त्योहार के मौसम में भी फीकी पड़ी है इस बाजार की रौनक


त्योहार हर घर में हर्षोल्लास लेकर आता है। हर चेहरे पर रौनक तो रहती ही है, बाजार में भी चहल पहल बढ़ जाती है। लोग जमकर खरीदारी करते हैं। इसलिये व्यापारी भी इन्हीं दिनों अपने सालभर के मुनाफे देखते हैं। मगर इस बार त्योहार के उत्साह में कुछ कमी देखने को मिल रही है।


लोग अपनी जेब देखते हुए कम खर्चे में त्योहार मनाने की सोच रहे तो वहीं बाजार में भी पहले जैसी रौनक नजर नहीं रही है। पूरे देश दुनियां में जिस सूरत के व्यापारियों की बात लोग करते हैं, आज वहाँ भी उदासी की झलक है। दीपावली के मौसम में व्यापारियों के चेहरे की रोशनी मध्यम पड़ गई है। यह असर सूरत में टेक्सटाइल उद्योग, डायमंड, जरी के काम काज, एस्टेट डेवलपर्स के काम काज में खास तौर से दिख रहा है।



इस बारे में फेडरेशन ऑफ सूरत टेक्सटाइल एसोसिएशन(फोस्टा) के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान समय में अगर कपड़ा व्यापार की बात करते हैं, जबसे जी.एस.टी. एवं नोटबंदी लागू हुआ है, सूरत का कपड़ा उद्योग दिन-प्रतिदिन प्रभावित हुआ है। आज दीपावली के सीजन में भी कपड़े के व्यापार में कोई रौनक नहीं है।


वर्षों से सूरत में कपड़ा व्यापार चल रहा है, लेकिन पहले किसी प्रकार का टैक्स वगैरह नहीं था, लेकिन जब से जीएसटी लगा है, कपड़ा व्यापार पर असर पड़ा है, और नोटबंदी का असर तो अभी तक देखने को मिल रहा है। क्योंकि नकद में कोई काम काज नहीं हो रहा है। इसलिये व्यापारी बहुत छोटे पैमाने पर खरीदी कर रहे हैं। पूरा व्यापार 50 प्रतिशत से भी कम होता जा रहा है।


फोस्टा के कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने कहा कि, पिछले कुछ वर्ष की अपेक्षा जब से जीएसटी लगी है, उसके बाद कपड़े के बाजार की स्थिति दयनीय हो गई है। धंधा 50 प्रतिशत में हो गया है, और इसमें दिन प्रतिदिन गिरावट आ रही है।


सबसे बड़ी समस्या तो आर्थिक तंगी की आ गई है। व्यापारियों के पास रूपये आ ही नही रहे हैं। पहले 30 या 60 दिन में व्यापारियों के पास भुगतान आ जाते थे लेकिन अब 120 से 150 दिन में भी मुश्किल से आते हैं। व्यापारी अत्यंत तंगी हालत में व्यापार करने को मजबूर हैं।


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