छत्तीसगढ़ भवन में फेस्टिवल सेल के तहत हस्तशिल्प प्रदर्शनी का आयोजन


 दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ भवन में फेस्टिवल सेल के तहत हस्तशिल्प प्रदर्शनी और सेल लगाई गयी है, जिसमें छत्तीसगढ़ के बुनकर राज्य की खास पहचान कोसा सिल्क की साड़ियाँ लेकर पहुंचे हैं। 7-14 अक्तूबर तक लगाई गयी प्रदर्शनी में टसर सिल्क में हैंड ब्लॉक वर्क, ट्राइबल आर्ट और एप्लिक वर्क आदि की कई वेराइटी की साड़ियाँ उपलब्ध हैं। यहां कॉटन की चादरनेचुरल डाई से तैयार कोसा सिल्क सहित अनेक वैराइटी मिल रहे हैं।


कारीगरों के द्वारा हाथों से बुने कपड़े अक्सर व्यक्तित्व की खूबसूरती बढ़ा देते हैं। यही वजह है कि हैंडलूम के आइटम्स की हमेशा डिमांड रहती है। छत्तीसगढ़ में हैंडलूम को लेकर विशेष तरह का काम हो रहा है। साड़ी से लेकर कई तरह के ड्रेस मटेरियल बन रहे हैं, जिसे लेकर राज्य के कारीगर प्रदर्शनी में पहुंचे हैं।


प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के बस्तर के शिल्पी कोसा सिल्क साड़ियां लेकर आए हैं। इन साड़ियों की खासियत है कि साड़ी पर मुरिया आदिवासियों की संस्कृतिउनकी जीवन शैलीमान्यताएं आदि उकेरी गई हैं। वहीं रायगढ़ से आए कारीगर एप्लिक वर्क की साड़ियाँ लेकर आयें हैं, जिसमें कपड़े को काटकर डिज़ाइन तैयार किया जाता है। चांपा से आए गजानन्द देवांगन 19 साल कारीगरी से जुड़े हैं।


उन्होने बताया कि कोसा टसर की साड़ियों पर लड़कियां बस्तर आर्ट बनाती हैं, कलर करने के लिए इसमें नैचुरल डाई का उपयोग किया जाता है। वहीं, बिलाईगढ़ से पहुंचे देवानन्द देवांगन ने कोसा तैयार करने की विधि बताते हुये कहा कि कोकून ( कोसा धागे का कोवा)  बस्तर और जगदलपुर के जंगलों में ज्यादा होता है। कोकून के अंदर स्थि त रेशम के कीड़े को मारकर सात दिनों तक धूप में सुखाया जाता है। उसके बाद उसे सोडा के साथ उबालकर फ़ाइन धागा तैयार किया जाता है।


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