झूठ

.  रेड लाईट पर जैसे ही गाड़ी रुकी तो एक छोटी सी बच्ची ने मेरे पास आकर कहा, "बाबू जी, एक गुलाब ले लो... ताजा गुलाब है... ले लो न बाबू जी, सुबह से एक भी नही बिका है...।"


         मैने मदद करने के इरादे से एक गुलाब उस बच्ची से खरीद लिया। थोड़ी देर बाद ही मेरा उसी रास्ते से वापस लौटना हुआ तो देखा कि वही बच्ची अभी भी गुलाब के फूल बेच रही है। मैने देखा कि वह बच्ची साथ वाली गाड़ी को वही कह कर गुलाब बेच रही है जो उसने थोड़ी देर पहले मुझ से कहा था, बाबू जी गुलाब ले लो सुबह से एक भी नही बिका है।


         मैने सोचा, कितनी गंदी लड़की है, झूठ बोलकर फूल बेच रही है। मै आगे बढ़ गया... तभी मेरी नज़र एक विज्ञापन होर्डिंग पर पड़ी... क्रीम का विज्ञापन था, लिखा था... सात दिन मे रंग गोरा करे। इसके बाद तो न जाने कितने ही ऐसे होर्डिंग दिमाग मे घूम गए। इतनी बड़ी बड़ी कम्पनियाँ जब अपना समान बेचने के लिये झूठ का सहारा ले सकती है तो वह छोटी सी बच्ची....  नही.... नही .... वह बच्ची झूटी नही है। उस बच्ची का झूठ तो केवल लाचारी थी... पेट की  भूख मिटाने की लाचारी।


          वह बच्ची गंदी नही थी....नही.... बिल्कुल नही ....।


 


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