वसीयत बनाने के नियम क्या हैं ?


कोई भी व्यक्ति मृत्यु के पहले अपना वसीयतनामा लिख कर मरे, यह आवश्यक नहीं है। कोई मृत्यु के पहले वसीयत बनाते हैं, और कोई नहीं बनाते। अगर किसी ने अपनी वसीयत लिखी है, तो उसकी संपत्ति का बंटवारा उसकी ईच्छा अनुसार ही होगा, और अगर किसी व्यक्ति ने अपना वसीयतनामा नहीं लिखा है, और वह इसाई या पारसी है तो उसकी संपत्ति को भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के तहत बांटा जाता है। इसी तरह किसी हिंदू ने अगर अपनी वसीयत ना लिखी हो तो उसे हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत बांटा जाएगा। ठीक इसी प्रकार मुस्लिम होने पर मुस्लिम कानून के मुताबिक संपत्ति मिल सकेगी। वसीयतनामा होने पर उत्तराधिकारियों में संपत्ति का बंटवारा सुस्पष्ट तरीके से हो सकता है। वसीयत को हम कई बार बदल सकते हैं, और इसे कभी भी खत्म भी किया जा सकता है। किसी भी व्यक्ति के वसीयतनामे में यदि कोई कमी रह जाती है तो जहाँ तक संभव हो कोर्ट उसे प्रभावित बनाने का प्रयास करता है।


यदि किसी संपत्ति के मामले में एक से अधिक बार वसीयत लिखी गई है, और वसीयतनामा लिखवाने वाले की मृत्यु हो जाती है तब जिस वसीयतनामे को अंतिम बार लिखा गया है, वही सही एवं प्रभावी माना जाएगा। वसीयतनामा करने की आयु 18 साल से अधिक की हो व वह स्वस्थ दिमाग का हो, ऐसी स्थिति में वसीयत स्वयं बना सकता है। वसीयतनामा के लिये कानूनी एवं तकनीकी भाषा की एवं वसियतनामा लिखने के लिये किसी भी स्टांप पेपर की जरूरत नहीं होती है। वसीयतनामा लिखवाने वाले की मंशा एवं शब्द मायने रखते हैं। जिस व्यक्ति के द्वारा वसीयतनामा लिखा या लिखवाया जा रहा है, उसे वसीयतनामे पर हस्ताक्षर करने होते हैं। इसमें दो गवाहों के हस्ताक्षर भी आवश्यक हैं। वसीयतनामा में दिये गये संपत्ति(चल-अचल) के विवरण नहीं सही नहीं मानी जाएगी। केवल वसीयतनामा करने वाला व्यक्ति ही अपनी वसीयत बदल सकता है। दो या दो से अधिक लोग भी संयुक्त रूप से वसीयतनामा लिख सकते हैं।


प्रोबेट ही वसीयत का साक्ष्य होता है। प्रोबेट को हम वसीयतनामा की सर्टिफाईड कॉपी भी कह सकते हैं। प्रोबेट की एप्लीकेशन कोर्ट में की जाती है।इसके बारे में स्थानीय समाचार पत्र में जानकारी देना आवश्यक होता है। जानकारी होने पर वसीयतनामा करने वाले का रिश्तेदार आपत्ति व्यक्त कर सकता है, एवं उसे चुनौती दे सकता है। अदालत इस तरह के मामलों में उत्तराधिकारियों से पूछती है कि क्या उन्हें इस वसीयतनामे से कोई आपत्ति है..? आपत्ति नहीं रहने की स्थिति में कोर्ट उन्हें प्रोबेट सौंप देती है।


वसीयतनामे की सर्टिफाईड कॉपी कोर्ट द्वारा दी जाती है, जिसे हम प्रोबेट के नाम से जानते हैं। वसीयतनार्े की प्रमाणिकता एवं सत्यता प्रोबेट द्वारा ही सिद्ध होती है। वसीयत करने में करने वाले को वृहत कानूनी जानकारी हो यह आवश्यक नहीं होता, कोई भी व्यक्ति इसे लिखवा सकता है, लेकिन फिर भी कुछ नियम हैं, जिनका पालन करना आवश्यक होता है।


मो. 9717420467


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