पटना में बन रहे खादी मॉल में मिलेंगे मधुबनी और भागलपुर के मशहूर खादी वस्त्र एवं हस्तशिल्प


  

बिहार में खादी को नई पहचान दिलाने एवं लोगों को उससे जोड़ने के लिये बिहार सरकार के उद्योग विभाग द्वारा  पटना के गाँधी मैदान निकट स्थित खादी भवन का आधुनिकरण कर "खादी मॉल" बनाया जा रहा है, जिसका 3 अक्टूबर 2019 को  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उद्घाटन करेंगे। इसकी जानकारी देते हुए उद्योग मंत्री श्याम रजक ने कहा कि इस पहल से राज्य में खादी को अलग पहचान मिलेगी।

  मॉल में मधुबनी, भागलपुर सहित कई जगहों की प्रशिद्ध खादी की दुकानें होंगे। उन्होंने कहा कि अब राज्य के लोगों को अच्छी गुणवत्ता की खादी के वस्त्रों के लिए कहीं भटकने की जरूरत नहीं होगी।  हर तरह के एक से एक खादी के कपड़े, हस्तशिल्प, मधुबनी पेंटिंग आदि एक ही छत के नीचे खादी मॉल में लोगों को उचित मूल्य पर उपलब्ध रहेगी।

 

गौरतलब है कि खादी हमारे देश की पहचान है। केन्द्र व राज्य सरकार खादी ग्रामोद्योग के साथ मिलकर खादी को युवाओं की पसंद बनाने की दिशा में निरंतर काम कर रहे हैं। खादी में कुछ बुनियादी गुण होते हैं जिन्हें अभी तक समझा नहीं गया है। इस बारे में लोगों को बताने की जरूरत है।

 

खादी एक प्राकृतिक वस्त्र है। यह कार्बन रहित कपड़ा है जिसे कोई मशीन नहीं बना सकती। यह पर्यावरण के काफी अनुकूल है, एक मीटर खादी कपड़ा बनाने में महज 3 लीटर पानी लगता है जबकि इतना ही कपड़ा बनाने में मशीन 56 लीटर पानी की खपत करती है। खादी में जाड़े के दिनों में गर्मी और गर्मी के मौसम में ठंड प्रदान करने का विशेष गुण होता है। इसमें इस्तेमाल किए गए सभी धागे हाथ से बनाए होते हैं।


खादी और ग्रामीण क्षेत्र के कारोबार को और बढ़ाने की जरूरत है क्योंकि जनसंख्या का एक बड़ा वर्ग इस पर निर्भर है।यदि देश के 130 करोड़ नागरिक खादी का उपयोग करने लगें तो इससे 15 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इसलिए खादी कपड़ों की खरीदारी कर हम देश की बेहतर तरीके से सेवा कर सकते हैं।




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