लॉकडाउन की इस अवधि में हम अपने बच्चों को बाबा साहब की जीवनी के बारे में जानकारी देकर समय का सदुपयोग कर सकते हैं-श्याम रजक

14 अप्रैल 2020 को बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 129वीं जयन्ती है। जिसे लेकर बिहार के उद्योग मंत्री  श्याम रजक नें कहा है कि करोना वायरस के कारण लॉकडाउन के चलते हम पहले की तरह इस बार सार्वजनिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं कर पायेगें, क्योंकि हमें सोशल डिस्टेन्सिंग के नियमों का तथा इससे संबंधित सरकार के सभी निर्देशों का पालन करना है।


श्याम रजक नें कहा कि बाबा साहब की जयन्ती हमारे लिए मनाना गौरव की बात है। परन्तु कोरोना महामारी से उत्पन्न संकट में सभी के जीवन की रक्षा होना भी मूल प्रश्न है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि हम बाबा साहब की जयन्ती के अवसर पर बिना एक जगह एकत्रित हुए हम उनके प्रति उदगार कैसे व्यक्त करें। श्रद्धासुमन किस प्रकार अर्पित करें। मेरे विचार में आज की परिस्थिति में यह सर्वाधिक उचित होगा कि हम चिंतन करें साथ ही बाबा साहब की जीवनी तथा उनके द्वारा रचित पुस्तकों का अध्ययन करें और उनके विचारों पर आत्ममंथन करें। 


बिहार के उद्योग मंत्री ने कहा कि विशेषकर हम अपने बच्चों को बाबा साहब का बचपन, कठिन परिस्थतियों में विदेश जाकर उच्चशिक्षा ग्रहण करने, मन में डॉक्टरेट करने की इच्छा रहते हुए भी महाराजा बड़ौदा की शर्तों के अनुसार भारत लौटकर उनकी नौकरी करने, अवसर पाकर पुनः विदेश जाकर अर्थशास्त्र में अपनी डॉक्टरेट की डिग्री पूरी करने, शिक्षित बनने, संगठित होकर सामाजिक उत्पीड़न के प्रति संघर्ष करने का उनका संदेश- जैसे प्रसंग बच्चों के लिए प्रेरणादायी है। लॉकडाउन की इस अवधि में हम अपने बच्चों को बाबा साहब की जीवनी के बारे में जानकारी देकर समय का सदुपयोग कर सकते है।


 रजक ने कहा कि बाबा साहब संविधान निर्माता और राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक अर्थशास्त्री भी थें। उन्होंने अपनी सबसे बड़ी डिग्री अर्थशास्त्र में हीं प्राप्त की थी। पर हम उन्हें सिर्फ संविधान निर्माता एवं एक सामाजिक चेतना लाने वाले व्यक्तित्व के रूप में हीं ज्यादा जानते हैं। उनकी जयन्ती पर उनके प्रति सबसे बड़ी श्रद्धांजलि यह होगी की लॉकडाउन की अवधि में उनके सर्वांगिण व्यक्तित्व का गहण अध्ययन कर हम वैचारिक रूप से सशक्त बने, तभी उनके प्रति नमन के हम हकदार बनेंगे।


 


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