राशन ऐसे दें कि लेने वाले के सिवा कोई और न जाने

कहते हैं, जरूरत में किसी की मदद इस तरह करो कि एक हाथ से दिया दूसरे हाथ को पता न चल सके। इन दिनों झारखंड के जमशेदपुर में मौलाना अंसार खान इसी कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं। किसी ने फोन करके बताया कि उनके यहां राशन नहीं है, और अंसार खान खुद अपने घर से राशन लेकर चल देते हैं, उस घर की ओर। मदद का तरीका भी इतना अनोखा है कि मदद लेने वालों के बारे में किसी को कानों कान खबर न मिल सके। इसलिये वह राशन लेकर जरूरतमंदों के घर दिन के वक्त जाते हैं, जब सभी भरी दुपहरी में अपने घरों के अंदर रहते हैं। कोरोना से प्रभावित हुए कई ऐसे लोग हैं, जिनके यहां राशन की पूर्ति के लिये बहुत से दरियादिल लोग सामने आ रहे हैं, और उनके मदद का तरीका भी अलग-अलग है।


इस बारे में मौलाना बताते हैं कि एक दिन हयातनगर से 8 लोगों का फोन आया और कहा कि उनके यहां दोपहर का खाना बनाने के लिये राशन नहीं है। पता पूछकर जब उनके घर पहुंचा तो देखा वह सच कह रहे थे। मैंने फौरन अपने घर के खाने के राशन में से 8 पैकेट बनाया, जिसमें आटा,चावल, आलू, प्याज डालकर हयातनगर पहुंचा। उन्हें राशन देकर फोटो नहीं खिंचवाया क्योंकि वह सब हमारी तरह ही थे। सभी ने दुआएं दी।


 मौलाना अंसार खान झारखंड प्रदेश कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधि सह जिला उपाध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि "मैं सभी लोगों से यह अर्ज करता हूं कि आप अपने मोहल्ला, अपने पड़ोस, रिश्तेदार पर ध्यान दें, जिनके यहां खाना नहीं बना है, उनको राशन पहुंचाएं। मैं अपनी फोटो और विडियो इसलिये डालता हूं कि दूसरों को भी शौक पैदा हो जाए, और वह मदद करें। लेकिन यह मदद किसी को बताकर नहीं बल्कि ऐसे करें कि किसी और को पता न चले। इनके अनुसार- सिर्फ ख़ुदा के सिवा कोई और न जाने, राशन ऐसे दें कि लेने वाले के सिवा कोई और न जाने।


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