चुनावों के दौरान उपराष्ट्रपति का मीडिया से पार्टियों का रिपोर्ट कार्ड पेश करने का आह्वान


उपराष्‍ट्रपति एम. वैंकेया नायडू ने मीडिया को सलाह दी है कि वह चुनावों के दौरान जनता को सुविज्ञ रूप से विकल्‍प तय करने में समर्थ बनाने के लिए एकदम तटस्‍थ रह कर दलों के प्रदर्शन के बारे में रिपोर्ट कार्ड प्रस्‍तुत करें।


भारतीय जन संचार संस्‍थान द्वारा ‘’प्रबुध मतदाता को ढालने में मीडिया की भूमिका’’ विषय पर आयोजित प्रथम ‘अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति व्याख्यान’ में उपराष्‍ट्रपति ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि अगर मीडिया राजनीतिक दलों का रिपोर्ट कार्ड प्रस्‍तुत करे और जनता राजनीतिक दलों से उनके वादों, संसाधनों में वृद्धि करने और उन्‍हें खर्च करने के तरीकों के बारे में हिसाब मांगे तो “हमारा देश दुनिया का सबसे विशाल लोकतंत्र होने के साथ-साथ सबसे अधिक जीवंत, स्‍वच्‍छ लोकतंत्रों में शुमार होने पर गर्व करेगा।‘’


उपराष्ट्रपति नायडू ने कहा कि मीडिया को एक दर्पण की तरह कार्य करते हुए केवल सच्‍चाई का प्रतिबिम्‍ब प्रस्‍तुत करना चाहिए, ना तो उसे किसी घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना चाहिए, ना ही कम करके आंकना चाहिए तथा  ना ही तथ्‍यों को तोड़ना-मरोड़ना चाहिए और  ना ही उन्‍हें रहस्‍यमय बनाना चाहिए। उपराष्‍ट्रपति ने “पेड न्‍यूज की बुराई” पर भी चिंता प्रकट की। उन्‍होंने पेड न्‍यूज के द्वारा बनाये गए विचारों और दृष्टिकोणों के माध्‍यम से मतदाताओं को रिझाने का जोखिम कम करने के लिए मीडिया को इस प्रवृत्ति से बचने की सलाह दी।


उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि वह चाहते हैं कि मीडिया एजेंडा सैट करने और किसी का पक्ष लेने की जगह, चुनावों से पहले मुद्दों और चुनौतियों का वि‍श्‍लेषण करे।


उन्होंने विभिन्‍न राजनीतिक संगठनों द्वारा प्रचारित की जा रही अफवाहों का खंडन करने और पाठकों और दर्शकों के सामने सही तथ्‍य प्रस्‍तुत करके फेक न्‍यूज के आगे पूर्ण विराम लगाने का आह्वान किया। उन्‍होंने कहा कि तथ्‍य अटूट होते हैं और उनको बहुत ही तटस्‍थ रूप से प्रस्‍तुत किया जाना चाहिए तथा उनके बारे में राय कायम करने का जिम्‍मा जनता पर छोड़ दिया जाना चाहिए।


मीडिया की बड़ी तादाद में मतदाताओं को प्रेरित करने में अहम भूमिका निभाने की  समर्थता को देखते हुए नायडू ने कहा कि चुनावों को ज्‍यादा विश्‍वसनीय और समावेशी बनाने के लिए धन बल और बाहुबल, चुनाव खर्च की सीमाओं का उल्‍लंघन, जाति और धर्म का सहारा लेना, उम्‍मीदवारों का आपराधिक चरित्र, पेड न्‍यूज और फेक न्‍यूज आदर्श आचार संहिता का उल्‍लंघन, विधानसभाओं में महिलाओं के अपर्याप्‍त प्रतिनिधित्‍व जैसे खतरों को जल्‍द मिटाने की जरूरत है।


फेक न्‍यूज से निपटने की दिशा में भारत निर्वाचन आयोग की ओर से किए गए प्रयासों का उल्‍लेख करते हुए नायडू ने कहा कि चुनाव के दौरान मीडिया की भूमिका अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है, क्‍योंकि इस दौरान लोगों द्वारा फेक न्‍यूज को प्रचारित करने की आशंकाएं बढ़ जाती हैं। उन्‍होंने कहा, ‘’ऐसे संवेदनशील दौर में मीडिया की जिम्‍मेदारी है कि वह मिथक तोड़ने वाले की तरह काम करे और केवल पूर्ण, विशुद्ध सत्‍य को ही प्रस्‍तुत करे।‘’


निर्वाचन प्रक्रिया को स्‍वस्‍थ लोकतंत्र की कसौटी करार देते हुए उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि पक्षपात रहित मीडिया यह सुनिश्चित करता है कि मतदाता अपने विकल्‍प के बारे में समस्‍त जानकारी रखते हों।


तथ्‍यों के साथ अपनी टिप्‍पणी जोड़ने की मीडिया की प्रवृत्ति को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताते हुए उन्‍होंने कहा, ‘’जैसा कि पुरानी कहावत है कि तथ्‍य अटूट होते हैं और राय मुक्‍त होती है। इसलिए तथ्‍यों पर अडिग रहो, निर्भीक होकर उन्‍हें व्‍यक्‍त करो और निडर होकर अपनी राय दो, लेकिन अपनी राय प्रकट करते समय तथ्‍यों को ना बदलो।‘’


निर्वाचित होने के बाद राजनीतिज्ञोंकी एक दल को छोड़कर दूसरे दल में जाने की हानिकारक प्रवृत्ति पर चिंता प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि दलबदलू प्रवृत्ति से लोकतंत्र का उपहास हो रहा है। उन्‍होंने कहा कि दल-बदलुओं को अपने पद से इस्‍तीफा देना चाहिए और दोबारा चुन कर आना चाहिए।


      उपराष्‍ट्रपति ने विभिन्‍न अदालतों में लम्बित चुनाव से सम्‍बन्धित मामलों को जल्‍द निपटाने पर भी जोर दिया। नायडू ने मीडिया संगठनों से कहा कि राजनीतिज्ञों के बीते जीवन, उनके पिछले कार्य, राज्‍य विधानसभाओं और संसद में होने वाली चर्चाओं में उनकी भागीदारी के बारे में जानकारी देने के लिए पर्याप्‍त जगह और समय प्रदान करें। 


उपराष्ट्रपति ने लोगों से नेताओं का चुनाव उनके चरित्र, स्‍वभाव, क्षमता और आचरण के आधार पर करने का आह्वान किया, लेकिन साथ ही आगाह किया कि कुछ लोग इनके स्‍थान पर नकदी, समुदाय, जाति और अपराधिकता(4सी) पर बल देने की कोशिश कर रहे हैं। "हमें अंदाजा लगा लेना चाहिए कि ये 4सी  आने वाले हैं और ऐसे में सावधान रहना चाहिए।",


      उपराष्‍ट्रपति ने सार्वजनिक विचार-विमर्श के स्‍तर में गिरावट आने पर दुख प्रकट किया और बहस की गुणवत्‍ता बढाने की इच्‍छा प्रक्‍ट की।


इस अवसर पर प्रसार भारती के अध्यक्ष, डॉ. ए. सूर्य प्रकाश, आईआईएमसी के महानिदेशक, के. जी. सुरेश, संकाय और संस्थान के छात्र उपस्थित थे।


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