श्रेया घोषाल को 25 वर्ष की उम्र में मिले तीन राष्ट्रीय पुरस्कार

श्रेया घोषाल भारतीय संगीत जगत में जाना पहचाना नाम है। इन्हें मधुर और अपने दिलकश आवाज के लिये जाना जाता है। 12 मार्च को श्रेया के जन्म दिवस के मौके पर इनका संक्षिप्त परिचय देते हुए  नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया से सम्मानित गैर सरकारी संस्था दर्शन मेला म्यूजियम डेवलपमेंट सोसायटी की प्रमुख उपलब्धि ‘पाठक मंच‘ का साप्ताहिक निःशुल्क कार्यक्रम ‘इन्द्रधनुष‘ की 656वीं कड़ी में बताया गया कि “श्रेया घोषाल एक भारतीय पार्श्व गायिका है।


इन्हांने बॉलीवुड के क्षेत्रीय फिल्मों में बहुत सारे गाने गाए हैं और कस्तूरी जैसे भारतीय धारावाहिकों के लिए भी गाया है। हिंदी के अलावा इन्होंने असमियां, बंगला, कन्नड़, मलयालम, मराठी, पंजाबी, तामिल, तेलुगु और भोजपुरी में भी गाने गाए हैं। इनका जन्म 12 मार्च 1984 को एक बंगाली परिवार में हुआ। ये राजस्थान के कोटा के पास एक छोटे से कस्बा रावतभाटा में पली-बढ़ी। ये शिक्षित परिवार से हैं। इनके पिता भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र अभियंता के रूप में भारतीय नाभिकीय ऊर्जा निगम के लिए कार्यरत रहे, इनकी माँ साहित्य के स्नातकोत्तर छात्रा रही।


चार साल की उम्र से श्रेया ने हारमोनियम पर अपनी माँ साथ संगत किया। इनकी माता पिता इन्हें कोटा में महेश चंद्र शर्मा के पास हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा के लिए भेजा। बच्ची के रूप में जी॰ टीवी पर ‘सा रे गा मा पा‘ की चिल्ड्रन स्पेशल एपिसोड की प्रतियोगिता का खिताब जीता। फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली का ध्यान इनकी ओर तब खींचा जब इन्होंने ‘सा रे गा मा पा‘ में दूसरी बार भाग लिया, इस बार ये वयस्कों के साथ प्रतिस्पर्धा में भाग ले रही थीं। साल 2000 में इन्होंने फिल्म ‘देवदास‘ में मुख्य महिला की भूमिका किरदार ‘पारो‘ की आवाज के लिए मौका देने का प्रस्ताव रखा। ‘पारो‘ की भूमिका ऐर्श्वया राय को निभाना था। इन्होंने बहुत सारे भारतीय टीवी धारावाहिकों के लिए शीर्षक गीत भी गाए।


2009 में सर्वश्रेष्ठ गायिका का फिल्मफेयर अवार्ड मिला। साथ ही उभरती प्रतिभाओं के लिए दिए जाने वाला आर॰ डी॰ बर्मन पुरस्कार से सम्मानित हुई। इन्होंने उत्तर और दक्षिण फिल्म उद्योगों के लिए बहुत सारे पुरस्कार जीते। ये हिंदी फिल्म उद्योग की एक ऐसी गायिका हैं, जिन्हें 25 वर्ष की उम्र में तीन राष्ट्रीय पुरस्कार मिले।”


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