किशोर को चुनौती देते हुए महमूद ने कहा- एक दिन मैं भी बड़ा फिल्मकार बनूंगा


कुछ सिनेमा, कुछ अदाकार अपने किसी खास प्रस्तुति और बेहतरीन अदायगी से सदाबहार हो जाते हैं। हर दौर में वे खास रूप में पसंद किये जाते हैं। सन 1968 में एक फिल्म पड़ोसन बनी जिसमें काम करने वाले दो कलाकारों ने अपने उच्च कोटि के हास्य अभिनय से लोगों को हंसा-हंसाकर लोट-पोट किया। आज भी उनके मुरीदों की कमी नहीं है। उन्हीं में से एक कलाकार महमूद का आज यानि 29 सितंबर को जन्मदिन मनाया जा रहा है। बात जब पड़ोसन की हुई है तो इन दोनों कलाकारों की मजेदार कहानी का जिक्र होना भी जरूरी है। उन  दिनों किशोर कुमार की कॉमेडी का जादू छाया था। महमूद ने अपने कैरियर के सुनहरे दौर से गुजर रहे किशोर से अपनी फिल्म में भूमिका देने की गुजारिश की थी, लेकिन महमूद की प्रतिभा से पूरी तरह वाकिफ किशोर ने कहा था कि वह ऐसे व्यक्ति को कैसे मौका दे सकते हैं, जो भविष्य में उन्हें चुनौती देने का माद्दा रखता हो।


तब किशोर को चुनौती देते हुए महमूद ने कहा- एक दिन मैं भी बड़ा फिल्मकार बनूंगा और आपको अपनी फिल्म में भूमिका दूंगा। महमूद अपनी चुनौती पर खरे उतरे और अपनी होम प्रोडक्शन की फिल्म पड़ोसन में किशोर को भूमिका दी। इन दोनों महान कलाकारों के जुगलबंदी से 1968 की ये फिल्म हिंदी फिल्म जगत के श्रेष्ठ हास्य फिल्मों की श्रेणी में है। 


 महमूद का जन्म बंबई (मुंबई) के बितानी में में हुआ था।  इनकी मां मुमताज अली नृत्य कलाकार थी। पिता लतीफुन्निसा अली इनके प्रेरक रहे। शुरुआत में इन्होंने बाल कलाकार के तौर पर काम किया। इनको फिल्मों में सबसे बड़ा ब्रेक 1958 की फिल्म परवरिश में मिला। इसमें इन्होंने फिल्म के नायक राज कपूर के भाई की भूमिका निभायी।  अपनी संवाद अदायगी और अभिनय के लाजवाब अंदाज़ से महमूद ने करोड़ों लोगों को अपना दीवाना बना लिया।


तीन दशक के अपने कैरियर में इन्होंने 300 से अधिक हिंदी फिल्मों में काम किया। निर्देशक के रूप में इनकी अंतिम फिल्म शाहरुख खान को लेकर दुश्मन दुनिया का बनी। 1996 के इस फिल्म में महमूद ने अपने बेटे मंजूर अली को पर्दे पर उतारा था। इन्हीं सफर के साथ 23 जुलाई 2004 को अमेरिका के पेंसिल्वेनिया शहर में महान हास्य कलाकार ने दुनियां से विदा ले लिया।  


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