजबूर हो रहे हैं जबकि इन प्रवासी मजदूरों को लॉकडाउन से पहले ही घर भेजा जाना चाहिए था। अगर ऐसा करते तो इतनी मजदूरों कि दुर्दशा नहीं होती।


अब जो मजदूर घर लौट के जा रहे हैं उन्हें कम से कम दो वर्ष तक महानगरों में आने कि कोई संभावना नहीं बनती है क्योंकि उन्हें शहर में रह कर उस अमानवीयता का बोध हुआ जो भूलने वाला नहीं है। यह बात दिल्ली के बुराड़ी विधानसभा के पूर्व बीजेपी विधायक उम्मीदवार गोपाल झा ने कही।


उन्होंने  कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 29 अप्रैल को प्रवासी मजदूरों और विभिन्न जगहों में फंसे पर्यटकों के लिये घर जाने की अनुमति देने के बावजूद भी राज्य सरकारों के लचर रवैये के कारण मजदूर एवं पर्यटक अपने घर नहीं पहुंच पा रहे हैं।


गोपाल झा कहते हैं कि अगर देश में मजदूरों से शहर में भविष्य में काम लेना है तो अधिक से अधिक श्रमिक ट्रेन द्वारा उन्हें तुरंत अपने घर जाने कि व्यवस्था की जाए अन्यथा देश में मजदूरों की हित में बात करने वाले नेताओं के ऊपर जनता पत्थर फेंक कर ताली बजायेगी। गरीब मजदूरों के लिए अपने घर नहीं पहुंच पाना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।


 


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