उन्मुक्त जीवन का सौन्दर्य है गोवा


अगर आप रोजमर्रा की व्यस्त ज़िन्दगी में थोड़ी ताज़गी भरना चाहते हैं, तो निकालिये कुछ दिन फुरसत के और अपने ही देश के खूबसूरत जगहों की सैर करिये। यकीन मानिये आप खुद को तरोताज़ा महसूस करेंगे। खूबसूरत जगहों की बात करें तो उनमें से एक, गोवा का नाम अपने आप ख्यालों में आ जाता है। गोवा इसलिये कि यहाँ उन्मुक्त जीवन का सौन्दर्य है। अगर आप कभी गोवा नहीं गये हैं तो एक बार जरूर जाइये। यहाँ देश ही नहीं विदेशी भी अगर भारत भ्रमण के लिए आते हैं तो एक बार जरूर जाते हैं।


क्यों मशहूर है गोवा


भारत के सबसे फेवरेट हनीमून डेस्टिनेशन गोवा में आपको एक-दूसरे के हाथ थामे कई जोड़े मिल जाएंगे। खूबसूरत समुद्री तट, शानदार मौसम, काजू की मादक फेनी, बेहतरीन नाइट लाइफ और शानदार कसिनो के साथ में हसीन साथी हो, तो कहना ही क्या?


इसलिए सिर्फ देशी ही नहीं, विदेशी पर्यटकों पर भी गोवा का जादू सर चढ़ कर बोलता है। कहते हैं, कि जो एक बार गोवा आ जाए तो वो बार-बार यहां आना चाहता है।


यहां छोटे-बड़े लगभग 40 समुद्री तट है जिनमें से कुछ समुद्र तट तो अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैं। दो बीच तो ऐसे है जहां आज भी भारतीयों को जाना वर्जित है वहां सिर्फ विदेशी ही जा सकते हैं। यही वजह है कि गोवा की विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी एक अलग पहचान है। गोवा के लुभावने समुद्री-तटों की लंबी कतार में अंजुना बीच, पालोलेम बीच, कैलेंगुट बीच, बागा बीच, मीरामार बीच, बागाटोर बीच, सिंकेरियन बीच आदि प्रमुख हैं।



आमतौर पर गोवा में गर्मी के मौसम में पर्यटकों की भीड़ जुटती है लेकिन जुआरी नदी के मुहाने पर स्थित डोनापाउला बीच और इसके विपरीत दिशा में कोलवा बीच ऐसे सागर तटों में शुमार है जहां पर्यटक विशेष तौर पर मानसून के मौसम में आते है। मडगांव से 60 कि.मी. दूर दूधसागर फॉल्स भी मानसून में अपने चरम पर होता है।


मांडवी नदी के तट पर बसे इस शहर में शाम के समय सैलानी रिवर क्रूज का आनंद लेने पहुंचते हैं। मांडवी पर तैरते क्रूज पर संगीत एवं नृत्य के कार्यक्रम में गोवा की संस्कृति की एक झलक देखने को मिलती है। नदी के दूसरे तट पर मछुआरों की रंगबिरंगी मोटर बोट कतार में खड़ी एक अलग दृश्य बनाती है। 


गोवा में कसिनो और क्रूज कसिनो भी बेहद लोकप्रिय हैं। क्रूज कसिनो में पर्यटक सिर्फ जुआ खेलने का ही मजा नहीं लेते बल्कि जहाज की विभिन्न मंजिलों पर रेस्तरां, केंडल लाईट डिनर और नाच-गाने का भी भरपूर लुत्फ उठाते हैं। दरअसल यहां की नैसर्गिक सुंदरता के साथ स्वच्छंद और उन्मुक्त जीवन जीने का तरीका ही खासतौर पर पर्यटकों को गोवा की ओर खींच लाता है।


गोवा के अन्य आकर्षण


गोवा की सुन्दरता केवल यहां के सागर तटों तक ही सीमित नहीं है। यहां कई ऐतिहासिक चर्च हैं जिनमें सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी, होली स्पिरिट, पिलर सेमिनरी, सालीगांव और रकोल सेमिनरी महत्वपूर्ण हैं। इनके अलावा सेंट काजरन चर्च, सेंट आगस्टीन टॉवर, ननरी ऑफ सेंट मोनिका और सेंट एरक्स चर्च भी मशहूर है।


 


दरअसल चर्चों के इतिहास के बारे में कहा जाता है कि करीब 450 वर्ष के पुर्तगाली उपनिवेश काल में यहां अनेक भव्य चर्च बनाए गए थे, जिनके कारण आज गोवा को भारत का रोम भी कहा जाता है। पूरी दुनिया में गोवा अपने खूबसूरत समुद्र के किनारों और मशहूर स्थापत्य कला के लिए ही जाना जाता है। 


गोवा में नॉन-वेजिटेरियन खाना और सी-फूड बेहद लोकप्रिय है लेकिन इन्हें ज्यादातर कॉन्टिनेंटल तरीके से पकाया जाता है। यहां का मुख्य भोजन ही मछली करी के साथ चावल है। कई पर्यटक तो लजीज सी-फूड का मजा लेने ही खासतौर पर गोवा आते हैं। यहां खाना पकाने में व्यापक रूप से नारियल, नारियल तेल और विशेष तरह के मसाले इस्तेमाल किए जाते हैं।



 गोवा में सबसे लोकप्रिय पेय फेनी है इसमें भी काजू फेनी सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, जो काजू के पेड़ के फल के किण्वन से बनाई जाती है। नारियल फेनी भी यहां काफी पसंद की जाती है। मिठाई के रूप में यहां सामान्य तौर पर चॉकलेट, केक, पेस्ट्री जैसे यूरोपीय व्यंजन प्रचलित हैं।


गोवा कार्निवाल गोवा के प्रमुख आकर्षणों में से एक है जिसे देखने देश से ही नहीं विदेश के कोने-कोने से सैलानी यहां पहुंचते हैं। गोवा कार्निवाल यहां की लोक संस्कृति की एक शानदार झलक पेश करता है। हर बार इसे एक खास थीम से भी जोड़ा जाता है। दरअसल गोवा में इसका चलन पुर्तगालियों के जरिए आया और फिर समय के साथ ये यहां की स्थानीय संस्कृति में रच-बस गया। गोवा कार्निवाल तीन दिन चलने वाला गीत-संगीत, रंग-मनोरंजन का त्योहार है। इस दौरान छुट्टी की रंगत हर चेहरे पर छाई रहती है। बेहद प्राचीन होने के साथ-साथ यह बसंत आगमन पर व्यक्त की जाने वाली खुशी का प्रतीक भी है। इस दौरान हर तरफ बस उमंग का सैलाब ही दिखाई पड़ता है। गोवा के मुख्य कस्बों व गांवों की भीड़ भरी गलियों में रंगबिरंगे लिबास और मुखौटे पहने जन-समूह और हवाओं में गूंजता ढोल-मृदंग का संगीत चारों ओर उल्लास का माहौल बनाता है। झांकियों के साथ-साथ स्थानीय कलाकार लोक कलाओं व लोक संगीत का समां बांधते हैं। झांकी में सबसे आगे चलते हैं गोवा के पारंपरिक राजा और उनके पीछे नाचते-गाते लोग।


 


 पार्टी करने के लिए स्वर्ग है गोवा


शाम होते ही गोवा, पार्टियों के स्वर्ग में बदल जाता है। यहाँ की पुलिस भी जानती है कि गोवा सुबह 3 बजे जागता है। आपके लिए एक सुझाव है कि गोवा में देर रात को बिना वाहन के इतनी दूर जाने में परेशानी हो सकती है क्योंकि यहाँ आसानी से टैक्सी नहीं मिलती। कैलेग्यूट बीच के पास उत्तरी गोवा के दो बहुत प्रसिद्ध नाइट क्लब हैं-टीटोस कैफे और मैम्बोस कैफे। इन जगहों पर गलियों में घूमते हुए आप सड़क किनारे बने किसी भी रेस्टोरेंट और बार में किफायती खाने के साथ शराब और सभी तरह के संगीत का मजा ले सकते हैं। पारंपरिक नाइट क्लबों के अलावा बीच पर बनी कुछ छोटी जगहों पर भी अच्छी पार्टियाँ होती हैं, लेकिन लहरों और पुलिस के होते हुए दूर बने बीचों पर जाना बहुत आसान नहीं होता है। यहाँ का भोजन बेहद लजीज होता है और आप बेहतर शॉपिंग कर सकते हैं।


भारत के मानचित्र पर गोवा 


गोवा या गोआ, क्षेत्रफल के हिसाब से भारत का सबसे छोटा और जनसंख्या के हिसाब से चैथा सबसे छोटा राज्य है। पूरी दुनिया में गोवा अपने खूबसूरत समुंदर के किनारों और मशहूर स्थापत्य के लिये जाना जाता है। गोवा पहले पुर्तगाल का एक उपनिवेश था। पुर्तगालियों ने गोवा पर लगभग 450 सालों तक शासन किया और दिसंबर 1961 में यह भारतीय प्रशासन को सौंपा गया।


 यूरोपीय संस्कृति का प्रभाव


गोवा करीब-करीब 500 साल तक पुर्तगाली शासन के आधीन रहा, इस कारण यहाँ यूरोपीय संस्कृति का प्रभाव बहुत महसूस होता है। गोवा की लगभग 60 प्रतीशत जनसंख्या हिंदू और लगभग 28 प्रतीशत जनसंख्या ईसाई है। गोवा की एक खास बात यह है कि, यहाँ के ईसाई समाज में भी हिंदुओं जैसी जाति व्यवस्था पाई जाती है।


गोवा के दक्षिण भाग में ईसाई समाज का ज्यादा प्रभाव है लेकिन वहाँ के वास्तुशास्त्र में हिंदू प्रभाव दिखाई देता है। सबसे प्राचीन मन्दिर गोवा में दिखाई देते है। उत्तर गोवा में ईसाइ कम संख्या में हैं इसलिए वहाँ पुर्तगाली वास्तुकला के नमूने ज्यादा दिखाई देते है।


हालाँकि पुर्तगाली लोगों ने यहाँ के संस्कृति का नामोनिशान मिटाने के लिए बहुत प्रयास किए लेकिन यहाँ की मूल संस्कृति इतनी मजबूत थी की धर्मांतरण के बाद भी वो मिट नहीं पाई।  


एक गंतव्य स्थान के तौर पर गोवा अन्य जगहों से भलीभांति जुड़ा है, और यहाँ हर उम्र के लोग छुट्टियाँ बिताने के लिए आसानी से पहुँच सकते हैं। नाइट-लाइफ, बीच और पार्टियों के अलावा यहाँ भारत के दूसरे शहरों की अपेक्षा अधिक शांति है जो देशी यात्रियों के लिए एक अच्छा परिवर्तन हो सकता है। छुट्टियाँ बिताने आए विदेशी यात्री यहाँ के खुलेपन, हवा और घुमावदार गलियों का मजा ले सकते है। 


कैसे आएँ गोवा


 डैबोलिम विमानक्षेत्र यहाँ का घरेलू हवाई अड्डा है जो देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है। अभी हाल के वर्षों में गोवा के लिये पणजी हवाई अड्डे से अंतर्राष्ट्रीय उड़ाने भी शुरु हुई हैं। सड़क मार्ग से गोवा मुम्बई, बंगलोर से काफी अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, इन शह्रों से गोवा के लिये सीधी लक्जरी बसें चलती हैं। इसके अलावा अन्य नजदीक के शहर भी आप सड़क द्वारा यहाँ से जा सकते हैं। इसके अलावा रेल मार्ग से भी गोआ पहुंचा जा सकता है। जबसे यहाँ कोंकण रेलवे की शुरुआत हुई है गोवा भारत के पूर्वी तटीय शहरों से जुड़ गया है।


कोंकण रेलवे अपनी गति और अच्छी सेवा के लिये पूरे भारत में मशहूर है। इसके अलावा गोवा आने के लिये देश के किसी भी बड़े स्टेशन से आप वास्को द गामा के लिये सीधी रेलगाड़ी पकड़ सकते हैं। गोवा पहुँचने पर बिना मीटर और मीटर वाली टैक्सियाँ यहाँ पर्यटकों को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने का सबसे लोकप्रिय साधन है। बिना मीटर वाली टैक्सियों में यात्री पहले से भाड़े के बारे में तय करते हैं। इसके अलावा बस से भी के अंदर एक से दूसरे जगह जाया जा सकता है।


गोवा में ज्यादातर बसे प्राईवेट चालकों द्वारा चलाई जाती हैं। आम तौर पर बसों में काफी भीड़ होती है। गोवा सरकार द्वारा यहाँ कदम्ब बस सर्विस चलाई जाती है जिनमें धीरे चलनेवाली बसों से लेकर द्रुत सेवा की लंबी दूरी की बसें शामिल होती हैं। समुद्र में नाव के द्वारा भी एक से दूसरे बीच तक जाने का प्रबंध सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर है।


 


 


 


 


 


 


 


 


 


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