कुपोषण से जीत की लिये शुरू हुआ राजमा की खेती का प्रसार


भूख और गरीबी की समस्या देश में बहुत बड़ी है। देश के कई ऐसे राज्य हैं, जहाँ गरीबी और कुपोषण के चलते हर साल बड़ी संख्या में मौत के आँकड़े बढ़ रहे हैं। झारखंड राज्य के कुछ गाँवों के नाम भी इसमें शामिल हैं। कुपोषण से जुड़ी कई बीमारियाँ और इससे होने वाली मानवीय क्षति पर रोक लगाने के लिये पश्चिमी सिंहभूम जिले के सभी प्रखंडों में आत्मा(एग्रीकल्चरल टेक्नॉलॉजी मेनेजमेंट एजेंसी)  किसानों को प्रशिक्षित कर राजमा की खेती के लिये प्रेरित कर रही है। पहले किसान अपने खेतों में दूसरे फसलों को लगाते थे, मगर आत्मा के प्रयास से किसानों की सोच बदल रही है, और वे प्रशिक्षित होकर राजमा की फसल के लिये अग्रसर हो रहे हैं। पश्चिमी सिंहभूम का जलवायु राजमा की खेती के लिये उपयुक्त पाया जा रहा है। इस बारे में आत्मा के परियोजना निदेशक पंकज कुमार सिंह बताते हैं कि राजमा की खेती शुरू करने के लिये प्रेरित करने का ख्याल पश्चिमी सिंहभूम जिले में कुपोषण की समस्या को देखते हुए हैं।


कुपोषण को दूर करने के लिये राजमा बेहतरीन माध्यम है। इसमें सभी तरह के पोषक तत्व जैसे- प्रोटीन, मैग्नीशियम, पोटैशियम आदि शामिल होते हैं। राजमा में पाया जाने वाला विटामीन शरीर को स्वस्थ रखने में मददगार होता है। इसीलिये हमारा मानना है कि लोग इसका नियमित खाने में इस्तेमाल करें। दिल्ली जैसे शहर में राजमा-चावल एक मुख्य और पसंदीदा भोजन के रूप में जाना जाता है। ठीक उसी प्रकार अगर यहाँ के लोग भी खाने में राजमा को हिस्सा बनाने लगें तो काफी हद तक कुपोषण को दूर भगाने में मदद मिलेगी।


निदेशक ने आगे बताया कि किसानों में राजमा की खेती के लिये इस प्रोजेक्ट को पहली बार इस जिले में शुरू किया गया। 18 प्रखंडों में 25 किसानों के समुह को प्रशिक्षण दिया गया। खेतों पर ही किसानों को प्रशिक्षित किया गया। हर प्रखंड में ट्रायल बेसिस पर इसे शुरू किया गया। पहले राजमा की खेती कश्मीर,हिमाचल और दिल्ली के आस-पास के हिस्सों में ही की जाती रही है, क्योंकि इसकी खेती में 30 डिग्री से कम तापमान की जरूरत होती है। इसलिये हमने इस जिले में रबी फसल, यानि नवंबर से फरवरी महीने को ध्यान में रखते हुए तैयार कराया जो काफी फायदेमंद साबित हुआ। इस योजना की शुरूआत प्रधानमंत्री का सपना किसानों की दोगुनी करने की दिशा में है।



पश्चिमी सिंहभूम जिले में पहली बार राजमा की खेती कर रहे किसानों में से एक किसान अजीजुल हक प्रखंड मझगाँव एवं गाँव खड़पोस के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि मैंने 2018 में डेढ़ एकड़ जमीन में राजमा की खेती शरू की। हमें इसके लिये 3/4 दिन प्रशिक्षित किया गया। पहले हम दूसरे फसल लगाते थे, इसलिये राजमा लगाने की हिम्मत नहीं हो रही थी। लेकिन आत्मा के सहयोग एवं हौसला बढ़ाने के बाद खेती शुरू की। इसके बाद फल बहुत बढ़िया हुआ। डेढ़ एकड़ जमीन पर उपजे 10 क्विंटल राजमा अब तक बेच चुके हैं, और अभी भी पैदावार हो रही है। हमारे यहाँ बाहर से व्यापारी आते हैं, और राजमा खरीदकर ले जाते हैं। यह हमारे दिये बहुत फायदेमंद है। आत्मा की तरफ से बीज और खाद मिल जाता है, और हमारा खर्च सिंचाई और हल में हुआ। मेरे साथ साथ दूसरे किसान भी राजमा की खेती के लिये बहुत उत्साहित हैं। इस बार हम और भी जमीन पर राजमा लगाएँगे।


आत्मा के बारे में- आत्मा एक रजिस्टर्ड सोसाईटी के तहत बनी है, जिसमें कृषि मंत्रालय भारत सरकार एवं राज्य सरकार का बराबर योगदान है। इसके गठन का उद्येश्य कृषि की नई पुरानी तकनीक को किसानों तक पहुँचाकर उनके जीवन स्तर को ऊँचा उठाना है।  


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