क्या है सोशल साइट हैकिंग का सच?

अक्सर सोशल साइट यूजर अपने अकउंट हैकिंग की बात करते है, या फिर उससे डरते हैं। इस बारे में सही जानकारी नहीं होना भी इस डर की बड़ी वजह है। सोशल साइट यानी एक ऐसा ऑनलाइन मंच जहां आप समाज से जुड़ जाते हैं। फ़ेसबुक, ट्विटर से लेकर इंस्टाग्राम ऐसे ही मंच हैं। इस ऑनलाइन सामाजिक दुनिया में हर व्यक्ति अपनी छवि को सहेजने का प्रयास करता रहता है।


दूसरा इन सोशल साइट्स पर आपके प्रोफाइल में कुछ ऐसी जानकारियां भी होती हैं, जो आप सिर्फ कुछ लोगों के साथ ही बांटना चाहते हैं। आपकी इस छवि और निजता में सेंध लगाते हैं हैकर्स।  हैकर शब्द सुनते ही हमारे मन में एक ऐसे प्रोग्रामर की छवि बनती है जो बिना आपकी मर्जी के आपकी प्रोफाइल तक पहुंच जाता है। न सिर्फ पहुंच जाता है, बल्कि आपके प्रोफाइल का दुरुपयोग भी करता है। हमने कई बार कुछ लोगों को कहते सुना होगा कि उनका फ़ेसबुक अकाउंट हैक हो गया था।


मेरे एक मित्र ने पोस्ट किया, 'दोस्तों मेरा अकाउंट हैक हो गया था। मेरे नाम से गलत और कुछ अश्लील तरह का मैसेज मेरे सभी दोस्तों के पास पहुंचा है। मैंने ऐसा कोई मैसेज किसी को नहीं भेजा। ये सब किसी हैकर ने किया है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि किसी की वॉल पर कुछ ऐसा पोस्ट हो जाता है, जो उसने नहीं किया होता। इस तरह की पोस्ट और ऐसे मैसेज देखकर अक्सर हम सब डर जाते हैं। हमें डर सताने लगता है कि कहीं हमारा अकाउंट हैक ना हो जाए।


बड़ी वेबसाइट्स अपने सर्वर की सुरक्षा का रखते हैं पूरा ख्याल


लेकिन क्या आप जानते हैं कि जहां तक सोशल अकाउंट का मामला है, हैकिंग से आपको डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ये आपकी सीमा से बाहर का मामला है। आपको हैकिंग से बचाने की जिम्मेदारी खुद फेसबुक और ट्विटर की है। और सबसे बड़ी बात ये है कि इस तरह की बड़ी वेबसाइट्स अपने सर्वर की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखती हैं। यही वजह है कि कोई हैकर इनकी सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाकर इनके सर्वर तक नहीं पहुंच पाता है।


अब आपके मन में प्रश्न उठेगा कि अगर हैकिंग इतनी मुश्किल है और हैकर इन बड़ी साइट्स के सर्वर तक नहीं पहुंच पाते हैं, तो फिर वो सब क्या है जिसे लोग अकाउंट हैक होना कहते हैं।


इसे समझने के लिए आपकों दो शब्दों का फर्क समझना होगा, पहला हैकिंग और दूसरा फिशिंग। इन दोनों का लक्ष्य तो एक ही होता है, वो है आपकी निजी जानकारी तक पहुंचना, लेकिन इनके तरीके अलग होते हैं। हैकर बिना आपकी मर्जी के इन जानकारियों को चुराता है। वहीं, फिशिंग में आपको बहकाकर खुद आपसे जानकारी ले ली जाती है।


आमतौर पर सोशल अकाउंट हैकिंग के जितने मामले सामने आते हैं, वो हैकिंग के नहीं फिशिंग के होते हैं। फिशिंग को कुछ ऐसे समझ सकते हैं, जैसे मछली को चारा दिखाकर उसे जाल में फंसा लेना। इससे बचना बेहद आसान है क्योंकि आप मछली तो हैं नहीं।


सावधानी ही हैकिंग का बचाव


जरा सी सावधानी से आप इस जाल से बचे रह सकते हैं। फिशिंग से बचने के लिए जरूरी है ये समझना कि फिशिंग होती कैसे है? फिशिंग होती है आपको किसी बात का लालच या डर दिखाकर आपसे ऐसे लिंक पर क्लिक करवाकरजहां आपको क्लिक नहीं करना चाहिए।


फ़ेसबुक पर फिशिंग वाले मैसेज कुछ इस तरह के होते हैं - 'आपके दोस्त का प्राइवेट वीडियो लीक हो गया है। देखने के लिए क्लिक करें।' जैसे ही आप उस प्राइवेट वीडियो को देखने के लालच में क्लिक करते हैं, आप उसके जाल में फंस जाते हैं। वीडियो दिखाने से पहले आपसे कुछ जानकारी मांगी जाती है। आपके प्रोफाइल तक पहुंचने की अनुमति मांगी जाती है। इतना सब होने के बाद हैकिंग का सच आपको वो वीडियो तो नहीं दिखता, लेकिन आपके नाम से कुछ वैसा ही मैसेज आपके सभी दोस्तों तक पहुंच जाता है।


जब आपको पता चलता है, तब आप इसे हैकर का किया-धरा बताकर खुद को बचाते हैं। कभी-कभी फिशिंग ये कहकर भी होती है कि आपका अकाउंट बंद किया जा रहा है। अगर आप इसे चालू रखना चाहते हैं तो क्लिक कर जानकारी दें। उस लिंक पर क्लिक करते ही आप फिर लॉग इन पेज पर पहुंच जाते हैं। यह लॉग इन पेज असली नहीं होता, सिर्फ जाल होता है। जैसे ही आप उस लॉग इन पेज पर अपनी डिटेल देते हैं, वो वहां पहुंच जाती है, जहां उसे नहीं पहुंचना चाहिए।


निम्नलिखित बातों का रखें ख्याल


इनसे बचने के लिए आपको बस कुछ ही बातें ध्यान में रखनी होंगी। पहली और सबसे जरूरी बात कि किसी भी ब्राउजर पर जब आप अपना अकाउंट लॉग इन कर लेते हैं, तो वो तब तक लॉग आउट नहीं होता, जब तक आप खुद लॉग आउट न करें या आपने ब्राउजर बंद न किया हो।


अगर आप प्राइवेट ब्राउजिंग का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो ब्राउजर बंद करने के बाद भी कैश फाइल्स की मदद से आपका अकाउंट काफी देर तक लॉग इन ही रहता है। इसलिए एक बार लॉग इन होने के बाद कोई भी लिंक अगर आपको दोबारा लॉग इन पेज पर ले जाए तो इसका मतलब वो सिर्फ आपकी जानकारी चुराने की कोशिश कर रहा है।


दूसरी बात, किसी का सीक्रेट वीडियो देखने के चक्कर में अपना सीक्रेट बाहर मत लाइये। ऐसे किसी लिंक पर क्लिक मत कीजिए, जिस पर संदेह हो। सोशल साइट पर आप कुछ लिखने, बहुत कुछ पढ़ने और कुछ लोगों से बातें करने आते हैं। बस यही कीजिए। आपके किसी दोस्त के नाम से भी ऐसा कोई लिंक आए, जो संदेहजनक लगे, तो उससे जरूर पूछे।


अगर क्लिक कर भी दिया, तो हमेशा ध्यान रखें कि कोई लिंक अगर पहले क्लिक पर आपको वहां नहीं ले गया, जहां की बात कह रहा है, इसका मतलब वो जाल है आपको फंसाने का। आभास होते ही उस लिंक को बंद करें और वापस आ जाएं। इन छोटी-छोटी सावधानियों से आप बड़े से बड़े जाल से बचे रह सकते हैं। 


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