चुनाव के लिये कोई वैधानिक प्रक्रिया को लांघ नहीं सकताः पाठक।

 दरभंगा ,3 जुलाई 2021(एजेंसी)।


उत्तराखंड में तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री पद से हटाया जाना भाजपा का आगामी विधान सभा चुनाव से जुड़ा मसला है, इसे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जोड़ कर देखना किसी रूप में ठीक नहीं है।

 यह बात वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक चिंतक अरविन्द पाठक ने आज यहां एक इंटरव्यू के दौरान कही। उन्होंने कहा कि इन दोनों मामले में कहीं कोई समानता नहीं है और इस तरह की बातें मूर्खतापूर्ण है। यूनाइटेड इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पाठक ने कहा कि भाजपा ने उत्तराखंड में तीरथ सिंहर रावत को चुनाव को ध्यान में रख कर बदला है। पार्टी उत्तर प्रदेश में भी बदलाव के पक्ष में है,लेकिन कई कारणों से ऐसा नहीं हो पा रहा है।

 यह पूछे जाने पर कि रावत को संवैधानिक वैधता की वजह से हटाया गया है,क्योंकि वह विधानसभा के सदस्य नहीं थे, इसके जवाब में पाठक ने कहा कि उनका छह माह बीता नहीं था। वैसे भी वहां अगले साल के शुरू में चुनाव होना है, इसलिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं थी।

 इस सवाल पर कि इसके बहाने ममता बनर्जी पर इस्तीफे का दवाब बनाया जा सकता है, हो सकता है,लेकिन वहां की स्थिति बिलकुल अलग है। संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल जगदीप धनकड़ प्रदेश से दिल्ली तक राज्य की हालत खराब होने की बात कह रहे हैं,तो फिर केंद्र वहां राष्ट्रपति शासन लगाने की हिम्मत क्यों नहीं करता है?

 उन्होंने कहा कि पहले राज्यपाल अगर किसी सरकार के कामकाज से सिर्फ अप्रसन्नता जाहिर करते थे,तो वहां की सरकार खुद इस्तीफा दे देती थी। अगर ऐसा किसी कारण नहीं हुआ तो राष्ट्रपति शासन लगाया जाता था।वहां यह दोनों नहीं हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह जनता ने कुछ ही महीने पहले ममता बनर्जी को भारी बहुमत से चुना है।

एक अन्य सवाल के जवाब में अरविन्द पाठक ने कहा कि चुनाव कब हो इसके लिए प्रक्रियाएं है। इसको कोई लांघ नहीं सकता है। इसे वैध कारणों से आगे पीछे किया जा सकता है, मगर इसे एकदम से कोई पलट नहीं सकता है। आयोग भी नियमो से बंधा है। कम से कम भारतीय व्यवस्था में ऐसा संभव नहीं है।

 

 

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