मशहूर गाना पांच रूपैया बारह आना के पीछे है मजेदार कहानी


4 अगस्त 1929 को मशहूर अभिनेता, गायक व निर्देशक किशोर कुमार का जन्म मध्य प्रदेश के खंडवा शहर में जाने माने वकील कुंजीलाल के यहां हुआ। इनका वास्तविक नाम आभास कुमार गांगुली था। ये जब भी किसी सार्वजनिक मंच पर अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करते तो शान से कहते किशोर कुमार खंडवा वाले। अपनी जन्मभूमि के प्रति ऐसा जज्बा बहुत कम लोगों में होता है।


     किशोर कुमार ने इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज से अपनी शिक्षा पूरी की। वहीं, ये कॉलेज की कैंटीन से उधार लेकर खुद भी खाते और दोस्तों को भी खिलाते। उस समय दस पैसे की उधारी भी बहुत मायने रखती थी। इसी क्रम में एक बार किशोर कुमार का उधार कैंटीन वाले के पास पांच रुपैया बारह आना हो गया।  कैंटीन वाला जब उधारी के पांच रुपैया बारह आना चुकाने को कहता, तब ये टेबल में बैठ कर गिलास और चम्मच बजा कर पांच रुपैया बारह आना गाकर धुन निकालते। बाद में इन्होंने अपने गीत में पांच रुपैया बारह आना बहुत ही खूबसूरती से इस्तेमाल किया।


    इन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत अभिनेता के रूप में 1946 की फिल्म शिकारी से की। इन्हें पहली बार गाने का मौका 1948 की फिल्म ज़िद्दी से मिला। 1958 की फिल्म चलती का नाम गाड़ी में किशोर कुमार ने अपने दोनों भाइयों अशोक कुमार और अनूप कुमार के साथ काम किया। इनकी शुरुआत की कई फिल्मों में मोहम्मद रफी ने इनके लिए आवाज दी। इन्हें आठ फिल्म फेयर पुरस्कार मिले। किशोर कुमार को पहला फिल्म फेयर पुरस्कार 1969 की फिल्म आराधना का गीत रूप तेरा मस्ताना... के लिए मिला। इन्होंने 81 फिल्मों में अभिनय किया और 18 फिल्मों का निर्देशन भी किया। 13 अक्टूबर 1987 को बंबई में इनका निधन हो गया।


          उपर्युक्त जानकारी गैर सरकारी संस्था दर्शन मेला म्यूजियम डेवलपमेंट सोसायटी की प्रमुख उपलब्धि पाठक मंच के साप्ताहिक कार्यक्रम इंद्रधनुष की 677वीं कड़ी में दी गई।


 


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