लिवरपूल ने जीता छठा यूएफा चैंपियंस लीग खिताब


लिवरपूल एक ऐसी टीम जो पिछले कुछ सालों में कोई खिताब अपने नाम नहीं कर पाई थी, जिसके लिए मानो ट्रॉफीज का सूखा पड़ गया था, आज वह छठी बार यूरोप के किंग बन गए हैं। फाइनल में टॉटेनहैम को 2 - 0 से हरा उन्होंने यूएफा चैंपियंस लीग का खिताब जीत लिया। लिवरपूल की तरफ से मुहम्मद सला (पेनल्टी) और डीवॉक ओरिगी ने गोल किये। लिवरपूल पिछली बार भी फाइनल में पहुंचा था लेकिन उसे रियल मेड्रिड के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इस बार तो उनकी साख भी दांव पर थी क्योंकि वह प्रीमियर लीग में भी मेनचेस्टर सिटी से एक पॉइंट पीछे रहने की वजह से दुसरे स्थान पर ही रह गए थे। यह खिताब भी उन्होंने आखरी बार 2005 में जीता था।


आइये देखते हैं कोनसी थी वह दो सबसे बड़ी वजहें जिनकी वजह से चैंपियन बना लिवरपूल


1) टीमवर्क



लिवरपूल की पूरी टीम एक यूनिट की तरह खेली। हर खिलाडी ने अपनी भागेदारी पूरी की। पिछले कुछ सीज़न्स की नाकामियों का कारण यह भी था की लिवरपूल कुछ खिलाडियों पर ही आश्रित थी। इस साल यह कहानी बदल गयी और नतीजा भी उसके हिसाब से बदल गया। 


2) जुर्गेन क्लॉप



लिवरपूल की इस खिताबी जीत के सबसे बड़े नायक उनके मैनेजर क्लॉप रहे। उन्होंने इस टीम में एक अलग ही फूर्ति, टीमवर्क और विश्वास डाल दिया। उनका आगमन शायद ही अब कोई भूलेगा। लिवरपूल के खिलाडी कहते हैं की क्लॉप के आने से ड्रेसिंग रूम का माहौल बहुत ही अच्छा रहता है और वह उन सब को अपने दोस्तों की तरह ही ट्रीट करते हैं।   


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