खादी की ओर युवाओं को आकर्षित करने की बड़ी चुनौती


केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम एवं सड़क परिवहन तथा राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि हमें खादी क्षेत्र को मजबूत बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि खादी और ग्रामीण क्षेत्र के कारोबार को और बढ़ाने की जरूरत है क्योंकि जनसंख्या का एक बड़ा वर्ग इस पर निर्भर है। गडकरी, मुंबई में भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित व्यापार सम्मेलन “खादी ब्रांड का वैश्वीकरण: भारत का गर्व” को संबोधित कर रहे थे।


गडकरी ने आगे कहा कि खादी, गांधीजी की सोच की आत्मा है। अपने सिद्धांतों के साथ समझौता किए बगैर हमें उत्पाद डिजाइन, फैशन डिजाइन, बुनाई और अन्य प्रक्रियाओं में खादी के आधुनिकीकरण की जरूरत है। गडकरी ने खादी को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र में कार्यरत लोगों से आगे आने का आह्वान किया।


उन्होंने कहा, 'प्रौद्योगिकी और गुणवत्ता के नजरिए से देखा जाए तो यह मुश्किल नहीं है। अगर हमें उद्योग जगत से अच्छे इनपुट मिलते हैं तो ब्रांड खादी को विश्व-प्रसिद्ध बनाया जा सकता है। उपभोक्ता की पसंद बदल गई है। उन्होंने कहा कि सरकार अलीबाबा जैसे ई-मार्केट पोर्टल की तर्ज पर भारत क्राफ्ट के नाम के पोर्टल को विकसित कर रही है। यह खरीदारों और विक्रेताओं को एक दूसरे से सीधा जोड़ेगा।


 गडकरी ने बताया कि उनका मंत्रालय टेराकोटा से बने कुल्हड़ों में चाय परोसने के लिए रेल मंत्रालय के साथ बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा, 'फिलहाल यह दो स्टेशनों में उपलब्ध है; मैंने रेल मंत्री और राज्यों के परिवहन मंत्रियों को सभी बस स्टेशनों और रेलवे स्टेशनों में इन कुल्हड़ों को अनिवार्य बनाने के लिए लिखा है।'



 इस मौके पर एमएसएमई राज्य मंत्री प्रताप चंद्र सारंगी ने कहा: 'महात्मा गांधी के नेतृत्व में हमारे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान खादी उद्योग को प्रसिद्धि मिली। गांधीजी ने एक साधारण उत्पाद को राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक के रूप में बदल दिया। एक साधारण कपड़ा हमारे राष्ट्रीय आंदोलन का एक बड़ा हथियार बन गया।' खादी का वैश्विक आकर्षण है। यह पर्यावरण के अनुकूल, शरीर के लिए स्वास्थ्य वर्द्धक, कम पानी का इस्तेमाल करने वाला होता है और यह लाखों लोगों को आजीविका उपलब्ध कराता है।


मुझे पूरा विश्वास है कि यदि देश के 130 करोड़ नागरिक खादी का उपयोग करने लगें तो इससे 15 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इसलिए खादी कपड़ों की खरीदारी कर हम देश की बेहतर तरीके से सेवा कर सकते हैं।


खादी न सिर्फ रोजगार उपलब्ध कराने बल्कि अपनी संस्कृति का विस्तार करने के लिए सबसे अधिक उपयुक्त क्षेत्र है। जब खादी विदेश में पहुंचता है तो यह हमारे राष्ट्रीय राजदूत की तरह काम करता है। खादी में जाड़े के दिनों में गर्मी और गर्मी के मौसम में ठंड प्रदान करने का विशेष गुण होता है। इसमें इस्तेमाल किए गए सभी धागे हाथ से बनाए होते हैं।


खादी से जितना संभव हो सके बिचौलियों को हटाना चाहिए ताकि अधिकतर फायदे कारीगरों को मिले और वो एक सम्मानित जिंदगी बसर कर सकें। खादी के सौंदर्य को पूरी दुनिया में फैलाने की जरूरत है। हम खादी के माध्यम से गरीबी के संताप से लड़ सकते हैं।


सरकार ने विशेषकर खादी के लिए देशभर में चार डिजाइन केंद्रों की स्थापना करने का फैसला लिया है। हमारे सामने खादी की ओर युवाओं और आकांक्षित लोगों को आकर्षित करने की बड़ी चुनौती है जिसे साधने की जरूरत है।



खादी एवं ग्रामीण उद्योग आयोग (केवीआईसी) के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि केवीआईसी का कारोबार हाल के वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। इस सम्मेलन के जरिए हमारा उद्देश्य इसके कारोबार को आने वाले समय में और अधिक बढ़ाना है।


 खादी में कुछ बुनियादी गुण होते हैं जिन्हें अभी तक समझा नहीं गया है। इस बारे में लोगों को बताने की जरूरत है। खादी एक प्राकृतिक वस्त्र है। यह कार्बन रहित कपड़ा है जिसे कोई मशीन नहीं बना सकती। यह पर्यावरण के काफी अनुकूल है, एक मीटर खादी कपड़ा बनाने में महज 3 लीटर पानी लगता है जबकि इतना ही कपड़ा बनाने में मशीन 56 लीटर पानी की खपत करती है।


 विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि खादी की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ी है जिसके परिणामस्वरुप कारीगरों के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं। खादी मेक इन इंडिया के सबसे बेहतर उदाहरण है। मैं सभी से अपील करता हूं कि खादी और उसके उत्पादों की भावना को समझें और उन्हें एक मंच प्रदान करें। खादी पूरी तरह से हाथ से बुना हुआ उत्पाद है और यह महात्मा गांधी की देन है। हमें इसे उस ऊंचाई तक ले जाना है जिसका यह पात्र है।


 


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