महिला कॉलेज के संस्कृत कार्यक्रम में विकल्प मीमांसा की चर्चा


हर वर्ष की तरह इस बार भी मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशानुसार 12 अगस्त से 19 अगस्त तक संपूर्ण भारत में राष्ट्रीय संस्कृत सप्ताह का आयोजन किया गया। यह आयोजन झारखंड के चाईबासा में स्थित महिला कॉलेज  में भी हुआ, जिसमें लगभग 150 बालिकाओं ने संस्कृत के अलग-अलग कार्यक्रमों में भाग लिया।


इस कॉलेज में संस्कृत सप्ताह का आयोजन 16 से 19 अगस्त के बीच किया गया जिसमें संस्कृत नाटक, संस्कृत गीत, नृत्य, मंत्रोच्चारण, संस्कृत संभाषण, वार्ता, चित्रांकन प्रतियोगिता, रूप सज्जा प्रतियोगिता जैसे कई कार्यक्रमों का समावेश रहा।


इस अवसर पर बी.एड. संकाय की शिक्षिका डॉक्टर पुष्पा कुमारी ने कहा कि संस्कृत हमारे देश की पहचान है। हमारे देश के सभी ग्रंथों की मूल रचना संस्कृत में है।


संस्कृत सप्ताह कार्यक्रम के आयोजन में अपनी मुख्य भूमिका निभाने वाले संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉक्टर निवारण महाथा ने कहा कि यह क्षेत्र जहाँ क्षेत्रीय भाषाओं का ही चलन है, वहाँ संस्कृत को लेकर इस तरह के रूझान सराहनीय है।


उन्होंने कहा कि हमारी बच्चियों को अपने नाम का संस्कृत में उच्चारण पता है, और वह काफी हद तक संस्कृत भाषा से परिचित हैं। इसकी बड़ी वजह रोजगार का भी मिलना है।


आज जब अन्य क्षेत्रों में बच्चों को नौकरी की तलाश में भटकना पड़ता है, तो संस्कृत विषय में शिक्षा प्राप्त कर बच्चे इस बात से आश्वस्त रहते हैं, कि बेरोजगार नहीं रहेंगे, क्योंकि यहाँ भीड़ कम है।



झारखंड के महिला कॉलेज में मनाए जा रहे संस्कृत सप्ताह के दौरान मासिक पत्रिका विकल्प मीमांसा की भी खूब चर्चा हुई। दरअसल दिल्ली से प्रकाशित हो रही राष्ट्रीय मासिक पत्रिका इन दिनों झारखंड के विभिन्न हिस्सों में अपनी पैठ बना रही है। राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक व शैक्षिक मुद्दों को समेटती यह पत्रिका धीरे-धीरे पाठकों की पसंद बनती जा रही है।


इसके बारे में और जानकारी देने व प्रसार के लिये कार्यक्रम के दौरान विकल्प मीमांसा का भी स्टॉल लगाया गया, जिसमें कॉलेज छात्राओं ने अपनी रूचि दिखाई। इसके लिये महिला कॉलेज की छात्रा अंजली ठाकुर, जो दर्शन मेला म्यूजियम डेवलपमेंट सोसायटी के सदस्य भी हैं, ने पत्रिका प्रतिनिधि के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


कॉलेज की प्राचार्य डॉक्टर आशा मिश्रा ने कहा, "आज जब सोशल माडिया की तरफ सब दौड़ रहे हैं, तब पुनः पढ़ने की आदत से जोड़ने के लिये यह पत्रिका कारगर सिद्ध हो सकती है।"


महिला कॉलेज, चाईबासा के बारे में-


     महिला कॉलेज पोस्ट ग्रैजुएट कॉलेज है। इसकी स्थापना 2 अक्टूबर 1969 में कोल्हान प्रमंडल के सम्मानित समाज सेवी एवं उद्योगपति सीता राम रुंगटा के द्वारा की गई थी।  इस कॉलेज की स्थापना के पीछे उनका उद्येश्य महिलाओं को शिक्षा ग्रहण करने लिये सुरक्षित एवं निर्भिक माहौल देना था। 


इस कॉलेज की स्थापना से पूर्व सभी महिला छात्राओं को शहर से दूर टाटा कॉलेज जाना पड़ता था, जहाँ तक पहुंचने के लिये यातायात की सुविधा नहीं थी। महिला कॉलेज खुलने के बाद क्षेत्र की सभी छात्राएँ यहाँ से शिक्षा ग्रहण कर देश विदेश में अपना नाम रौशन कर रही हैं। वर्तमान में महिला कॉलेज चाईबासा की प्राचार्या डॉक्टर आशा मिश्रा हैं। जिनकी देख-रेख में कॉलेज की छात्राएं सभी संकाय की पढ़ाई कर रही हैं।


Popular posts from this blog

समय की मांग है कि जड़ से जुड़कर रहा जाय- भुमिहार महिला समाज।

जन वितरण के सामान को बाजार में बेचे जाने के विरोध में ग्रामीणों ने की राशन डीलर की शिकायत।

दिल्ली के लिये हरियाणा से पानी की कमी को लेकर आप नेताओं ने किया, दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के घर का घेराव।