पर्यावरण संरक्षक 2020 सम्मान की वास्तविक हकदार है बिहार की जनता - मुख्यमंत्री


कहते हैं, आज के बच्चे हमारे कल का भविष्य है, इसलिये अगर उनका मन मस्तिष्क अच्छी चीजों को अपना ले तो सबका भविष्य उज्ज्वल होगा। समाज के लिये उनसे अच्छा कोई संदेशवाहक नहीं हो सकता। शायद यही वजह हो सकती है कि बिहार के मुख्यमंत्री ने समाज से कुरीतियों, एवं बुरी आदतों को खत्म करने के लिये स्कूली बच्चों को खासतौर से संदेश वाहक के रूप में चुना।


21 जनवरी 2017 को नशामुक्ति एवं शराबबंदी के पक्ष में, 21 जनवरी 2018 को दहेज प्रथा एवं बाल विवाह के खिलाफ लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर अपनी प्रतिबद्धता जतायी थी, जिसमें बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे शामिल हुए थे। एक ऐसी ही मानव श्रृंखला पर्यावरण संरक्षण के लिये बनी। दावा किया गया कि मानव श्रृंखला लगभग 18 हजार किलोमीटर लंबी थी। 


नीतीश कुमार ने ट्वीट करके बताया कि "आज जल-जीवन-हरियाली अभियान तथा नशा मुक्ति अभियान के पक्ष में तथा बाल विवाह एवं दहेज प्रथा के विरोध में 5,16,71,389 बिहारवासियों ने ऐतिहासिक 18,034 कि.मी. लंबी मानव शृंखला बनाई"।


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे ऐतिहासिक बताया और कहा कि इसमें लोगों का पूरा समर्थन मिला। लेकिन ठंड के मौसम में मानव श्रृंखला में खड़े होने से कई बच्चों की तबियत भी बिगड़ी, जिसकी विपक्षी पार्टी राजद के द्वारा खुलकर आलोचना भी की गई, मगर ऐतिहासिक मानव श्रृंखला का रिकॉर्ड तो बन ही चुका था, जिन्होंने राज्य के विभिन्न हिस्सों में कहीं सड़कों के किनारे खड़े होकर तो कहीं नाव पर खड़े होकर हाथ में हाथ डालकर मानव श्रृंखला बनाई।


दरअसल,19 जनवरी 2020 को पटना के गांधी मैदान से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जल-जीवन-हरियाली और नशामुक्ति के समर्थन में एवं बाल विवाह और दहेज प्रथा मिटाने के लिये बनी ऐतिहासिक मानव श्रृंखला का गुब्बारा उड़ाकर शुभारंभ किया। इस अवसर पर बिहार सरकार में मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, बिहार विधान सभा अध्यक्ष के साथ बड़ी गणमान्य लोगों ने एक दूसरे का हाथ पकड़कर मानव श्रृंखला बनाई। मौके पर जल पुरूष एवं मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित राजेन्द्र सिंह शामिल हुये।


मुख्यमंत्री को मैग्सेसे पुरस्कार विजेता जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने तरुण भारत संघ की तरफ से पर्यावरण संरक्षक-2020 सम्मान से सम्मानित किया।


इस बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे पर्यावरण संरक्षक-2020 के रुप में सम्मान मिला है उसका वास्तविक हकदार पूरे बिहार की जनता है जो सामाजिक विषयों के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जागरुक है।


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