23 साल पहले जीरो से शुरू हुई इस संस्था ने चढ़ लिये सफलता के कई पायदान


एक बड़ी सोच और छोटी शुरूआत ही निरंतर व्यक्ति को उसकी मंजिल के करीब ले जाती है। इसके कई उदाहरण हमारे आस-पास देखने को मिल जाते हैं, और वह हमारी सफलता की राह में प्रेरक भी बनते हैं। उन्हीं में से एक नाम है गिरिजेश चौबे का। आज से 23 साल पहले गिरिजेश चौबे ने भी बड़ी सोच के साथ छोटी शुरूआत की थी और अब उनकी सोच बड़े स्तर पर सफलता के मापदंड तय कर रही है।


25 सितंबर 1996 को गिरिजेश चौबे ने “पाथेय”(पीपुल्स  एसोसिएशन फॉर टोटल हेल्प एंड युथ अप्लायज़) नामक स्वयं सेवी संगठन की शुरूआत की थी, जिसे शोषित एवं वंचित समुदाय के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए गठित किया गया था।


यह संस्था खासकर ठोस अवशिष्ट प्रबंधन, शिक्षा,स्वास्थ्य, कौशल विकास, एवं महिला सशक्तिकरण  के क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान बना रही है। आज उस संगठन ने अपने 23 साल पूरे कर लिये। इस अवसर पर पाथेय के दिल्ली स्थित ऑफिस में वर्षगांठ मनाई गई, जिसमें “पाथेय” से संबंधित लगभग सभी महत्वपूर्ण लोग एवं प्रबंधक गीता चौबे मौजूद रहे।


विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित भारत सरकार के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस टेक्नोलॉजी एंड डेवलपमेंट स्टडीज के पूर्व चीफ साइंटिस्ट एस.एस. सोलंकी ने कहा कि गरीबी से इंसान जूझ सकता है, लड़ सकता है, लेकिन गंदगी इंसान को मारने का काम करती है। इसलिये समाज से गंदगी हटाने और उसके निस्तारण में यह संस्था पाथेय बहुत अच्छा कार्य कर रही है।


इस अवसर पर संस्था के संस्थापक गिरिजेश चौबे ने अपनी 23 साल की यात्रा के दौरान आने वाली कठिनाईयों और चुनौतियों की चर्चा की और उस पल को भी याद किया जब लोगों से 10-10 रूपये चंदा इकट्ठा कर संस्था को चलाने की कोशिश की। शुरूआत में लोग तंज कसते मगर सोच को आगे ले जाने की जिद ही थी कि हार नहीं मानी।


इस दौर में सतीश सहरावत जैसे एक साथी का मजबूत साथ मिला और सफर पर आगे बढ़ने लगे। गिरिजेश कहते हैं कि 1996 से लेकर 2004 तक कठिनाईयों का दौर था, जब संस्था को कोई काम नहीं मिला था। 2004 में सर्व शिक्षा अभियान का पहला काम मिला। तबसे लेकर अब तक हमने पीछे मुड़कर नहीं देखा। संस्था लगातार आगे बढ़ रही है। एक ग्रुप की शक्ल ले चुकी है, जिसके अंदर 15 कंपनी हैं। लगभग 5000 लोगों को इस संस्था में रोजगार मिला है।


यह अपने आपमें एक बड़ी उपलब्धि है। गिरिजेश चौबे कहते हैं कि हमने अपने काम को पूरी जिम्मेदारी से किया है। हमारी टीम अच्छा काम कर रही है। उन्होंने उम्मीद जाहिर करते हुए कहा कि अगर हम इसी तरह चलते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब 2022 तक हजार करोड़ की कंपनी बन जाएगी। हालांकि इस मौके पर देश में जीडीपी विकास दर में आई कमी का जिक्र करते हुए यह जरूर कहा कि इसका असर उनकी कंपनी के मुनाफे पर पड़ा है, जो सरकारी सुधारों के साथ कुछ महीनों में ठीक हो जाएगा।    


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