'अयंगर योग' के जन्मदाता थे वी.के.एस. अयंगर

आधुनिक दौर में मनुष्य की दिनचर्या इतनी व्यस्त हो गई है कि उसे अपने स्वास्थ्य का बिल्कुल ख्याल नहीं रहता, और वह असमय ही बड़ी बीमारियों की चपेट में आ जाता है, ऐसे में नियमित योग ही उसे विभिन्न बीमारियों से बचाने में लाभप्रद साबित हुआ है।


योग का इतिहात काफी पुराना है, मगर बदलते दौर में भी उसकी महत्ता बरकरार है। वर्तमान में योग को लेकर लोगों में जागरूकता पैदा करने एवं उसे सिखाने में कई योग गुरू संलग्न हैं, जिन्होंने देश व विश्व के पटल पर अपने ज्ञान की छाप छोड़ी है। उन्हीं गुरू में से एक योग गुरू, बी एस अयंगर, जिन्हें विश्व का सबसे बड़े योग गुरू के नाम से जाना जाता है, अब हमारे बीच नहीं हैं। उनका निधन 20 अगस्त 2014 को पुणे के एक अस्पताल में हो गया।


अयंगर का जन्म बेलैर के एक गरीब परिवार में हुआ था। कहते हैं कि उनका बचपन गंभीर बीमारियों से ग्रस्त था, जिसकी वजह से डॉक्टर उनके जीने की उम्र मात्र 20 वर्ष ही बताते थे, लेकिन योग के जरिये उन्होंने इस भविष्यवाणी को बेमानी साबित कर दिया।


घोर बीमारी से पीछा छुड़ाने के लिये अयंगर ने जो एक बार योग का दामन पकड़ा तो फिर उसी के होकर रह गये। योग के जरिये खुद को स्वस्थ्य रखने की कोशिश के साथ ही इस अनूठी कला को उन्होंने देश और दुनियाँ तक पहुँचाने का भी काम किया।


इसके मद्देनजर वी.के.एस. अयंगर ने कुछ उपकरणों व घरेलू सामान से योग चिकित्सा शुरू की इसमें मसनद, तकिया, रस्सी, लोहे के जाल, दरी, कुर्सी लकड़ी के टुकड़े, बॉक्स आदि की सहायता से ऐसे तरीके ईजाद किए जिससे बुजुर्ग, अक्षम लोगों को भी विभिन्न आसन करवाए जा सकते है, जिसे वे सामान्य रूप से नहीं कर पाते


अयंगर को 'अयंगर योग' का जन्मदाता कहा जाता है। उन्होंने इस योग को देश-दुनिया में फैलाया। उन्होंने जिस अष्टांग योग अलग-अलग अवस्थाओं से जुड़ी शिक्षा हासिल की वही अयंगर योग के नाम से मशहूर हुआ। अयंगर ने योग से संबंधित कई पुस्तके लिखीं, उनमें से एक, लाइट ऑन योग को दुनियाँ में योग का बाइबिल कहा गया। उन्होंने लोगों को यह समझया कि योग केवल एक अभ्यास नहीं बल्कि तन एवं मन को स्वस्थ्य रखने की एक वैज्ञानिक युक्ति है।


बीकेएस अयंगर योग की शिक्षा को लेकर बेहद अनुशासनप्रिय थे। इसका सबसे बड़ा उदाहरण वह खुद थे, जब जीवन में एक बार योग शुरू करने के बाद उन्होंने अंत तक उसका साथ नहीं छोड़ा।


योग गुरू के रूप में अयंगर ने यूँ तो दुनियाँ भर में नाम कमाया मगर चीन में उनकी लोकप्रियता से वह खुद भी ज्यादा परिचित नहीं थे। उन्हें इसका अहसास तब हुआ जब वो चीन की यात्रा पर गये। लोगों ने उनका दिल खोलकर स्वागत किया। बड़ी संख्या में उनके अनुयायियों ने उन्हें घेर रखा था। वहाँ उनके द्वारा लिखित किताब सभी जगह मिल रही थी, अयंगर अभिभूत थे।


इसी तरह दुनियाँ भर में उनके लाखों शिष्य मौजूद थे। अन्य योग गुरूओं की तुलना में बीकेएस अयंगर ने योग को किसी भी आडम्बर से मुक्त रखा। उसे कभी व्यवसाय नहीं बनाया। टाइम मैगजीन के द्वारा जारी लिस्ट में बीकेएस अयंगर को दुनियाँ के 100 प्रभावशाली लोगों में शामिल किया गया था। आज बीकेएस अयंगर हमारे बीच नहीं हैं, मगर अयंगर योग के रूप में उनकी उपस्थिति लाखों लोगों के बीच मौजूद है।


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