नव वर्ष मतलब जीवन में नये उत्साह का आगमन


नव वर्ष मतलब जीवन में नये उत्साह का आगमन एवं अपने उद्येश्य की पूर्ति के लिये नई उर्जा को समेट लेने का प्रण है जो एक बार पुनः नव शक्ति का संचार करता है। यद्यपि दुनिया के ज्यादातर लोग अपने नए साल की शुरुआत 1 जनवरी यानि अंग्रेजी महीने के अनुसार वर्ष के पहले दिन से करते हैं। 31 दिसंबर को एक वर्ष का अंत होने के बाद 1 जनवरी से नए अंग्रेजी कैलेंडर वर्ष की शुरूआत होती है, इसलिए इस दिन को पूरी दुनिया में नये साल शुरू होने के उपलक्ष्य में पर्व की तरह मनाया जाता है।


1 जनवरी को नया साल मनाना सभी धर्मों में एकता कायम करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है, क्यों इसे सभी मिलकर मनाते हैं। 31दिसंबर की रात से ही कई स्थानों पर अलग-अलग समूहों में इकट्ठा होकर लोग नए साल का जश्न मनाना शुरू कर देते हैं और रात 12 बजते ही सभी एक दूसरे को नए साल की शुभकामनाएं देते हैं। 


ऐतिहासिक पन्नों के अनुसार, नववर्ष उत्सव 4000 वर्ष पूर्व बेबीलोन में मनाया जाता था, मगर इसकी तारीख 21 मार्च थी। बाद में रोम के तानाशाह जूलियस सीजर ने ईसा पूर्व 45वें वर्ष में जब जूलियन कैलेंडर की शुरूआत की तब पहली बार 1 जनवरी को नववर्ष उत्सव के रूप में मनाया गया था। बाद में इस कैलेंडर में कई खामियाँ मिलीं जिससे बाद ग्रेगोरी कैलेंडर चलन में आया।


ग्रेगोरियन कैलेंडर को अन्तर्राष्ट्रीय कैलेंडर भी माना जाता है, क्योंकि इसे आज के समय में लगभग पूरी दुनियाँ इस्तेमाल करती है। दरअसल यह एक सोलर कैलेंडर है। इसमें साल भर में 12 महीने होते हैं। 1 महीने में 28 से 31 दिन होते हैं, और हर साल में 52 सप्ताह और हर सप्ताह में 7 दिन होते हैं। ग्रेगोरियन कैलेंडर जूलियस सीजर कैलेंडर का नया रूप है। इस कैलेंडर में हर 4 साल में एक साल में 1 दिन जोड़ दिया जाता है. और वह साल 364 दिन का हो जाता है।


 वास्तव में पृथ्वी को सूर्य का चक्कर लगाने में लगभग 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट और 45.51 सेकंड लगते हैं और इन 365 दिन से ऊपर के इस समय को अगर 4 साल तक जोड़ा जाए तो यह पूरा एक दिन बन जाता है जैसे 4 साल के बाद कैलेंडर में जोड़ दिया जाता है, और वह साल 366 दिन का बन जाता है, जिसे लीप ईयर कहते हैं।



साल का शुरूआती महीना जनवरी और अंतिम महीना दिसंबर है। दिसंबर महीने के जाने और जनवरी महीने के आगमन पर पूरे विश्व में नववर्ष का उत्सव मनाया जाता है। इसी तरह भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर शक संवत पर आधारित है, जिसे ग्रेगौरियन कैलेंडर के साथ-साथ 22 मार्च 1957 से अपनाया गया। भारतीय राष्ट्रीय पंचांग में भी कुल 12 महीने होते हैं, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर के साथ-साथ चलते हैं, लेकिन इसमें प्रथम माह चैत्र होता है जो प्रायः 22 मार्च को शुरू होता है और लीप ईयर में 21 मार्च को होता है। इन भारतीय महीनों के नाम क्रमशः- चैत्र, वैसाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन, कार्तिक, अग्रहायन(मार्गशीर्ष), पूस, माघ, फाल्गुन हैं।


भारत में विभिन्न धर्मों के लोग अलग-अलग दिन नव वर्ष उत्सव मनाते हैं, जिनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है....


ईस्लामिक नववर्ष- इस नववर्ष को हिजरी नये साल के नाम से भी जाना जाता है। ईस्लामिक नया साल पाक महीने मुहर्रम से शुरू होता है। सबसे पहले नव वर्ष की शुरूआत 622 ई0 में हुई थी, जब मक्का से मदीना पैगम्बर मोहम्मद आये थे। इसे हिजरा कहा गया था। मोहम्मद साहब ने इस महीने को उपवास और अराधना के लिये सबसे पवित्र कहा है।


 ईस्लामिक कैलेंडर चन्द्र चक्र पर आधारित है, जिसमें 12 महीने में 354 दिन होते हैं। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार ईस्लामिक कैलेंडर में 10 दिन कम होते हैं। इसलिये ईस्लामिक नया साल 10/12 दिन पहले शुरू हो जाता है। ईस्लामिक कैलेंडर के अनुसार नये साल के दिन की शुरूआत सूर्यास्त के समय से होती है।


पारसी नववर्ष- पारसी धर्म में नया साल नवरोज के रूप में मनाया जाता है। नवरोज मतलब नया दिन। आमतौर पर 19 अगस्त को नवरोज का उत्सव मनाया जाता है। लगभग 3000 वर्ष पूर्व शाह जमशोदजी ने पारसी धर्म में नवरोज मनाने की शुरूआत की।


जैन नववर्ष- दीपावली के अगले दिन जैन नववर्ष की शुरूआत होती है। ऐसी मान्यता है कि भगवान महावीर स्वामी को दीपावली के दिन ही मोक्ष प्राप्ति हुई थी, इसलिये इसके अगले दिन जैन धर्म के लोग नव वर्ष का उत्सव मनाते हैं। व्यापारी वर्ग भी इसी दिन को नया साल मानते हैं।


सिक्ख नववर्ष- पंजाब में नववर्ष बैशाखी के रूप में मनाया जाता है, जो अप्रैल में आता है। सिक्ख नानकशाही कैलेंडर के अनुसार होली के दूसरे दिन (होला मोहल्ला) नया साल होता है।


सिंधी नववर्ष- सिंधी नववर्ष चेतीचंद उत्सव से शुरू होता है, जो चैत्र शुक्ल द्वितिया को मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान झूलेलाल का जन्म हुआ था, जो वरूण देव के अवतार थे।


हिंदु नववर्ष- हिंदु नववर्ष की शुरूआत चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है। इसे नव संवत्सर या नव संवत कहते हैं। मान्यतानुसार ब्रह्माजी ने इसी दिन सृष्टि की रचना आरंभ की थी। इस दिन से विक्रम संवत के नये साल का आरंभ भी होता है। इस तारीख के महत्व को जानें तो इसी दिन सम्राट विक्रमादित्य ने अपना राज्य स्थापित किया था। इन्हीं के नाम पर विक्रम संवत का पहला दिन प्रारंभ होता है। यह दिन श्री राम के राज्याभिषेक का भी दिन है।


चैत्र मास का वैदिक नाम है मधु मास। मधु मास मतलब आनंद बांटता वसंत का महीना। इस समय सारी प्रकृति में उष्णता बढ़ने लगती है, जिससे पेड़-पौधे, जीव-जन्तु में नया जीवन आता है।


 देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंदु नव वर्ष को विभिन्न नामों एवं अलग-अलग तिथियों को मनाया जाता है, जो निम्नलिखित रूप से दिये गये है-


चैत्र नववर्ष- उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में मनाया जाता है। चैत्र नवरात्रि से ही हिंदु नववर्ष के पंचांग की गणना प्रारंभ होती है। इस दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। विष्णु के अवतार भगवान श्रीराम का जन्म भी चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि को हुआ, जिसे रामनवमी के नाम से मनाया जाता है।


गुड़ी पड़वा- नव वर्ष का यह उत्सव महाराष्ट्र, गोवा और कोंकण क्षेत्र में मनाया जाता है। इस अवसर पर यहाँ के लोग गुड़ी का पूजन कर इसे घर के द्वार पर लगाते हैं। मान्यता है कि यह वंदनवार घर में सुख, समृद्धि एवं खुशियाँ लाता है। इस मौके पर पूरनपोली नामक मीठा व्यंजन बनाने की तो मराठियों में श्रीखंड बनाने की परंपरा है। यह भी मान्यता है कि महान गणितज्ञ भास्कराचार्य ने इसी दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन, महिने एवं साल की गिनती कर पंचांग की रचना की थी। यह भी कहा जाता है कि भगवान राम ने इसी दिन दक्षिण के लोगों को बाली के अत्याचार से मुक्त किया था, जिसकी खुशी में गुड़ी(विजय पताका) फहराई गई थी। इसी तरह मराठियों में यह मान्यता है कि इसी दिन छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिंदु पदशाही का भगवा विजय ध्वज लगाकर हिंदवी साम्राज्य की स्थापना की थी।


उगादी- आंध्रप्रदेश, तेलंगाना एवं कर्नाटक में उगादी नाम से नववर्ष मनाया जाता है।उगादी का मतलब एक नई उम्र की शुरूआत से है। एसे चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष के प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन यहाँ के लोग अपने घर एवं आस-पास की सफाई करते हैं, सुन्दर कपड़े पहनते हैं, और सांस्कृतिक एवं पारंपरिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। घर के प्रवेश द्वार पर आम के पत्ते लगाये जाते हैं। इस दिन सब सुबह उठकर तिल का तेल अपने सिर और शरीर में लगाते हैं, फिर मंदिर जाकर पूजा-अराधना करते हैं। तेलंगाना में नववर्ष का यह पर्व तीन दिन तक मनाया जाता है।


नवरेह- जम्मू कश्मीर में यह नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। नवरेह उत्साह एवं रंगों का त्योहार है। इस दिन कश्मीर में लोग चावल से भरे पात्र को देखते हैं। यह धन और वैभव का प्रतीक है।


थापना- राजस्थान एवं मारवाड़ क्षेत्र में यह पर्व चैत्र शुद्ध की पहली तिथि को मनाया जाता है।


चेती चांद- सिंधी समाज के लोग नववर्ष चेटीचंड के नाम से मनाते हैं। इस दिन सिंधी लोग अपने ईष्ट देवता झूलेलाल भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं। इस अवसर पर सिंधी पकवान बनाए जाते हैं, और साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है।  


सजीबू नोग्मा पनबा- सजीबू नोग्मा पनबा का मतलब है महीने का पहला दिन। यह मणिपुरी शब्द है। इसे सजीबू चाईरोबा भी कहते हैं। इस दिन सभी मणिपुरी सुबह उठकर स्नान के बाद पूजा करते हैं। महिलाएँ नये चावल, फूल एवं फलों से खाना पकाती हैं।


भले ही पूरी दुनियाँ में नववर्ष मनाने की तारीख और तरीके अलग-अलग हों, मगर सबका उद्येश्य नव शक्ति का संचार ही है, जो जीवन में आगे बढ़ने के लिये बेहद जरूरी हैं। नया साल एक नई शुरूआत को दर्शाता है। पुराने साल में हमने जो भी किया, सीखा, सफल या असफल हुए उससे सीख लेकर, आगे बढ़ने के संकल्प के साथ जीवन को और बेहतर बनाने की कोशिश करना है।


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